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बैंक में जमा पैसे की सुरक्षा को लेकर है चिंता, जानें किन बातों का ध्यान रखने पर नहीं होगी परेशानी

आइए जानते हैं कि किन बातों को ध्यान में रखकर आपको बैंकों में जमा अपने पैसों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.

March 7, 2020 8:02 PM
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रिजर्व बैंक इंडिया (RBI) को एनपीए संबंधित मुश्किलों के चलते संकट में फंसे बैंकों के मामले में दखल देना पड़ा है. गुरुवार को रिजर्व बैंक ने एलान किया कि वह यस बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जगह लेगा. केंद्रीय बैंक ने यह भी एलान किया कि यस बैंक के ग्राहक अपने सभी सेविंग्स और डिपॉजिट अकाउंट में से 50,000 रुपये तक की राशि को ही विद्ड्रॉ कर सकते हैं. इससे बहुत लोग यह सोच रहे हैं कि क्या बैंकों में जमा पैसे वाकई में सुरक्षित हैं या नहीं. आइए जानते हैं कि किन बातों को ध्यान में रखकर आपको बैंकों में जमा अपने पैसों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.

DICGC द्वारा पैसे की गारंटी

पहली बात, किसी बैंक के सेविंग्स और डिपॉजिट अकाउंट में जमा 1 लाख रुपये तक की राशि की गारंटी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन द्वारा दी गई है, जो आरबीआई की सब्सिडरी है. तो, अगर आपका बैंक, चाहे वह कमर्शियल या कॉपरेटिव है, उसमें 1 लाख रुपये तक की आपकी राशि सुरक्षित है. इसके अलावा यह राशि 1 अप्रैल से बढ़कर 5 लाख तक हो जाएगी. इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में एलान किया था. इस सीमा में अधिकतर सेविंग्स और डिपॉजिट अकाउंट आ जाएंगे.

अपने बैंक के जोखिमों को समझिए

पहले यह समझ लें कि रिस्क-फ्री बैंकिंग जैसी कोई चीज नहीं होती है. हर तरह की बचत या निवेश में किसी तरह का जोखिम मौजूद होता है, चाहे वह बड़ा या छोटा हो. सरकार या रेगुलेटर आपको कुछ सुरक्षा तो देगी, लेकिन बैंकिंग से जुड़े जोखिमों को समझने की जिम्मेदारी ग्राहक की है. किसी भी कारोबार की तरह बैंकों के अपने उतार-चढ़ाव होते हैं और कुछ बैंक दूसरों के मुकाबले ज्यादा इसकी चपेट में आते हैं. इसलिए इस बात को सुनिश्चत करें कि आप किसी ऐसे बैंक पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं.

बैंक की गतिविधियों पर नजर रखें

एक जागरूक जमाकर्ता की तरह इस बात का ध्यान रखें कि बैंक में क्या चल रहा है. क्या वह खबरों में है और क्यों है. उसके एनपीए कितने हैं. उससे बड़े स्टेकहोल्डर कौन हैं. उसके बड़े कर्जधारक कौन हैं. हाल ही की तिमाहियों का उसका प्रदर्शन कैसा रहा. उसके घाटे का कारण क्या रहे. उसके शेयर की कीमत क्या है. दूसरों बैंकों के मुकाबले उसका प्रदर्शन कैसा है. कॉरपोरेट गवर्नेंस कैसा है. क्या बैंक में धोखाधड़ी के मामले हुए हैं. जब आप बैंक की ब्रांच में जाते हैं, तो बैंक के कर्मचारियों से क्या पता चलता है. कोई बैंक स्थिर है या नहीं, इन बातों को ध्यान में रखकर आप आकलन कर सकते हैं.

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अलग-अलग बैंकों में पैसे जमा करें

निवेश की तरह ही अलग-अलग बैंकों में पैसे को जमा करें. अपने बैंक के जोखिम के आकलन के आधार पर आप कई बैंकों में अपने पैसों को बांट सकते हैं. आपको पता चलेगा कि बड़े बैंक खासकर जो सरकारी हैं, वह ज्यादा स्थिर होते हैं. इसके साथ बड़े प्राइवेट बैंक भी स्थिर होते हैं. अगर आप छोटे या कॉरपोरेटिव बैंक के ग्राहक हैं, तो आपको जोखिम को कम करने के लिए अपनी बचत का कुछ हिस्सा बड़े बैंकों में शिफ्ट कर सकते हैं. अगर आप सीनियर सिटीजन हैं, तो आप कुछ हिस्से को सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम में लगा सकते हैं जिसमें रिटर्न की गारंटी है.

ज्यादा रिटर्न से ज्यादा रिस्क होता है

ऐसे कई बैंक मौजूद हैं, जहां 1-2 फीसदी ज्यादा ब्याज दर मिलती है. कुछ छोटे बैंक अभी भी 8.5 फीसदी से 9 फीसदी की ब्याज जमा राशि पर देते हैं. ज्यादा रिटर्न वाली किसी स्कीम में निवेश करते समय, अपने जोखिमों का आकलन कर लेना चाहिए.

(By: Adhil Shetty, CEO, BankBazaar.com)

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