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टैक्स प्लानिंग से अलग है इन्वेस्टमेंट प्लानिंग, दोनों में जानें अंतर नहीं तो होगा नुकसान

टैक्स प्लानिंग और इन्वेस्टमेंट प्लानिंग एक चीज नहीं हैं. लोग अक्सर इन्हें लेकर कन्फ्यूज होते हैं.

June 27, 2019 11:19 AM
Income Tax Planning: Why you should not confuse tax planning with investment planningImage: Reuters

टैक्स प्लानिंग और इन्वेस्टमेंट प्लानिंग एक चीज नहीं हैं. लोग अक्सर इन्हें लेकर कन्फ्यूज होते हैं. कई लोग टैक्स बचाने के लिए अक्सर कम रिटर्न वाले टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगा देते हैं, बिना यह आकलन किए कि इसका उनके शॉर्ट व लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों पर क्या असर पड़ेगा. अगर आप केवल टैक्स बचाने के लिए पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं और इन्वेस्टमेंट की क्वालिटी को नजरअंदाज कर रहे हैं तो आपके लिए वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स वित्तीय प्लान के साथ तालमेल बैठाने वाले हों. केवल टैक्स बचाने लिए इन्हें नहीं किया जाना चाहिए.

टैक्स प्लानिंग व इन्वेस्टमेंट प्लानिंग के बीच के अंतर को कुछ इस तरह समझा जा सकता है….

टैक्स प्लानिंग

टैक्स देनदारी का आकलन कर टैक्स घटाने के लिए की जाने वाली प्लानिंग टैक्स प्लानिंग कहलाती है. टैक्स कम करने के लिए कई कानूनी रास्ते अपनाए हैं, जैसे- डिडक्शन यानी टैक्स कटौती, एग्जेंप्शन छूट, अलाउंस, रिबेट आदि. टैक्स प्लानिंग के तहत आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C, 80D, 80CCD, 80E, 80G, Sec 24 आदि के तहत मिलने वाले फायदे इस्तेमाल कर सकते हैं.

इन्वेस्टमेंट प्लानिंग

शॉट व लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में वित्तीय संसाधनों का उचित तरीके से इस्तेमाल करने की प्रॉसेस इन्वेस्टमेंट प्लानिंग कहलाती है. इन्वेस्टमेंट प्लानिंग का फोकस सही इंस्ट्रूमेंट चुनने पर होता है, जो आपको वित्तीय लक्ष्यों के करीब ले जा सके. साथ ही जिसमें जोखिमों, अपेक्षित रिटर्न और टाइम फ्रेम का भी ध्यान रखा जाए.

उदाहरण के तौर पर आपको शॉर्ट टर्म लक्ष्य जैसे 11 माह बाद इंटरनेशनल टूर पर जाना और लॉन्ग टर्म लक्ष्य जैसे एक उचित रिटायरमेंट फंड जमा करना, दोनों के लिए अलग-अलग इन्वेस्टमेंट्स करने की जरूरत हो सकती है. समान इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स आपको अपेक्षित रिजल्ट नहीं दे सकते.

इसके अलावा अगर आप सही इंस्ट्रूमेंट में इन्वेस्ट करते हैं तो इन्वेस्टमेंट प्लानिंग आपकी टैक्स इफीशिएंसी यानी टैक्स में बचत हो जाने का भी ध्यान रखती है.

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टैक्स प्लानिंग व इन्वेस्टमेंट प्लानिंग को लेकर कैसे होता है कन्फ्यूजन

कई टैक्सपेयर्स ऐसे हैं, जिन्हें जब ये महसूस होता है कि पूरे वित्त वर्ष में वे सेक्शन 80C के तहत मिलने वाले टैक्स बेनिफिट्स का पूरा फायदा नहीं ले सके हैं तो वे इनकम टैक्स भरने की डेडलाइन से कुछ दिन पहले ही इन्वेस्टमेंट करते हैं. ऐसे में उनकी पहली च्वॉइस टैक्स सेविंग इंश्योरेंस प्रॉडक्ट होते हैं. हालांकि वे इस बात पर विचार नहीं करते हैं कि ऐसे इन्वेस्टमेंट लिक्विड नहीं भी हो सकते हैं, रिटर्न कम हो सकता है और ऐसे में उन्हें आगे चलकर हर साल और इन्वेस्टमेंट करने की जरूरत होगी.

इस तरह का इन्वेस्टमेंट टैक्स देनदारी घटाकर टैक्स प्लानिंग की जरूरत को तो पूरा कर देगा लेकिन यह वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित नहीं हो सकता. अक्सर ऐसे टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स की रिटर्न रेट निगेटिव भी होती है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि आपको इंश्योरेंस प्रॉडक्ट नहीं लेने चाहिए. असल में आपको किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होने की स्थिति में वित्तीय हितों को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त इंश्योरेंस लेना चाहिए. लेकिन इन्वेस्ट समझदारी से करने की जरूरत है ताकि आपकी संपत्ति बढ़े और वित्तीय लक्ष्य वक्त से पूरे हों. कम रिटर्न वाले केवल टैक्स सेविंग ऑप्शन चुनना वित्तीय लक्ष्यों के लिहाज से उम्दा स्ट्रैटेजी नहीं है.

तो क्या है सही तरीका?

सही तरीका यह है कि सबसे पहले अपने शॉर्ट टर्म व लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों की स्पष्ट तौर पर पहचान करें. इसके बाद इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इन्वेस्ट करने को लेकर आप मैक्सिमम कितनी बचत कर सकते हैं इसका आकलन करें. अब जोखिम, लक्ष्य पूरा करने के लिए बचा समय, रिटर्न जरूरत और लिक्विडिटी जरूरतों इन सभी को ध्यान में रखते हुए पैसा इन्वेस्ट करने के लिए उचित एसेट चुनें. एसेट चुनते वक्त इन्वेस्टमेंट बेनिफिट्स बढ़ाने के लिए टैक्स सेविंग को सेकंडरी क्राइटेरिया के तौर पर रखें. टैक्स प्लानिंग बेहद जरूरी है लेकिन इसे वित्तीय लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए करना चाहिए.

(यह आर्टिकल Bankbazaar.com के CEO आदिल शेट्टी का है)

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