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Home Loan: रुपये-पैसे की दिक्कत है तो भी आसानी से मैनेज कर सकेंगे EMI, करें ये जरूरी उपाय

नौकरीपेशा लोगों के लिए होम लोन लेना एक आम जरूरत हो गई है.

February 22, 2020 1:38 PM
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How to Manage Your Home Loan EMI: नौकरीपेशा लोगों के लिए होम लोन लेना एक आम जरूरत हो गई है. हर तरह के लोन में सबसे कॉमन होमलोन है जो सबसे महत्वपूर्ण भी है. इसके पीछे कई कारण हैं. मसलन होमलोन का टिकट साइज पर्सनल लोन या कार लोन से बड़ा होता है यानी इसका अमाउंट दूसरे लोन की तुलना में ज्यादा होता है.

# बड़ा टिकट साइज: पर्सनल लोन एक नौकरीपेशा की सैलरी का 10 गुना तक ज्यादा हो सकता है, लेकिन होमलोन नेट मंथली इनकम की तुलना में 30 गुना या इससे भी ज्यादा बड़ा हो सकता है.

# लांग ड्यूरेशन: पर्सनल लोन का ड्यूरेशन 3/5 साल हो सकता है. लेकिन होमलोन का ड्यूरेशन 30 साल या इससे भी ज्यादा हो सकता है.

# लांग ड्यूरेशन में भारी इंटरेस्ट: होमलोन पर पूरी लाइफ में भरा जाने वाला इंटरेस्ट लाखों में होता है.

# घर का सेंटीमेंटल वैल्यू: घर का हर भारतीय के लिए एक सेंटीमेंटल वैल्यू होता है, इसलिए इसके लिए लोन लेना आम बात है.

बढ़ रहा है होमलोन डिफॉल्ट

हाल में जारी ट्रांस यूनियन रिपोर्ट के अनुसार होमलोन डिफॉल्ट के मामले बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अकाउंट वाइज लोन 2.96 फीसदी और वैल्यू वाइज लोन 1.68 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. भारत में प्रॉपर्टी मार्केट लंबे समय से मंदी के दौर से गुजर रहा है. आर्थिक मंदी की वजह से भी होमलोन डिफॉल्ट के मामले बढ़ रहे हैं. पिछले एक दशक की बात करें तो प्रॉपर्टी की लगातार बढ़ती कीमतों के बाद भी कई संपत्तियां खरीदी थीं. उस दौर में उपयोग की बजाए ये सट्टा खरीद ज्यादा थे. इस सभी गिरावट वजहों से प्रॉपर्टी की कीमतें और गिर सकती हैं. यह अधिक चूक का कारण हो सकता है क्योंकि होम वैल्यू लोन अमाउंट के नीचे आ जाते हैं.

आम तौर पर, लेंडर यानी बैंक प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का लगभग 80 फीसदी ही लोन देते हैं, जबकि 20 फीसदी खुद का योगदान कीमतों में गिरावट के खिलाफ बफर की तरह काम करता है. हालांकि कई उधारदाताओं ने संपत्ति की कीमतों का अधिक-अनुमान लगाया है और इसके परिणामस्वरूप लोन की मात्रा में बढ़ोत्तरी हुई है. अब, जैसे ही संपत्ति की कीमतें गिरती हैं, लेंडर्स के पास झटके को दूर करने के लिए पर्याप्त बफर नहीं होता है.

फाइनेंशियल क्राइसिस में क्या करें

मौजूदा आर्थिक मंदी के दौर में लोग अपनी नौकरी को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास नहीं दिखा पा रहे हैं. ऐसी स्थिति में आपके होमलोन की ईएमआई सही से चलती रहे, इसके लिए ये उपाय जरूरी हैं.

# अगर आपके पास मल्टीपल प्रॉपर्टी और होमलोन है तो पहले उस प्रॉपर्टी को सेल करने की सोचें, जिसका इस्तेमाल खुद के लिए नहीं करना है. इससे आपकी देनदारी में कुछ कमी आएगी. हालांकि करंट मार्केट सिचुएशन में यह आसान नहीं है लेकिन वाजिब कीमत किसी भी खरीददार को आकर्षित कर सकती है. इससे ईएमआई भरने की टेंशन की बजाए आप एक टेंशन फ्री लाइफ जी सकते हैं.

# अपने बैंक से बात कर सकते हैं कि वह लोन की ईएमआई करने के लिए ड्यूरेशन बढ़ा दे. इससे जहां लोन की ईएमआई घट जाएगी, वहीं आने वाले दिनों में फाइनेंशियल स्ट्रस दूर होने पर आप फिर से इसे रिवाइज करा सकेंगे.

# इमरजेंसी या आकस्मिक फंड बनाएं, जिसमें कम से कम आपके 6 महीने के खर्च के बराबर फंड हो. यह अचानक नौकरी जाने या ऐसी स्थिति में बहुत काम आएगा.

# अनइम्प्लॉयमेंट इंश्येारेंस पर विचार कर सकते हैं. यह नौकरी जाने की कंडीशन में लिमिटेड टाइम के लिए आपके ईएमआई भरने के काम आ सकता है.

# क्राइसिस के दौर में लग्जरी हॉलीडे या एक्सपेंसिव आउटिंग जैसे फालतू खर्च बंद करें.

(By Arun Ramamurthy, Industry Expert and Author of India’s first book on Credit Scores)

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