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Income Tax: नये टैक्स सिस्टम का लेना है फायदा, तो छोड़नी होंगी ये 10 बड़ी छूट

आइए जानते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने से कौन-सी बड़ी टैक्स छूट को आपको छोड़ना पड़ेगा.

February 6, 2020 3:20 PM
income tax on choosing new tax regime person cannot avail these deductions in old tax regimeआइए जानते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने से कौन-सी बड़ी टैक्स छूट को आपको छोड़ना पड़ेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में आयकरदाता को इनकम टैक्स के मोर्चे पर राहत दी. बजट में नई टैक्स व्यवस्था का एलान किया गया. नई टैक्स व्यवस्था में 5 से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स रेट को घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है. 7.5 लाख से 10 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वालों के लिए आयकर की दर को 15 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा 10-12.5 लाख रुपये तक की आय वालों पर अब 20 फीसदी और 12.5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की आय वालों पर 25 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. 15 लाख से ज्यादा की आय पर टैक्स रेट 30 फीसदी रहेगी.

आयकर कानून के चैप्टर VI-A में शामिल डिडक्शन नहीं मिलेंगे

लेकिन इस नए टैक्स स्लैब के साथ सरकार ने एक शर्त भी रखी है. शर्त यह है कि नया टैक्स स्ट्रक्चर आयकरदाताओं के लिए वैकल्पिक होगा. इस नए टैक्स स्लैब के साथ सरकार ने एक शर्त भी रखी है. इस नई व्यवस्था के साथ पुरानी टैक्स व्यवस्था भी जारी रहेगी. टैक्सपेयर्स के पास नई व्यवस्था और पुरानी व्यवस्था में से चुनने का विकल्प मौजूद रहेगा. नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वाले आयकरदाता आयकर कानून के चैप्टर VI-A के तहत मिलने वाले टैक्स डिडक्शन और एग्जेंप्शन का फायदा नहीं ले पाएंगे. यानी नए टैक्स स्ट्रक्चर को चुनने वाले स्टैंडर्ड डिडक्शन, होम लोन, एलआईसी, हेल्थ इंश्योरेंस आदि निवेश विकल्पों में निवेश नहीं कर सकेंगे. आइए जानते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने से कौन-सी बड़ी टैक्स छूट को आपको छोड़ना पड़ेगा.

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ये हैं 10 मुख्य छूट

  • लीव ट्रैवल अलाउंस की छूट जो सैलरी प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए चार साल की अवधि में दो बार उपलब्ध होता है. नई टैक्स व्यवस्था में यह छूट नहीं मिलेगी.
  • हाउस रेंट अलाउंस सामान्य तौर पर सैलरी प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को उनकी सैलरी के भाग के तौर पर मिलता है. अगर व्यक्ति किराये के घर में रह रहा है, तो वह कुछ तय की गई सीमाओं तक टैक्स छूट के लिए क्लेम कर सकता है.
  • सैलरी प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलेगा.
  • नई टैक्स व्यवस्था के अंदर सेक्शन 80TTA/80TTB के तहत मिलने वाला डिडक्शन नहीं उपलब्ध होगा. सेक्शन 80TTA के अंदर सेविंग्स डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज से संबंधित डिडक्शन और 80TTB के तहत सीनीयर सिटीजन के डिपॉजिट पर ब्याज के लिए डिडक्शम मिलता है.
  • सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला एंटरटेनमेंट अलाउंस और सेक्शन 16 के तहत एंप्लोयमेंट / प्रोफेशनल टैक्स के तहत डिडक्शन नहीं मिलेगा.
  • खुद के घर या खाली प्रॉपर्टी के लिए लिए गए होम लोन की ब्याज पर टैक्स बेनेफिट मिलता है. यह सेक्शन 24 के अंदर आता है.
  • सेक्शन 57 के अंदर फैमिली पेंशन पर मिलने वाले 15000 रुपये तक के डिडक्शन को मंजूरी दी गई है.
  • सेक्शन 80C के तहत मिलने वाले सामान्य डिडक्शन भी नई व्यवस्था में नहीं मिलेंगे. इसमें सेक्शन 80C के तहत प्रोविंडेंट फंड के योगदान, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, बच्चों के लिए स्कूल की ट्यूशन फीस और ELSS, NPS, PPF में किए गए निवेश पर डिडक्शन का क्लेम कर सकते हैं. हालांकि, सेक्शन 80CCD के सब-सेक्शन (2) के अंदर डिडक्शन को नई व्यवस्था में भी क्लेम किया जा सकता है.
  • सेक्शन 80D के तहत आप मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन का भी क्लेम नहीं कर सकेंगे.
  • सेक्शन 80E के तहत एजुकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स डिडेक्शन नहीं मिलेगा.

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