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ITR Filing Tips: आयकर रिटर्न फाइल करते समय इन गलतियों से बचें, नहीं तो हो जाएगी मुश्किल

Income Tax Return Filing Tips: आइए जानते हैं कि ऐसी कौन-सी गलतियां हैं जिनसे टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करते समय बचना चाहिए.

Updated: Nov 25, 2020 2:09 PM
income tax return beware of these mistakes while filing your ITR can cause troubleआइए जानते हैं कि ऐसी कौन-सी गलतियां हैं जिनसे टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करते समय बचना चाहिए.

ITR Filing Common Mistakes: असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए आईटीआर (Income Tax Return) को फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है और जिनके अकाउंट्स का ऑडिट नहीं हुआ है, उनके लिए यह 31 जनवरी 2021 है. हालांकि, अपने टैक्स रिटर्न को फाइल करते समय ध्यान देना बेहद जरूरी है. बहुत से लोग आईटीआर को फाइल करने में जल्दबाजी करते हैं और वे कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी उन्हें कीमत चुकानी पड़ती है. आपको इनकम टैक्स विभाग से इस संबंध में नोटिस भी मिल सकता है. आइए जानते हैं कि ऐसी कौन-सी गलतियां हैं जिनसे टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करते समय बचना चाहिए.

गलत ITR फॉर्म का इस्तेमाल करना

हर साल इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए कई टैक्स रिटर्न फॉर्म नोटिफाई करता है. ये फॉर्म उनकी आय, प्रकार और रेजिडेंशियल स्टेटस पर निर्भर करते हैं. हालांकि, आमतौर पर यह देखा गया है कि बहुत से टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न फाइल करते समय गलत आईटीआर फॉर्म को चुन लेते हैं.

उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जिसकी कुल इनकम 50 लाख रुपये से कम है और उसके पास एक घर की प्रॉपर्टी है, कैपिटल गैन्स से कोई आय नहीं है, वह आईटीआर 1 का इस्तेमाल कर सकता है, जो अब ज्यादा सरल फॉर्म बन गया है. हालांकि, ज्यादातर लोग गलती से ITR 2 को फाइल करते हैं जो जटिल है और जिसमें ज्यादा डिटेल्स की जरूरत होती है.

अगर कोई व्यक्ति गलत आईटीआर फॉर्म को चनता है, तो आईटीआर में पूरी जानकारी नहीं होने की आशंका रहती है और टैक्स विभाग इनकम को कम बताने के लिए नोटिस जारी कर सकता है.

गलत असेसमेंट ईयर के लिए टैक्स का भुगतान करना

दूसरी सामान्य गलती जो ज्यादातर लोग करते हैं, वह है गलत असेसमेंट ईयर के लिए टैक्स का भुगतान करना. इससे वर्तमान साल के लिए टैक्स का भुगतान करना बना रहता है जबकि दूसरे साल के लिए ज्यादा टैक्स का भुगतान हो जाता है. इसलिए व्यक्ति को टैक्स का भुगतान करते समय सही साल को चुनने में ध्यान देना चाहिए.

निवेश से आई आय को नहीं बताना

टैक्सपेयर को अपने सभी निवेशों से इनकम का विवरण देना चाहिए. इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज आय, म्यूचुअल फंड की खरीद से आए कैपिटल गेन्स शामिल हैं. लोग सामान्य तौर पर सेविंग्स बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट आदि से कमाई ब्याज को बताना भूल जाते हैं. व्यक्ति को इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड की सेल से आने वाले LTCG की भी जानकारी और टैक्स का भुगतान करना होता है. इसी तरह फिक्स्ड और रिकरिंग डिपॉजिट पर ब्याज भी पूरी तरह टैक्सेबल होता है.

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डोनेशन, टैक्स सेविंग माध्यमों का बेनेफिट क्लेम नहीं करना

बहुत से लोग यह गलती भी सामान्य तौर पर करते हैं. साल के दौरान, कई टैक्सपेयर्स ऐसे बहुत से निवेश या डोनेशन करते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना वे भूल जाते हैं. इसका आकलन करने का एक आसान तरीका होगा कि आप अपनी बैंक स्टेटमेंट को विस्तृत तौर पर विश्लेषण करें जहां ये रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे.

छूट वाली आय का विवरण नहीं देना

इनकम टैक्स नियमों के तहत टैक्सपेयर के लिए अपनी सभी इनकम का विवरण देना जरूरी होता है, चाहे वह छूट वाली हो या नहीं. एक टैक्सपेयर के लिए उसका आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है, अगर उसकी कुल आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है या अगर कुल आय 2.5 लाख रुपये से कम है, भी तो वह कानून के तहत बताई गई कुछ शर्तों को पूरा करता है.

इनकम टैक्स कानून के तहत, ऐसे कई मामले हैं, जहां टैक्सपेयर को अपने नाबालिग बच्चे या जीवनसाथी की आय को अपनी आय के साथ मिलाने और उसके मुताबिक टैक्स का भुगतान करने की जरूरत होती है.

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