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ITR Filing: आईटीआर फाइल करते समय इन 10 बातों का रखें ख्याल, 30 सितंबर तक है आखिरी मौका

ITR Filing: आईटीआर फाइल करने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है ताकि आगे चलकर कोई समस्या न आए.

August 23, 2021 9:32 AM
Income Tax Return filing 10 important things individual taxpayers must know before filing ITRटैक्सपेयर को अपने रेजिडेंशियल स्टेटस और विभिन्न स्रोतों से हुई आय के आधार पर सही आईटीआर फॉर्म चुनना चाहिए ताकि फाइलिंग में कोई गलती न हो.

ITR Filing: कोरोना महामारी के चलते इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने को लेकर कई लोगों को समस्याएं आ रही हैं जिसे देखते हुए इसकी डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है. जिन इंडिविजुअल्स के खातों का इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों के तहत ऑडिट नहीं होना है, उनके लिए वित्त वर्ष 2020-21 (एसेसमेंट इयर 20211-22) का आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन दो महीने आगे खिसका दी गई. पहले इसे 31 जुलाई 2021 तक फाइल कर देना था लेकिन अब इसे 30 सितंबर 2021 तक फाइल कर सकते हैं. वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आईटीआर फॉर्म्स (फॉर्म1, 2 और 4) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) पहले ही अधिसूचित कर चुकी है. आईटीआर फाइल करने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है ताकि आगे चलकर कोई समस्या न आए.

सही आईटीआर फॉर्म चुनें

टैक्सपेयर को अपने रेजिडेंशियल स्टेटस और विभिन्न स्रोतों से हुई आय के आधार पर सही आईटीआर फॉर्म चुनना चाहिए ताकि फाइलिंग में कोई गलती न हो. उदाहरण के लिए जिन टैक्सपेयर्स को सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोत से 50 लाख रुपये तक की आय होती है और रेजिडेंट इंडिविजुअल हैं, उन्हें आईटीआर-1 फॉर्म इस्तेमाल करना होता है जबकि जो टैक्सपेयर नॉन-रेजिडेंट या नॉट ऑर्डिनरी रेजिडेंट हैं या उन्हें कैपिटल गेन्स से आय हुई तो उन्हें आईटीआर-2 फॉर्म इस्तेमाल करना होगा.

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सावधानी से चुनें नया या पुराना टैक्स सिस्टम

फाइनेंस एक्ट, 2020 के तहत टैक्सपेयर्स के लिए नया टैक्स सिस्टम लाया गया. इस नए सिस्टम में एग्जेंप्शंस और डिडक्शंस के बदले में टैक्स स्लैब्स और रेट्स को संशोधित किया गया. टैक्स रिटर्न फाइल करते समय टैक्सपेयर्स को पुराने और नए टैक्स रिजाइम में अपने लिए वह विकल्प चुनना चाहिए जिसमें उन्हें फायदा हो. जिन्हें सैलरी से आय होती है, उन्होंने अपने एंप्लॉयर को जो टैक्स सिस्टम बताया है, उसे आईटीआर फाइल करते समय बदल भी सकते हैं.

प्रीफिल्ड आईटीआर फॉर्म

इस साल आईटीआर फॉर्म में कुछ डेटा पहले से ही भरे रहेंगे जैसे कि टैक्सपेयर की व्यक्तिगत डिटेल्स, सैलरी इनकम, डिविडेंट इनकम, ब्याज से होने वाली आय और कैपिटल गेन्स, ये सभी जानकारियां फॉर्म 26एएस के रूप में टैक्सपेयर्स को उपलब्ध रहेंगी. इससे टैक्सपेयर्स को आईटीआर फाइल करने में आसानी होगी क्योंकि अधिकतर जरूरी डिटेल्स पहले से ही भरी रहेंगी. इंडिविजुअल को फाइलिंग के समय सभी जानकारियों को वेरिफाई कर लेना चाहिए और जो आय नहीं दिखाई गई है, उसे जोड़ सकते हैं. हालांकि अगर कोई जानकारी गलत दिख रही है तो अपने बैंक या एंप्लॉयर से संपर्क करें ताकि फॉर्म 26एएस में सही डिटेल्स दिख सके.

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फॉर्म 26एएस में प्रीपेड टैक्स का वेरिफिकेशन

फॉर्म 26 एएस में टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (टीडीएस), एडवांस टैक्स और सेल्फ एसेसमेंट टैक्स को जरूर चेक कर लेना चाहिए. अगर इसमें कोई भी गलती दिख रही है, उसकी सूचना एंप्लॉयर (सैलरी इनकम के मामले में) या अन्य पेयर्स (अन्य आय के मामले में) या बैंकों (एडवांस टैक्स/सेल्फ एसेसमेंट टैक्स पेमेंट्स के मामले में) को देनी चाहिए. इससे टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग आसान होगी.

बैलेंस टैक्स का भुगतान

कुल टैक्सेबल आय की गणना के बाद टैक्स देनदारी की गणना करनी चाहिए. प्रीपेड टैक्स के क्रेडिट को क्लेम करने के बाद अगर टैक्स रिटर्न पर कोई टैक्स ड्यू है तो उसे टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले इंटेरेस्ट के साथ चुकता कर देना चाहिए.यहां यह ध्यान रहे कि 1 लाख रुपये से अधिक सेल्फ एसेसमेंट टैक्स को चुकाने की अंतिंम तारीख 31 जुलाई 2021 थी यानी कि अब बकाए सेल्फ एसेसमेंट टैक्स को ब्याज के साथ चुकाना होगा और आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2021 है.

कुछ जरूरी जानकारियां को दिखाना

आईटीआर फाइलिंग में कई एसेट्स और वित्तीय निवेश को दिखाना जरूरी होती है. टैक्सपेयर्स को भारतीय बैंक खातों; अनलिस्टेड इक्विटी शेयरों; देशी या विदेशी कंपनियों में डायरेक्टरशिप की डिटेल्स; लैंड, बिल्डिंग या चल संपत्ति इत्यादि जैसे स्पेशिफाइड एसेट्स; बैंक डिपॉजिट्स्, शेयर एंड सिक्योरिटीज व कैश इन हैंड इत्यादि और देनदारी का उल्लेख करना जरूरी है, अगर उनकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक हो जाती है. रेजिडेंट इंडिविजुअल्स को देश के बाहर की सभी संपत्तियों (स्वामित्व या बेनेफिशिएरी के रूप में) का उल्लेख करना भी जरूरी है.

एग्जेम्प्ट आय की जानकारी दिखाना

टैक्सपेयर्स को शेड्यूल ईआई के तहत एग्जेम्प्ट इनकम को बताना जरूरी है. इसमें एग्रीकल्चर इनकम, अवयस्क बच्चे की एग्जेम्प्ट इनकम, डबल टैक्सेशन एवायडेंस एग्रीमेंट के तहत जिस आय पर टैक्स नहीं लगता है, इत्यादि को शामिल किया जाता है.

वर्ष के दौरान रोजगार बदलने की जानकारी

किसी वर्ष किसी टैक्सपेयर ने रोजगार बदला है तो सैलरी, पिछले एंप्लॉयर से हुई आय को वर्तमान एंप्लॉयर को बताना होता है और वर्तमान एंप्लॉयर इसके आधार पर फॉर्म 16 और फॉर्म 12बीए जारी करता है. इन फॉर्म के आधार पर आईटीआर फाइल किया जाता है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो टीडीएस में कमी आएगी और ऐसी परिस्थिति में रिटर्न फाइलिंग से पहले रिटर्न पर ड्यू टैक्स को ब्याज के साथ चुकता करना होता है.

कुछ निश्चित मामलों में अनिवार्य फाइलिंग

फाइनेंस (नंबर 2) एक्ट, 2019 के तहत कुछ विशेष मामलों में उन इंडिविजुअल्स को आईटीआर फाइल करना होता है जिनकी आय टैक्स के दायरे में नहीं होती है. इसके तहत जिन्होंने 1 लाख रुपये से अधिक का इलेक्ट्रिसिटी बिल भरा हो, एक या एक से अधिक चालू बैंक खातों में 1 करोड़ रुपये से अधिक की जमा समेत खुद या अन्य शख्स की विदेशी यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक के खर्च पर आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है.

ड्यू डेट तक आईटीआर नहीं फाइल किया तो?

अगर किसी टैक्सपेयर ने ड्यू डेट तक जरूरी डॉक्यूमेंट्स/जानकारियों के अभाव, समय की कमी इत्यादि के चलते आईटीआर नहीं फाइल कर पाए तो लेट फाइलिंग फी, बैलेंस टैक्स लाइबिलिटी पर इंटेरेस्ट का भुगतान करना होगा. इसके अलावा कुछ लॉसेज को कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर पाएंगे.
(Article: Parizad Sirwalla, Partner and Head, Global Mobility Services – Tax, KPMG in India)

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