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Taxation on FD: एफडी से मिले ब्याज पर किस हिसाब से लगता है टैक्स? इन तीन तरीकों से कम हो सकता है बोझ

Taxation on FD: एफडी में निवेश से पहले टैक्स से जुड़े सभी प्रावधानों का समझ लें ताकि अपने वास्तविक रिटर्न को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके.

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एफडी से मिलने वाले ब्याज को कमाई में जोड़ा जाता है और फिर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स की गणना की जाती है.

Taxation on FD: फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) लंबे समय से निश्चित रिटर्न और सुरक्षित निवेश विकल्प के चलते पसंदीदा विकल्प बना रहा है. इस पर बाजार के उतार-चढ़ाव का फर्क नहीं पड़ता है. हालांकि एफडी (FD) से जो ब्याज की कमाई होती है, उस पर टैक्स चुकाना होता है जिससे वास्तविक रिटर्न कम हो जाता है. ऐसे में एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट्स) में निवेश से पहले टैक्स से जुड़े सभी प्रावधानों का समझ लें ताकि अपने वास्तविक रिटर्न को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके.

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FD से जुड़े टैक्स के प्रावधान

  • एफडी से मिलने वाले ब्याज को कमाई में जोड़ा जाता है और फिर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स की गणना की जाती है. इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में इसे ‘अन्य स्रोतों से आय’ हेड में दिखाया जाता है.
  • एफडी निवेश पर अगर 40 हजार रुपये से अधिक का ब्याज मिल रहा है तो बैंक इसे खाते में जमा करते समय टैक्स काट लेता है यानी टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स). वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा 50 हजार रुपये है.
  • एफडी से होने वाली कमाई को आईटीआर में हर साल अपनी आय में दिखाना होता है. इसका मतलब हुआ कि अगर आपने पांच साल की एफडी ली हुई है तो भले ही आपको आपका पैसा और ब्याज पांच साल बाद यानी एफडी के मेच्योर होने पर मिलेगा लेकिन ब्याज के पैसे को हर साल आईटीआर में दिखाना होगा. इसका फायदा यह होता है कि अगर पांच साल के बाद ब्याज की पूरी रकम दिखाएंगे तो अधिक स्लैब में आ जाएंगे.
  • अगर बैंक टीडीएस नहीं काटता है जैसे कि ब्याज की राशि 40 हजार रुपये से कम है (वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 50 हजार रुपये से कम) तो भी इसे आईटीआर में दिखाएं. इसे कुल आय में जोड़ा जाता है और फिर उसी के हिसाब से टैक्स की गणना होती है.

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इन तीन तरीकों से बचाएं एफडी रिटर्न पर टैक्स

  • अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है तो फॉर्म 15जी/15एच फाइल कर सकते हैं. बैंक में फॉर्म 15जी/फॉर्म 15एच फाइल करने के बाद बैंक टीडीएस नहीं काटता है.
  • बैंक के अलावा पोस्ट ऑफिस में भी एफडी खाता खुलवाया जा सकता है. यहां एफडी पर बैंकों से कम टीडीएस कटता है. डाकघरों में एफडी की ब्याज दर कम है लेकिन टैक्स की बचत होती है.
  • अगर आपके पास पूंजी अधिक है तो इसे अपने नाम पर जमा करने की बजाय कई हिस्सों में बांटकर अपने, जीवनसाथी, माता-पिता और बच्चों के नाम एफडी खाता खुलवाएं. इससे ब्याज की रकम बंट जाएगी और इससे होने वाली कमाई पर टैक्स की गणना हर शख्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से होगी.

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