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FD से घट रही है इनकम, सुरक्षित और बेहतर रिटर्न के लिए कहां लगाएं पैसा?

आइए जानते हैं 4 ऐसे​ निवेश विकल्पों के बारें में जहां आप निवेश कर अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं.

Published: June 10, 2020 8:44 AM
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देश में आम लोगों के लिए बैंक एफडी एक परंपरागत निवेश विकल्प है. अमूमन लोग अपनी गाढ़ी कमाई को बैंक एफडी में ही लगाना पसंद करते हैं. इसमें पैसा कमोबेश सुरक्षित रहता है और निश्चित समय पर अच्छा खासा रिटर्न मिलता है. लेकिन, आज के समय में फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) पर ब्याज दरें लगातार गिर रही हैं. कुछ खास परिपक्वता वाली एफडी पर ब्याज दरें बचत खाते के बराबर या उससे कम हो गई हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि निवेशकों को अब कहां निवेश करना चाहिए, जिससे कि उनका पैसा भी सुरक्षित रहे और रिटर्न भी बेहतर मिल सके.

बाजार में आज निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं. इनमें से कई निवेश बाजार की जोखिमों के अधीन है, ऐसे में कोरोनावायरस महामारी के दौर में कहां निवेश किया जाए. आइए जानते हैं 4 ऐसे​ निवेश विकल्पों के बारें में जहां आप निवेश कर अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं. साथ ही साथ आपका पैसा भी तुलनात्मक रूप से सेफ रहेगा.

1. पोस्ट ऑफिस RD

पोस्ट ऑफिस यानी डाक घर की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक ऐसा विकल्प है, जहां आपकी जमा पर निश्चित ब्याज तो मिलेगा ही, साथ ही पैसा पूरा सेफ रहेगा. क्योंकि, डाक घर की डिपॉजिट पर भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी होती है, जबकि बैंकों में जमा पर अधिकतम 5 लाख तक ही रकम सुरक्षित रहती है. इस तरह, हर महीने छोटी बचत को निवेश कर लाखों का फंड तैयार कर सकते हैं. डाक घर की आरडी पर मौजूदा समय में 5.8 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है.

डाक घर की आरडी में सिंगल अकाउंट और ज्वॉइंट अकाउंट दोनों की सुविधा है. ज्वॉइंट अकाउंट में अधिकतम 3 बालिग के नाम हो सकते हैं. 10 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे के नाम भी खाता अभिभावक अपनी देख रेख में खोल सकते हैं. RD की मेच्योरिटी 5 साल की होती है, लेकिन मेच्योरिटी के पहले आवेदन देकर इसे अगले 5-5 साल के लिए बढ़ा सकते हैं. आरडी अकाउंट में कम से कम 100 रुपये महीना और 10 के गुणक में अधिकतम कितनी भी रकम जमा कर सकते हैं. खाता खोलने के समय नॉमिनेशन की भी सुविधा है. खाता खोलने की तारीख से 3 साल के बाद प्री-मैच्योर क्लोजर की सुविधा रहेगी. ब्याज दरों में तिमाही आधार पर बदलाव होता है.

2. सॉवरेन गोल्ड बांड

वित्त वर्ष 2021 के लिए सॉवरेन गोल्ड बांड की तीसरी सीरीज 8 जून से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुकी है. यह सब्सक्रिप्शन के लिए 12 जून तक खुली रहेगी. केंद्रीय बैंक ने एलान किया था कि सरकार सॉवरेन गोल्ड बांड को 20 अप्रैल से सितंबर तक छह हिस्सों में जारी करेगी. सॉवरेन गोल्ड बांड को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत सरकार की ओर से जारी करेगा. सॉवरेन गोल्ड बांड के लिए 1 ग्राम सोने का भाव 4,677 रुपये तय किया गया है. यानी हर 10 ग्राम का भाव 46770 रुपये होगा. वहीं अगर आनलाइन खरीदते हें तो इस पर 500 रुपये प्रति 10 ग्राम की छूट मिलेगी. इस लिहाज से आपके लिए 10 ग्राम सोने की कीमत 45270 रुपये होगी.

गोल्ड बॉन्ड को ऑनलाइन खरीद सकते हैं. इसके अलावा इसकी बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), चुनिंदा डाकघरों और एनएसई व बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी होगी.

3. PPF

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) लंबी अवधि के लिए एक बेहतर निवेश विकल्प है. PPF में निवेश न केवल सुरक्षित है, बल्कि इसमें टैक्स छूट का पूरा लाभ मिलता है. निवेशकों के लिए इसमें जोखिम नगण्य होता है. चूंकि, PPF में निवेश को पूरी तरह सरकार का संरक्षण है, इसलिए यह पूरी तरह जोखिम मुक्त है. सेल्फ इम्प्लायड प्रोफेशनल और EPFO के दायरे में नहीं आने वाले कर्मचारियों के लिए पीपीएफ निवेश का एक सबसे उपयुक्त विकल्प है. इसके अलावा, जिन लोगों के पास नौकरी या कारोबार कोई संगठित ढांचा नहीं है, वह लंबी अवधि के निवेश के लिए पीपीएफ को चुन सकते हैं.

PPF में निवेश पर फिलहाल 7.9 फीसदी का सालाना कम्पाउंडिंग ब्याज मिल रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह लंबी अवधि का निवेश है. पीपीएफ में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ​सालाना निवेश किया जा सकता है. पीपएफ खाते में जमा राशि का इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C में डिडक्शन क्लेम की जा सकती है. इस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री है. पीपीएफ जमा राशि पर वेल्थ टेक्स भी नहीं देना होता है.

कुछ नियमों और शर्तों के अधीन, एक व्यक्ति PPF जमा पर कर्ज ले सकता है. 3 साल के 6 साल के बीच कर्ज लिया जा सकता है. दूसरे साल के अंत में बचे बैलेंस का अधिकतम 25 फीसदी कर्ज के तौर पर दिया जा सकता है, जिसे 24 महीने के भीतर चुकाना होगा. निष्क्रिय खाते या बंद किए गए खाते पर कर्ज नहीं लिया जा सकता है.

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4. डेट फंड

डेट फंड मुख्य तौर पर बॉन्ड्स और कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं. डेट म्यूचुअल फंड के साथ यह जरूरी है कि कम से कम 65 फीसदी रकम बांड या बैंक डिपॉजिट में निवेश किया जाए. डेट म्यूचुअल फंड के तहत गवर्नमेंट बांड, कंपनी बांड, कॉरपोरेट एफडी में निवेश किया जाता है. 65 फीसदी के अलावा बचे हुए पैसे को इक्विटी में निवेश किया जाता है. डेट फंड्स का पैसा फिक्स्ड रिटर्न देने वाले बांड में लगाया जाता है. इसलिए इनमें नुकसान का खतरा कम रहता है. डेट फंड में औसतन सालाना रिटर्न 6 से 7 फीसदी तक मिल सकता है.

डेट फंड को 3 साल बाद भुनाने पर लांग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (LTCG) लगता है. वहीं, 3 साल पहले निकालने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (STCG) लगता है.

डेट फंड्स में इंटरेस्ट रेट बांड प्राइस पर निर्भर करता है. अगर इंटरेस्ट रेट घटेगा तो बांड के प्राइस बढ़ते हैं. वहीं इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर बांड प्राइस घटते हैं. इंटरेस्ट रेट का घटना-बढ़ना घरेलू और ग्लोबल फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है.

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