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घर की चुका रहे हैं EMI या दे रहे हैं रेंट! जानें टैक्स बचाने में कौन कितना फायदेमंद

आयकर कानून कई तरह के प्रावधानों के तहत करदाताओं को कर कटौती यानी टैक्स डिडक्शन का फायदा उपलब्ध कराता है.

January 24, 2020 11:28 AM

Income Tax Saving: Home loan Emi or Rent, how can the taxpayers get tax benefit?

आयकर कानून कई तरह के प्रावधानों के तहत करदाताओं को कर कटौती यानी टैक्स डिडक्शन का फायदा उपलब्ध कराता है. करदाता अलग-अलग निवेश विकल्पों के जरिए टैक्स की राशि कम कर सकते हैं. निवेश विकल्पों के इतर होम लोन पर दी जाने वाली EMI और मकान मालिक को दिए जाने वाला किराया भी एक जरिया है, जिससे टैक्स का बोझ कम किया जा सकता है. होम लोन लेने पर मंथली EMI पर और रेंटेड घर में रहने पर जो किराए पर रहने वाले चुकाए जाने वाले किराए पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे…

1. होम लोन पर टैक्स बेनिफिट

होम लोन या तो घर खरीदने के लिए या फिर इसके कंस्ट्रक्शन के लिए लिया जाता है. अगर कोई व्यक्ति घर की खरीद के लिए होम लोन लेता है तो उसे चुकाई जाने वाली ईएमआई में निहित प्रिंसिपल अमाउंट और ब्याज दोनों पर टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है. यह फायदा सालाना आधार पर लोन चुकता होने तक लिया जा सकता है.

प्रिंसिपल अमाउंट के मामले में: प्रिंसिपल अमाउंट पर टैक्स डिडक्शन का प्रावधान आयकर कानून 1961 के सेक्शन 80सी के तहत है. मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये सालाना तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि जिस घर के लिए होम लोन लिया गया है और यह डिडक्शन क्लेम किया जा रहा है, उसे खरीदे जाने के 5 साल तक बेचा नहीं जा सकता. अगर मालिक ऐसा करता है तो घर की बिक्री वाले साल में सभी पुराने डिडक्शन उसकी आय में जोड़ दिए जाएंगे.

लोन के ब्याज के मामले में: होम लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर टैक्स डिडक्शन का फायदा आयकर कानून 1961 के सेक्शन 24 के तहत आवासीय संपत्ति से हेड ऑफ इनकम के अंतर्गत लिया जा सकता है. आकलन वर्ष 2018—19 से सेल्फ ऑक्युपाइड आवासीय संपत्ति पर चुकाए जाने वाले होम लोन ब्याज पर मैक्सिमम 2 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है. हालांकि लेट आउट प्रॉपर्टी के मामले में ब्याज डिडक्शन क्लेम करने के लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है.

अगर कंस्ट्रक्शन के लिए लिया है लोन

अगर लोन घर के कंस्ट्रक्शन के लिए लिया गया है तो ईएमआई तो तुरंत शुरू हो जाती है लेकिन घर का कंस्ट्रक्शन पूरा होने में वक्त लगता है. कंस्ट्रक्शन के लिए लोन के मामले में घर का कंस्ट्रक्शन लोन लिए जाने वाले साल के आखिर से अगले 5 साल में पूरा हो जाना चाहिए. करदाता घर का कंस्ट्रक्शन पूरा होने के बाद ही होम लोन के ब्याज पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है. लेकिन आयकर कानून कंस्ट्रक्शन के दौरान चुकाए गए ब्याज यानी प्री-कंस्ट्रक्शन पीरियड इंट्रेस्ट पर भी क्लेम प्राप्त करने की सुविधा देता है.

अगर आपने घर के कंस्ट्रक्शन के लिए होम लोन लिया है तो ब्याज पर टैक्स डिडक्शन का क्लेम उस साल से किया जा सकेगा, जिसमें कंस्ट्रक्शन पूरा हुआ है. कंस्ट्रक्शन की अवधि के दौरान डिडक्शन का फायदा नहीं लिया जा सकता. हालांकि प्री-कंस्ट्रक्शन पीरियड के दौरान चुकाए गए होम लोन इंट्रेस्ट पर डिडक्शन का क्लेम घर का कंस्ट्रक्शन पूरा होने वाले साल से 5 समान इंस्टॉलमेंट में किया जा सकता है. यह क्लेम कंस्ट्रक्शन पूरा होने के बाद किए जाने वाले टैक्स डिडक्शन क्लेम से इतर होगा. यानी आप घर के बनने के बाद, आगे के सालों में चुकाए जाने वाले होम लोन इंट्रेस्ट के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन अवधि के दौरान चुकाए गए होम लोन इंट्रेस्ट पर भी डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं लेकिन घर पूरा बन जाने के बाद. लेकिन लिमिट कुल मिलाकर 2 लाख रुपये सालाना ही रहेगी.

नया सेक्शन 80EEA

हालांकि बजट 2019 के बाद होम लोन के ब्याज पर 3.5 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन लिया जा सकता है. सरकार ने बजट 2019 में होम लोन पर सेक्शन 24 के तहत 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन के अलावा 1.5 लाख रुपये तक के अतिरिक्त डिडक्शन का भी प्रावधान किया है. यह अतिरिक्त डिडक्शन सेक्शन 80EEA के अंतर्गत आता है. लेकिन इस अतिरिक्त डिडक्शन का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें हैं, जो इस तरह हैं…

  • केवल व्यक्तिगत करदाता इसका फायदा ले सकते हैं.
  • घर खरीदने के उद्देश्य से होम लोन किसी वित्तीय संस्थान या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक लिया गया होना चाहिए.
  • लोन दिए जाने वाली तारीख तक करदाता के नाम पर कोई आवासीय संपत्ति नहीं होनी चाहिए.
  • खरीदे जाने वाले घर की स्टैंप ड्यूटी वैल्यू 45 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
  • आवासीय संपत्ति का कारपेट एरिया दिल्ली NCR समेत अन्य मेट्रो शहरों में 645 वर्ग फुट और अन्य शहरों में 968 वर्ग फुट से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

होम लोन के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक के अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का यह फायदा वित्त वर्ष 2019-20 (AY 2020-21) से लोन चुकाए जाने तक लिया जा सकता है. होम लोन के ब्याज भुगतान पर 3.5 लाख रुपये तक के कुल टैक्स डिडक्शन का लाभ इस उदाहरण से समझ सकते हैं…

मान लीजिए आपने 2 अप्रैल 2019 को घर के लिए होम लोन लिया. 2 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक 3.10 लाख रुपये का ब्याज चुकाया. ऐसे में आप सेक्शन 24 के तहत आवासीय संपत्ति आय से 2 लाख रुपये और नए सेक्शन 80EEA के अंतर्गत कुल आय से बाकी के 1.10 लाख रुपये का टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं.

एक लिमिटेड फायदा सेक्शन 80EE के तहत

अगर किसी ने 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच होम लोन लिया है तो वह इसके ब्याज पर सेक्शन 80EE के अंतर्गत कुल आय से 50000 रुपये तक का अतिरिक्त डिडक्शन लोन चुकाए जाने तक हर साल क्लेम कर सकता है. यह सेक्शन 24 के 2 लाख रुपये तक के टैक्स डिडक्शन के अलावा है. इस अतिरिक्त डिडक्शन के लिए कुछ शर्तें हैं..

  • लोन पास होने की तारीख तक व्यक्ति के नाम पर कोई आवासीय संपत्ति न हो.
  • लोन 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच लिया गया हो.
  • खरीदे गए घर की कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा न हो.
  • होम लोन 35 लाख रुपये से ज्यादा का न हो.

सेक्शन 80EE और 80EEA के तहत डिडक्शन एक साथ नहीं लिया जा सकता है. जो टैक्सपेयर्स 80EE के तहत डिडक्शन क्लेम कर रहे हैं, वो 80EEA के तहत क्लेम नहीं कर सकते हैं.

2. अगर रह रहे हों किराए पर

आयकर कानून के सेक्शन 80GG के तहत उन लोगों को घर के किराए पर टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है, जिन्हें अपने एंप्लॉयर की ओर से सैलरी के साथ HRA (House Rent Allowance) नहीं मिलता है. यह टैक्स बेनिफिट लेने के लिए करदाता को सैलरीड या सेल्फ इंप्लॉयड होना चाहिए. करदाता या उसकी पत्नी या नाबालिग बच्चे या HUF, जिसका करदाता सदस्य है, के पास कोई आवासीय संपत्ति नहीं होनी चाहिए. न ही उनके काम करने की जगह पर उनके लिए कोई आवासीय व्यवस्था जैसे क्वार्टर आदि होने चाहिए. ​सेक्शन 80GG के अंतर्गत ​टैक्स डिडक्शन क्लेम करने के लिए करदाता को किराए के भुगतान की डिटेल्स के साथ फॉर्म 10BA भरकर जमा करना होगा.

सेक्शन 80GG के तहत घर के किराए पर टैक्स डिडक्शन के लिए कुछ मानक हैं, इनमें से जो सबसे कम होगा उसी के आधार पर डिडक्शन तय होगा. ये मानक इस तरह हैं..

  • प्रतिमाह 5000 रुपये
  • एडजस्टेड इनकम का 25 फीसदी (सेक्शन 111A के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स; सेक्शन 115A या 115D के अंतर्गत आय और सेक्शन 80C से लेकर 80U तक के तहत डिडक्शन के बिना. साथ ही सेक्शन 80GG के अंतर्गत डिडक्शन से पहले की आय).
  • आय का 10 फीसदी माइनस वास्तविक किराया

 

(By : CA Yogesh Agrawal)

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