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आज से बदल गए टैक्स से जुड़े ये 7 नियम, आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

1 income tax rule change from april 1 : इनकम टैक्स से जुड़े नए नियम 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे.

April 1, 2019 7:57 AM
income tax rule change from april 1 with new financial yearबजट में की गई टैक्स से जुड़ी घोषणाएं 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगी

Income tax rule change from april 1 : आज यानी 1 अप्रैल से नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो गया. नए साल से कई तरह के बदलाव हो रहे हैं. इनमें आपके पर्सनल फाइनेंस से जुड़े भी कई नियम हैं जो 1 अप्रैल से बदल गए. यह बदलाव आपके निवेश और बचत पर भी असरदायक होंगे. ऐसे में इन बदलावों के बारे में आपका जानना जरूरी है, नहीं तो इसका फायदा लेने में चूक हो सकती है या आपका नुकसान हो सकता है. जानिए 7 ऐसे टैक्स के नियम जो 1 अप्रैल 2019 से लागू हो गए.

स्टैंडर्ड डिडक्शन – 50,000 रुपये

1 अप्रैल से इनकम टैक्स में मिलने वाला स्टैंडर्ड डिडक्शन 40,000 रुपये से बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगा. इनकम टैक्स कैलकुलेट करते वक्त कमाई गई रकम में से स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम को घटा दिया जाता है. इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आपके असल खर्चे कितने रुपये है. वित्त वर्ष 2020-21 का इनकम टैक्स कैलकुलेट करते वक्त टोटल कमाई में से 50,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन के नाम से घटा सकते हैं.

Income tax rule : 5 लाख तक की आय टैक्स फ्री

बजट 2019 में की गई घोषणा के मुताबिक 5 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स नहीं भरना होगा. हालांकि 5 लाख तक की आय वालों को पहले की तरह ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करनी होगी. इनकम टैक्स में मिलने वाली रिबेट को 2,500 से बढ़ाकर 12,500 कर दिया गया है. इसलिए अब वित्त वर्ष 2020-21 में 5 लाख तक की आय कमाने वालों को कोई भी टैक्स नहीं देना होगा. 2,500 रुपये रिबेट होने की वजह से अभी तक सिर्फ 3 लाख तक की रकम पर टैक्स नहीं देना होगा.

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दूसरे घर पर टैक्स का नियम बदला

अभी तक इनकम टैक्स में सिर्फ एक ही घर को सेल्फ-ऑक्यूपाइड माना जाता था. अगर किसी के पास एक से ज्यादा घर हैं तो इनकम टैक्स की नजर में ये मान लिया जाता है मकानमालिक उसपर किराया कमा रहा है और उस एरिया के रेट के हिसाब से मकान मालिक को नोशनल रेंट पर इनकम टैक्स भरना होता था. लेकिन अब एक ही व्यक्ति के नाम पर 2 घर हैं तो उसे दूसरे घर पर किसी तरह का कोई भी टैक्स नहीं देना होगा.

इक्विटी पर LTCG टैक्स

2018 के बजट में एलटीसीजी टैक्स फिर से लगाने की घोषणा की गई थी. नियम के हिसाब से 1 अप्रैल 2018 से अगर आपने इक्विटी शेयर्स या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 1 साल से ज्यादा निवेश किए शेयरों को बेचकर 1 लाख से उपर की कमाई की है तो उस कमाई पर 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा. 1 लाख की ये रकम 1 साल में जितने भी शेयर बेचे हैं उसे मिलाकर कैल्कुलेट की जाएगी. वित्त वर्ष 19-20 में 18-19 के लिए ITR भरते हुए आपको एलटीसीजी टैक्स का भुगतान करना होगा.

TDS की लिमिट 40 हजार

ब्याज से होने वाली आय पर टीडीएस की लिमिट सालाना 10 हजार रुपये से बढ़कर 40 हजार रुपये हो गई है. इससे आम लोगों को बैंक व डाकघरों की स्माल सेविंग्स स्कीम पर फायदा होगा. अभी तक सिर्फ 10 हजार रुपये सालाना तक की ब्याज आय पर कटे टैक्स का रिफंड मांग सकते थे.

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शेयर से जुड़ा काम

अगर आपने शेयर ले रखे हैं और वे अभी भी फिजिकल फॉर्म में हैं, तो उन्हें 1 अप्रैल 2019 से पहले डीमैट में करा लें. अगर इस समयावधि के अंदर ऐसा नहीं किया तो आप उन्हें बेच नहीं पाएंगे.

घर खरीदना हो जाएगा सस्ता

अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट और सस्ते घरों पर जीएसटी रेट को घटाकर 5 फीसदी और 1 फीसदी कर दिया था. इसकी नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी. अभी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी या रेडी-टू-मूव फ्लैट (जहां बिक्री के समय कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता है) के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 12 फीसदी जीएसटी लगता है. सस्ते मकानों पर जीएसटी की दर 8 फीसदी है.

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