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  1. बढ़ते हुए ब्याज दरों के बीच अपने फाइनेंशियल पोर्टफोलियो को कैसे मैनेज करें?

बढ़ते हुए ब्याज दरों के बीच अपने फाइनेंशियल पोर्टफोलियो को कैसे मैनेज करें?

औसत उधारकर्ताओं को अपने कर्ज को मैनेज करने के लिए एक बेहतर रणनीति बनानी होगी और बेहतर रिटर्न पाने के लिए कुछ निवेश विकल्पों पर फिर से सोच-विचार भी करना होगा.

June 15, 2018 11:45 AM
financial portfolio meaning, financial portfolio india, financial portfolio examples,financial portfolio management tools, financial management in hindi, financial management objectives, savings news in hindiऔसत उधारकर्ताओं को अपने कर्ज को मैनेज करने के लिए एक बेहतर रणनीति बनानी होगी और बेहतर रिटर्न पाने के लिए कुछ निवेश विकल्पों पर फिर से सोच-विचार भी करना होगा.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 bps की नवीनतम वृद्धि, देश भर में क्रेडिट साधनों के लिए बढ़ती ब्याज दरों की प्रवृत्ति से मेल खाती है. प्रसिद्ध बैंकों ने मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले ही अपनी उधार दरों (MCLR) में पहले से ही वृद्धि कर दी थी, इसलिए उपभोक्ताओं को अब अपने लोन पर थोड़ा अधिक ब्याज देने के लिए तैयार हो जाना चाहिए.

औसत उधारकर्ताओं को अपने कर्ज को मैनेज करने के लिए एक बेहतर रणनीति बनानी होगी और बेहतर रिटर्न पाने के लिए कुछ निवेश विकल्पों पर फिर से सोच-विचार भी करना होगा.

ऋण उत्पादों पर प्रभाव और उनसे कैसे निपटा जा सकता है?

कर्ज: एक मौजूदा उधारकर्ता को शायद अपने लोन की EMI के परिमाण में कोई बदलाव दिखाई न दे लेकिन RBI द्वारा दर में वृद्धि के प्रतिक्रियास्वरूप बैंकों द्वारा अपने MCLR में वृद्धि किए जाने के कारण, लोन की अवधि में बदलाव हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप आपके लोन की कुल लागत बढ़ जाएगी क्योंकि लम्बी अवधि का मतलब है कि आपको लम्बे समय तक EMI भरना होगा.

ब्याज दर अधिक होने के परिणामस्वरूप लम्बे समय तक ब्याज के रूप में हाथ से जाने वाली रकम में वृद्धि होगी जिससे आपका कुल लोन अधिक महंगा हो जाएगा. ऐसे समय में कुछ पैसे बचाने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक तरीका यही है कि आपको लोन के कुछ हिस्से का प्री-पेमेंट करना होगा जिससे आपके हाथ से जाने वाली कुल ब्याज की रकम कम हो जाएगी. यह खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो अपनी लोन अवधि के शुरू में ऐसा करते हैं. आप अवधि को एक समान मानते हुए दो साल तक की एक लम्बी रिसेट अवधि में स्विच करने की कोशिश भी कर सकते हैं.

लेकिन यदि आप अपने लोन के अंत के करीब पहुंच गए हैं तो स्विच करना ठीक नहीं होगा. बस उस लोन को उसकी अवधि के अंत तक चलाते रहें और उस पर मिलने वाली टैक्स कटौती का लाभ उठाते रहें. अधिक ब्याज दर का मतलब है कि होम लोन और एजुकेशन लोन जैसे कुछ लोन के लिए अधिक कटौती का लाभ मिलेगा.

यदि आपके द्वारा देखा गया प्रभाव काफी अधिक है तो आप दरों की तुलना करने के बाद लोन को अन्य बैंकों में ट्रांसफर करने के बारे में भी सोच सकते हैं.

क्रेडिट कार्ड: वृद्धि के बाद बैंकों ने अपने क्रेडिट कार्डों पर अपने फाइनेंश और ब्याज दरों में वृद्धि करना शुरू कर दिया है. यह काफी हद तक उन लोगों को प्रभावित करेगा जो ब्याज मुक्त अवधि के बाद अपना बकाया चुकाते हैं लेकिन फिर भी सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि देर से पेमेंट करने पर आपसे अधिक ब्याज दर के हिसाब से चार्ज लिया जाएगा.

विचार करने योग्य और परहेज करने योग्य निवेश विकल्प

निवेशकों की दृष्टि से जब ब्याज दर में वृद्धि होती है तब जोखिम मुक्त रिटर्न बढ़ जाता है क्योंकि सरकारी बॉन्ड का रिटर्न भी बढ़ जाता है. इसके अलावा निवेशक, जोखिम विरोधी होने के कारण स्वाभाविक रूप से इक्विटी से अनिश्चित और संभावित रूप से कम रिटर्न दर की तुलना में अधिक निश्चित रिटर्न दर का ही चुनाव करेंगे. ऐसे समय में कुछ फिर से विचार करने लायक और कुछ परहेज करने लायक विकल्पों के बारे में बताया जा रहा है यदि आपने अपने पोर्टफोलियो में पहले से ही उन्हें शामिल नहीं किया है.

  • FD – विचार करें
  • लिक्विड म्यूच्यूअल फंड्स और शॉर्ट टर्म म्यूच्यूअल फंड्स – विचार करें
  • छोटी बचत योजनाएं जैसे SSS, PPF, POSS – विचार करें
  • लॉन्ग टर्म डेब्ट फंड्स – परहेज करें

इसके लेखक बैंक बाज़ार के सीईओ आदिल शेट्टी हैं.

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