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कोरोना संकट में आपकी भी कट रही है सैलरी, कठिन समय में ऐसे मैनेज करें अपना फाइनेंस

कोविड-19 के चलते कई कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी में कटौती कर रही हैं.

Published: June 30, 2020 1:52 PM
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कोविड-19 महामारी का इकोनॉमिक प्रभाव पहले से ही महसूस किया जा रहा है क्योंकि इसके चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ा है. कंपनियों की कमाई पर भी इसका असर देखा गया है. इसके चलते कई कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी में कटौती कर रही हैं और उनकी जरूरी छुट्टियां भी कैंसल कर रही हैं. इसके साथ ही कर्मचारियों की छंटनी भी की जा रही है. मौजूदा समय में ज्यादातर लोगों को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हम यहां ऐसे ही कुछ फाइनेंशियल टिप्स की जानकारी दे रहे हैं, जिसकी मदद से नौकरीपेशा को इस चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी.

कौन से सेक्टर पर ज्यादा प्रभाव

वैसे तो कोविड 19 का असर ज्यादातर सेक्टर पर पड़ा है, लेकिन उनमें से भी ट्रैवल, टूरिज्म, लीजर और मीडियो इंडस्ट्री पर असर ज्यादा हुआ है. लोन के प्रति देनदारियों, लायबिलिटीज और पे कट के कारण कंपनियों की आय घटी है. इसलिए, बड़ा सवाल अब सर्वाइवल का है. ऐसे में फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय आज के दौर में सबसे जरूरी इमरजेंसी फंड बनाने की है. यह इमरजेंसी फंड एक फैमिली पर होने वाले खर्च को देखते हुए कम से कम 6 महीने का होना जरूरी है. जिन लोगों ने पहले से ही ऐसा इमरजेंसी फंड बनाया हुआ है, वे मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय में अपेक्षाकृत दूसरों से बेहतर स्थिति में हैं.

जरूरी और गैर जरूरी खर्च में अंतर समझें

मौजूदा समय एक बजटीय अभ्यास करने के साथ ही गैर आवश्यक और आवश्यक श्रेणियों में खर्चों को विभाजित करने का समय है. शराब और तंबाकू जैसे गैर जरूरी खर्च पर पूरी तरह से अंकुश लगाना चाहिए और महंगे शौक को अस्थायी रूप से रोकना चाहिए. आवश्यक खर्चों जैसे कि किराया, किराने का सामान, यूटिलिटी बिल, मोर्टगेज, क्रेडिट कार्ड, कार लोन, बीमा भुगतान आदि को प्राथमिकता दें. मोरेटोरिमय की सुविधा है लेकिन अगर आप सक्षम हैं तो अतिरिक्त ब्याज बोझ से बचने के लिए अपनी ईएमआई का भुगतान जारी रखना सही रणनीति है. केवल उन लोगों को जिन्हें भारी वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा है, ईएमआई का भुगतान करना बहुत मुश्किल है.

इमरजेंसी फंड नहीं है?

हर कोई फाइनेंशियल प्लानिंग के जरूरी सिद्धांतों का पालन नहीं करता है, इसलिए जरूरी नहीं है कि सभी के पास इमरजेंसी फंड हो. ऐसे में अपने कुछ निवेश जैसे कि शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, एफडी, डेट फंड को भुना सकते हैं. सभी एसेट्स को एक बार में न बेचें, रेगुलर इनकम के लिए सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान अपनाएं.

क्रेडिट कार्ड पर लोन न लें

किसी भी कीमत पर पर्सनल या क्रेडिट कार्ड लोन लेने से बचें. जरूरत हो तो अपने परिवार और दोस्तों से मदद लें. इस तरह से अपने खर्चों पर ध्यान देना है और कम से कम समय के लिए एक मितव्ययी जीवन जीना है.

लोन को कैसे मैनेज करें

उन लोगों के लिए जिन्होंने लोन का लाभ उठाया है और कम आय के साथ मासिक किस्तों का भुगतान करने का बोझ उठा सकते हैं, उन्हें अपने लोन को मैनेज करना चाहिए. इसका सबसे अच्छा विकल्प है कि मौजूदा लोन को कम ब्याज वाले लोन से रिप्लेस करें. मिसाल के तौर पर, अगर आपके पास पर्सनल लोन है तो गोल्ड लोन लेने पर विचार करें जो सस्ता हो.

लेखक: पी सरवनन (IIM तिरूचिरापल्ली में फाइनेंस और अकाउंटिंग के प्रोफेसर), स्वेच्छा चड्ढा (IIM तिरूचिरापल्ली में FPM स्कॉलर)

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