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जानिए वित्त वर्ष 2019-20 में आपकी इनकम पर कैसे कैलकुलेट होगा टैक्स, कितनी होगी बचत

Calculate income tax : स्टेंडर्ड डिडक्शन, रिबेट और टैक्स से जुड़े बदलाव के बाद जानिए किन तरीकों से होगा आपका टैक्स कैलकुलेट

April 6, 2019 8:27 AM
how to calculate income tax in new finacial year5 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स नहीं भरना होगा लेकिन पहले की तरह ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करनी होगी.

Income Tax Calculation: अंतरिम बजट 2019 में इनकम टैक्स के मोर्चे पर कई एलान किए गए, जो नए वित्त वर्ष 2019-20 की शुरुआत के साथ ही लागू हो गए हैं. इन नए नियमों के चलते अब नए वित्त वर्ष में बजट कैलकुलेशन भी अलग रहेगी. अगर आप नए वित्त वर्ष के लिए अभी से टैक्स प्लानिंग कर रहे हैं तो नए नियमों के मुताबिक होने वाली कैलकुलेशन के हिसाब से ऐसा करें. आइए बताते हैं इन बदले नियमों और इनसे आपकी टैक्स कैलकुलेशन पर पड़ने वाले असर के बारे में-

टैक्स रिबेट और स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोत्तरी

बजट 2019 में टैक्स स्लैब में तो काई बदलाव नहीं किया गया लेकिन सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट की सीमा बढ़ाकर 12500 रुपये कर दी गई. यह सीमा पहले 2500 रुपये थी. यानी अब सरकार 12500 रुपये तक का टैक्स माफ कर देगी. इससे अब 5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री हो गई है.

सरकार ने टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू किया हुआ है. टैक्सपेयर्स की कुल इनकम में से एक निश्चित अमाउंट घटाने के बाद जो अमाउंट बनता है, उसे टैक्सेबल इनकम कहते हैं. यह निश्चित अमाउंट ही स्टैंडर्ड डिडक्शन कहलाता है. पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 40000 रुपये थी, जिसे बजट 2019 में बढ़ाकर 50000 रुपये कर दिया गया है.

इन नए प्रावधानों के चलते अगर आपने अलग-अलग टैक्स सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर रखा है तो आप 10 लाख रुपये तकी इनकम को भी टैक्स फ्री कर सकते हैं. लेकिन अगर किसी ने कोई निवेश न किया हो तो टैक्स कैलकुलेट कैसे होगा. आइए कुछ उदाहरणों के जरिए जानते हैं पूरी कैलकुलेशन-

3 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

8 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

ऐसे हुआ टैक्स कैलकुलेट

8 लाख रुपये ग्रॉस इनकम में से स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आए अमाउंट को दो ब्रैकेट 5 लाख तक और उससे उपर में बांटा. इसके बाद 5 लाख तक इनकम वाले ब्रैकेट में से 2.5 लाख रुपये की टैक्स फ्री इनकम लिमिट घटाई और बचे हुए 2.5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 5 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. यह अमाउंट 12500 रुपये बना.

अब दूसरे बचे 5 लाख रुपये से उपर के अमाउंट पर इस ब्रैकेट के लिए तय 20 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. आए हुए अमाउंट में 12500 रुपये जोड़कर आए अमाउंट पर 4 फीसदी की दर से सेस लगाया. इस तरह पूरा टैक्स कैलकुलेट हुआ.

12 लाख रु ग्रॉस इनकम पर

ऐसे हुआ कैलकुलेट

12 लाख रुपये ग्रॉस इनकम में से स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आए अमाउंट को तीन ब्रैकेट 2.5-5 लाख, 5-10 लाख और उससे उपर में बांटा. इसके बाद शुरू के 5 लाख में से 2.5 लाख रुपये की टैक्स फ्री इनकम लिमिट घटाई और बचे हुए 2.5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 5 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. यह अमाउंट 12500 रुपये बना.

अब 5-10 लाख वाले ब्रैकेट में आए 5 लाख रुपये पर इस ब्रैकेट के लिए तय 20 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. तीसरे और आखिरी 10 लाख रुपये से उपर के अमाउंट को 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले ब्रैकेट में रखते हुए इसके लिए तय 30 फीसदी की दर से टैक्स कैलकुलेट किया. हर ब्रैकेट पर टैक्स कैलकुलेशन के बाद आए तीनों अमाउंट को जोड़कर बने कुल टैक्स अमाउंट पर 4 फीसदी की दर से सेस लगाया. इस तरह पूरा टैक्स कैलकुलेट हुआ.

इन Tax नियमों में भी हुआ है बदलाव….

40000 रु तक का ब्याज टैक्स फ्री

अगर आपने बैंक/डाकघर में सेविंग्स कर रखी है तो अब इस जमा पर आने वाला 40000 रुपये तक का ब्याज टैक्स फ्री हो गया है. पहले यह लिमिट 10000 रुपये तक ही सीमित थी.

किराए पर TDS की सीमा बढ़ी

किराए पर TDS की सीमा को भी 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है.

अब दूसरा सेल्फ ऑक्यूपाइड भी टैक्स फ्री

सरकार ने अब किसी व्यक्ति के दूसरे सेल्फ ऑक्यूपाइड मकान को भी टैक्स फ्री कर दिया है. अभी तक नियम यह था कि आपके दूसरे मकान में भले ही आपके परिवार के सदस्य रह रहे हों यानी आपने मकान किराए पर न दिया हो, फिर भी उस मकान पर आस-पास के एरिया के मुताबिक रेंट कैलकुलेशन होता था. इसी पर सरकार टैक्स कैलकुलेट करती थी. लेकिन अब इस दूसरे मकान को केवल किराए पर उठाने पर ही टैक्स देना होगा. यानी अगर दूसरे मकान में परिवार के सदस्य रह रहे हैं तो कोई रेंट टैक्स नहीं बनेगा.

एक मकान बेचकर दो नए मकानों पर टैक्स छूट

सेक्शन 54 के तहत अब प्रावधान किया गया है कि अगर कोई एक मकान को बेचकर मिले पैसों से दो मकान खरीदता है तो दोनों मकानों पर टैक्स से छूट मिलेगी. पहले यह छूट केवल एक नए मकान तक ही सीमित है.

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