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TDS फॉर्म में हुआ बदलाव, अब बैंकों को 1 करोड़ से अधिक की नकद निकासी पर काटे गए टैक्स की देनी होगी रिपोर्ट

विभाग ने इसे अधिक कॉम्प्रिहैनन्सिव बनाते हुए डिडक्टर्स के लिए टैक्स के नॉन डिडक्शन के कारण बताना अनिवार्य कर दिया है.

Updated: Jul 05, 2020 5:44 PM
income tax department amends TDS form, now banks will have to report Tax Deducted at Source for cash withdrawals above Rs 1 croreImage: Reuters

आयकर विभाग (I-T Department) ने टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) फॉर्म में संशोधन किया है. विभाग ने इसे अधिक कॉम्प्रिहैनन्सिव बनाते हुए डिडक्टर्स के लिए टैक्स के नॉन डिडक्शन के कारण बताना अनिवार्य कर दिया है. संशोधित फॉर्म के मुताबिक अब बैंकों को 1 करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी के लिए TDS की रिपोर्ट देनी होगी.

एक नोटिफिकेशन के जरिए केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर नियमों में संशोधन किया है ताकि ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स, म्यूचुअल फंड्स व बिजनेस ट्रस्ट्स द्वारा दिया गया डिविडेंड, कैश विदड्रॉअल्स, प्रोफेशनल फीस व ब्याज पर TDS शामिल किया जा सके.

फॉर्म 26Q और 27Q के फॉर्मेट में हुआ बदलाव

नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर शैलेश कुमार का कहना है कि सरकार ने इस अधिसूचना के साथ फॉर्म 26Q और 27Q के प्रारूप को संशोधित किया है. इन दोनों फॉर्म्स के माध्यम से विभिन्न रेजिडेंट्स व नॉन रेजिडेंट्स पेमेंट्स पर काटे गए व जमा किए गए TDS अमाउंट की डिटेल्स दी जाती हैं.

फॉर्म 26Q का उपयोग भारत में सरकार या कंपनियों द्वारा कर्मचारियों (भारतीय नागरिक) को वेतन के अलावा किए गए किसी भी अन्य भुगतान पर TDS कटौती की तिमाही आधार पर जानकारी देने में होता है. इसी तरह फॉर्म 27Q का उपयोग अनिवासी भारतीयों को वेतन के अलावा किसी अन्य भुगतान पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से TDS कटौती की तिमाही आधार पर जानकारी देने में होता है. सरकारी डिडक्टर्स के अलावा अन्य सभी डिडक्टर्स के लिए फॉर्म में उनका PAN उल्लिखित करना अनिवार्य है.

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जिन मामलों में TDS नहीं कटा, उनकी भी देनी होगी सूचना

कुमार का कहना है कि नए फॉर्म अधिक व्यापक हैं और भुगतान करने वालों को न केवल उन मामलों की सूचना देने की आवश्यकता होगी, जिनमें TDS काटा जाता है, बल्कि जिन मामलों में TDS नहीं काटा गया है, अब उनकी भी सूचना देनी होगी. TDS के लोअर रेट पर डिडक्शन या TDS के नॉन डिडक्शन से जुड़ी विभि​न्न परिस्थितियों को कवर करने के लिए अलग—अलग कोड उपलब्ध कराए गए हैं. इसके अलावा संशेाधित फॉर्म्स में आयकर कानून में टीडीएस के कुछ नए जोड़े गए सेक्शन ​से जुड़ी रिपोर्ट भी देनी होगी, जैसे कैश विदड्रॉअल के लिए सेक्शन 194N, विभिन्न हालात में टीडीएस न काटने के लिए अनुम​ति देने वाला सेक्शन 197A आदि.

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