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‘कभी खुशी-कभी डर’; मूड के हिसाब से न करें निवेश, बिगड़ जाएगी मुनाफे की गणित

बहुत से लोग ऐसे होते हैं तो बाजार में आई तेजी देखकर खुश हो जाते हैं और अपने इमरजेंसी फंड को भी निवेश में झोंक देते हैं.

Updated: Jun 16, 2020 9:31 AM
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कोरोना वायरस महामारी संकट ही नहीं, पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं, जब इक्विटी मार्केट में बड़ी गिरावट आई. वहीं कई बुल फेज भी रहे, जब बाजार में अच्छी खासी रैली देखने को मिली. बहुत से लोग ऐसे होते हैं तो बाजार में आई तेजी देखकर खुश हो जाते हैं और अपने इमरजेंसी फंड को भी निवेश में झोंक देते हैं. वहीं बहुत से लोग ऐसे भी हैं कि बाजार में आई मंदी से निराश होकर या डरकर अच्छे से अच्छा शेयर अपने पोर्टफोलियो से हटा देते हैं. यह पूरी तरह से गलत रणनीति है. गुस्सा, डर, खुयाी या गम जैसे इमोशन में आकर कभी भी निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए. इससे आपका नुकसान और बढ़ सकता है.

उतार चढ़ाव के फेज

1 अप्रैल 2000 से 1 सितंबर 2002 के दौरान टेक बबल से बाजार में करेक्शन देखने को मिला. इस दौरान सेंसेक्स में करीब 32 फीसदी गिरावट आई.

अप्रैल 2003 से दिसबंर 2007 के दौरान शेयर बाजार में बुल फेज चला. इस दौरान सेंसेक्स में 49 फीसदी तेजी आई.

जून 2008 से मार्च 2009 के दौरान सब प्राइम क्राइसिस के चलते शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. इस दौरान सेंसेक्स में 45 फीसदी गिरावट रही.

जनवरी 2011 से जनवरी 2012 के बीच यूरोपीयन क्राइसिस से सेंसेक्स में 15 फीसदी गिरावट आई.

मार्च 2015 से जून 2016 के बीच चाइनीज क्राइसिस के चलते सेंसेक्स करीब 6 फीसदी टूट गया.

नोटबंदी के बाद जनवरी 2017 से दिसंबर 2018 के बीच सेंसेक्स में 6 फीसदी तेजी रही.

निवेश के टिप्स

HAPPY: जब बाजार की रैलर देखकर मूड खुश हो जाता है तो उस खुशी में बिना सोचे समझे बाजार में पैसा लगाने से बचना चाहिए. बहुत से लोग इमरजेंसी फंड भी इस दौरान ​बाजार में लगात देते हैं. यह गलत रणनीति है.

FEAR: कई बार बाजार में लंबी गिरावट देखकर निवेशक डर जाते हैं. उन्हें लगता है कि उनके पास पड़े अच्छे शेयरों में भी उनका नुकसान बढ़ेगा. इस वजह से वे कवालिटी स्टॉक भी बेचकर निकल जाते हैं. ऐसा करने की वजह जब बाजार में लोगों में डर बैठ गया हो, क्वालिटी शेयरों की आकर्षक वैल्युएशन पर तलाश करनी चाहिए.

SAD: बाजार में कुछ मौके ऐसे भी आए हैं, जब लंबे समय तक के लिए बाजार रेंज बाउंड ही रह जाता है. यानी उसमें किसी तरह की न तो तेजी और न ही गिरावट देखने को मिलती है. ऐसे में उम्मीद पूरी न होने से बहुत से निवेशक दुखी हो जाते हैं. वे निवेश के दूसरे विकल्प तलाशने लगते हैं. यह गलत तरीका है. ऐसे मौके पर अगर आप एसआईपी कर रहे हैं या अच्छे शयरों में पैसा लगा चुके हैं तो उसे जारी रखना चाहिए और बाजार के बुल फेज में आने का इंतजार करना चाहिए.

SURPRISE: कुछ लोग बाजार में अचानक आई वोलैटिलिटी को देखकर सरप्राइज हो जाते हैं. इसमें उनके फैसले गलत हो सकते हैं. यह समझना चाहिए कि बाजार में वोलैटिलिटी साइक्लिक होती है. यह समय समय पर आती रहती है. ऐसे समय में भी बेहतर विकल्प में निवेया करना चाहिए.

ANGER: अगर ये सारी गाइडलांइस का पालन किया जाए तो निवेशकों का पोर्टफोलियो खराब नहीं होगा. ऐसे में बेवजह गुस्से से आप बच जाएंगे.

 

(लेखक: एके निगम, डायरेक्टर, BPN फिनकैप कंस्लटेंट्स प्राइवेट लिमिटेड)

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