Retirement Planning: रिटायरमेंट के करीब ऐसे बनाएं भविष्य की आर्थिक योजना, बीमारियों के खर्च की चिंता को करें बाय-बाय

Retirement Planning: रिटायरमेंट के करीब आने और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के बीच वित्तीय योजना को प्रभावी तरीके से कैसे बनाया जाए, इसके लिए खास रणनीति बनानी चाहिए.

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रिटायरमेंट की योजना एक दिन में नहीं बनती है बल्कि यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है. इसकी योजना बनाने की शुरुआत लक्ष्यों को तय करके और उपलब्ध समय का आकलन करके ही करना चाहिए.

Retirement Planning: रिटायरमेंट की योजना एक दिन में नहीं बनती है बल्कि यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है. इसकी योजना बनाने की शुरुआत लक्ष्यों को तय करके और उपलब्ध समय का आकलन करके ही करना चाहिए. इससे रिटायरमेंट के बाद पैसों की एकाएक जरूरत जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी में मदद मिलेगी. वहीं बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं और रिटायरमेंट पर मिला पैसा अस्पताल में भर्ती होने के खर्च में चला जाता है. ऐसे में रिटायरमेंट के करीब आने और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के बीच वित्तीय योजना को प्रभावी तरीके से कैसे बनाया जाए, इसके लिए खास रणनीति बनानी चाहिए. इसके बारे में नीचे बताया जा रहा है.

रिटायरमेंट के करीब ऐसे बनाएं फाइनेंशियल प्लानिंग

  • रिटायरमेंट की योजना में आपके निवेश की सीमा, रिटायरमेंट के बाद के खर्चों का अनुमान, निवेश से मिलने वाले टैक्स काटकर हुए मुनाफे और रिस्क उठाने की क्षमता का अनुमान लगाना शामिल है.
  • रिटायरमेंट के लिए इक्विटी फंड्स, स्टॉक्स आदि में निवेश करके एक बड़ी रकम जमा कर सकते हैं लेकिन रिटायरमेंट के लगभग तीन वर्ष पहले ही सुरक्षित विकल्प जैसे कि इक्विटी फंड में लंबे समय में इकट्ठा हुए पैसे को निकालकर डेट फंड में डाल लेना चाहिए. इक्विटी में निवेश वोलेटाइटल होता है. डेट फंड में डालने पर रिटायरमेंट के बाद आमदनी को नियमित कर सकते हैं.
  • आपके रिटायरमेंट पोर्टफोलियो को एक्जिट रेट बहुत प्रभावित करता है. ऐसे में आपको अपने रिटायरमेंट के बाद खर्चों और निवेश पर मिलने वाले शुद्ध मुनाफा (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) का अनुमान लगाना चाहिए, क्योंकि इससे आप हर साल कितना निकासी करते हैं, यह प्रभावित होता है.
  • अगर आपके रिटायरमेंट में एक वर्ष ही बाकी है तो आप किसी जीवन बीमा कंपनी से तत्काल एन्युईटी प्लान में निवेश कर सकते हैं. इसमें आपको एकमुश्त प्रीमियम देना होगा और जीवन बीमा कंपनी वार्षिक एन्युईटी का भुगतान तुरंत आरम्भ कर देती है. यह भुगतान आप कितनी अवधि पर लेना चाहते हैं, इसे अपनी जरूरतों के मुताबिक चुन सकते हैं. अगर आप जोखिम उठा सकते हैं तो स्टॉक मार्केट से जुड़ी एन्युईटी योजनाएं चुन सकते हैं जिसमें एन्युईटी में उतार-चढ़ाव होता है. यहां ध्यान रहे कि एन्युईटी योजानाएं अधिकतर फिक्स्ड इनकम निवेशों की तुलना में कम रिटर्न देती हैं और इसमें जो पैसे मिलते हैं, उस पर टैक्स भी देना होता है.

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रिटायरमेंट के करीब स्वास्थ्य बीमा

  • बुढ़ापे में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी समस्‍याओं का इलाज खर्चीला और लंबा होता है. ऐसे में आपको रिटायरमेंट के करीब आने पर एक वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना अवश्य ले लेनी चाहिए.
  • आपको अगर कोमोर्बिडिटी और पहले से ही कोई बीमारी है तो भी आप वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना ले सकते हैं. उदाहरण के लिए, अधिकतर वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में पहले से मौजूद रोगों के लिए 2 से 4 वर्ष तक की प्रतीक्षा अवधि होती है. प्रतीक्षा अवधि के बाद आपको इनके लिए भी कवर मिल जाएगा.
  • कई वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या वाले लोगों के लिए को-पेमेंट का प्रावधान रहता है. इसमें जब भी आप क्लेम करते हैं तो आपको इलाज के खर्च का एक हिस्सा वहन करना पड़ता है. अगर आपको लंबे समय से कोई बीमारी है तो हमेशा को-पेमेंट का विकल्प चुनें. इस परिस्थिति में बीमा कंपनियां आपका बीमा करने को तैयार रहती हैं, क्योंकि आप अस्पताल में भर्ती के खर्चों के एक हिस्से का भुगतान करते हैं. इसके अलावा
  • आपको वरिष्ठ नागरिक की स्वास्थ्य बीमा योजना की विशेषताओं को ज़रूर देखना चाहिए. उदाहरण के लिए, क्या इस योजना में अस्पताल में भर्ती होने के पहले और बाद का खर्च, डे केयर उपचार और जिंदगी भर रिन्यूअल का विकल्प शामिल हैं या नहीं. डे केयर उपचार ऐसा मेडिकल प्रोसेस है जिनमें 24 घंटे से कम अवधि के लिए अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत होती है.

कर्ज चुकता करें और इक्विटी में कुछ पैसे लगाएं

आपको रिटायरमेंट के करीब आकर अपने धन के साथ बिना जरूरत रिस्क नहीं लेना चाहिए क्योंकि निवेश के एक गलत फैसले से आपकी रिटायरमेंट योजना प्रभावित होती है. हालांकि आप अपनी धनराशि का एक छोटा हिस्सा इक्विटी या हाइब्रिड फण्ड में लगा सकते हैं. इससे रिटायरमेंट आय बढ़ती है और यह समय के साथ महंगाई से निपटने में कारगर हो सकती है. इसके अलावा सबसे अहम ये है कि रिटायरमेंट के पहले सारे कर्ज चुका देना चाहिए क्योंकि कर्ज बाकी रह जाने से सबसे बढ़िया रिटायरमेंट योजना भी बेपटरी हो जाती है.

(Article : Archit Gupta, Founder and CEO – Clear)

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