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बैंक से लेने जा रहे हैं कर्ज, तो जान लें कैसे तय होती है EMI

आज के समय में लोन लेना आम बात हो गई है. अक्सर लोग घर, गाड़ी, बच्चों की पढ़ाई या शादी, मेडिकल इमर्जेन्सी, बिजनेस या फिर कई अन्य जरूरतों के लिए लोन लेते हैं.

November 27, 2018 12:47 PM
How Your EMIs Are Calculated When You Take A LoanEMI यानी लोन की हर माह चुकाए जाने वाली किश्त. इस किश्त में मूलधन यानी लिए गए लोन के कुछ हिस्से के साथ ब्याज का एक हिस्सा भी शामिल होता है.

आज के समय में लोन लेना आम बात हो गई है. अक्सर लोग घर, गाड़ी खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या शादी, मेडिकल इमर्जेन्सी, बिजनेस या फिर कई अन्य जरूरतों के लिए लोन लेते हैं. साथ ही लोन को चुकाए जाने के लिए एक EMI (Equated Monthly Installments) भी तय होती है.

EMI यानी लोन की हर माह चुकाए जाने वाली किश्त. इस किश्त में मूलधन यानी लिए गए लोन के कुछ हिस्से के साथ ब्याज का एक हिस्सा भी शामिल होता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर लोन पर कितनी ईएमआई चुकाई जाएगी, यह कैसे तय होता है. आइए बताते हैं—

ऐसे तय होती है EMI?

EMI तय करने का एक फॉर्मूला होता है, जो इस तरह है—

E = P * r * (1+r) ^n / ((1+r) ^n-1)

इस फॉर्मूले में E EMI, P प्रिन्सिपल अमाउंट यानी मूलधन है, जो आपने कर्ज के तौर पर लिया है. r ब्याज दर है, जो मासिक आधार पर कैलकुलेट होती है और n लोन चुकाने की अवधि है.

इस फॉर्मूले के इस्तेमाल से EMI कैसे तय होती है, इसे एक उदाहरण से समझें. मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये का लोन लिया है. इसे चुकाने की अवधि 2 साल रखी है और ब्याज दर 10 फीसदी है. ऐसे में आपकी EMI का अमाउंट 46,145 रुपये रहेगा. साथ ही आपको कुल 1,07,479 रुपये ब्याज देना होगा.

ध्यान रखें कि अगर लोन चुकाने की अवधि ज्यादा होती है तो EMI घट जाती है लेकिन दिया जाने वाले ब्याज का अमाउंट बढ़ जाता है.

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EMI कैलकुलेटर काफी काम का

आप आॅनलाइन EMI कैलकुलेटर से भी अपने लोन का EMI अमाउंंट जान सकते हैं. इससे आप लोन लेने से पहले ही EMI अमाउंट, चुकाए जाने वाले ब्याज का पता कर सकते हैं और उसी तरह से प्लानिंग कर सकते हैं.

लोन चुकाए जाने तक एक सी ही रहती है EMI

आम तौर पर लोन चुकाए जाने तक शुरुआत में तय हुई EMI ही आखिर तक रहती है. फिर भले ही आपने फिक्स्ड इंट्रेस्ट रेट चुनी हो या फ्लोटिंग यानी घटने-बढ़ने वाली. अगर आपने फ्लोटिंग इंट्रेस्ट रेट चुनी है, तो दर बढ़ने पर बैंक आॅटोमेटिकली आपके लोन की अवधि बढ़ा देते हैं, ताकि आपकी EMI समान बनी रहे. हालांकि कुछ बैंक ऐसा आपके साथ बातचीत करके ही करते हैं. ऐसे में आपके पास आॅप्शन होता है कि आप अपना EMI अमाउंट बदलना चाहते हैं या फिर लोन की अवधि बढ़ाना चाहते हैं.

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How Your EMIs Are Calculated When You Take A LoanImage: PTI

इन हालात में बदल सकती है EMI

1. कुछ समय के लिए रेगुलर के बजाय ज्यादा EMI देना

अगर आप कुछ समय के लिए रेगुलर EMI के बजाय उससे ज्यादा EMI भरकर लोन को जल्दी चुकाना चाहते हों. ऐसे में आपको EMI के तहत तो ज्यादा पैसा चुकाना ही होगा, साथ ही कुछ बैंक इस तरह के प्रीपेमेंट पर चार्ज भी लेते हैं. लोन को जल्दी चुकाने की कवायद आपके प्रिन्सिपल अमाउंट के साथ ब्याज अमाउंट के बोझ को भी कम कर देती है.

आप चाहें तो कुछ समय तक रेगुलर से ज्यादा EMI चुकाकर बाद में EMI अमाउंट कम भी करवा सकते हैं. या फिर समान EMI को बरकरार रखते हुए लोन की अवधि कम करा सकते हैं.

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2. EMI में हर साल बढ़ोत्तरी का आॅप्शन लेना

इसे प्रोग्रेसिव EMI कहते हैं, जो हर साल बढ़ती जाती है. अगर आप इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हर साल आपकी सैलरी या इनकम बढ़ती ही जाएगी तो आप इस आॅप्शन को चुन सकते हैं. ऐसे में आपका EMI अमाउंट हर साल बदल जाएगा.

3. अगर वक्त पर नहीं चुका सके EMI

अगर आप वक्त पर EMI नहीं चुका पाते हैं तो पेनल्टी देनी होती है. ऐसे में बैंक आपसे EMI अमाउंट पर कुछ एक्स्ट्रा ब्याज भी वसूलते हैं. कुछ मामलों में यह चार्ज और पेनल्टी लोन अमाउंट में ही जुड़ जाता है और ऐसे में आगे की EMI बढ़ जाती है. हालांकि अगर आपका लोन चुकाने का पुराना रिकॉर्ड अच्छा है तो पेनल्टी घट भी सकती है या फिर आप इसका अलग से भुगतान कर EMI को बढ़ने से बचा भी सकते हैं.

(लेखक आदिल शेट्टी  BankBazaar.com के CEO हैं)

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