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  1. ITR फाइल करते समय Mutual Fund Capital Gain की घोषणा कैसे करें?

ITR फाइल करते समय Mutual Fund Capital Gain की घोषणा कैसे करें?

आइये देखें कि म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन क्या होता है और आपके वर्तमान निवेश पर किस तरह से इसके लिए वितार किया जाएगा.

August 3, 2018 3:31 PM
आइये देखें कि म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन क्या होता है और आपके वर्तमान निवेश पर किस तरह से इसके लिए वितार किया जाएगा.

पहले टैक्स फाइल करना एक बड़ी परेशानी हुआ करती थी, जिसके लिए हमें से अधिकांश लोग सहायता के लिए अपने सीए की शरण में जाते थे. लेकिन ई-फाइलिंग और निर्धारण वर्ष 2018-19 से फाइलिंग विधि में सुधार के साथ, कोई भी व्यक्ति इसे खुद ही कर सकता है, जब तक कि वह प्रक्रियाओं का पालन करता हो और प्रासंगिक दस्तावेज़ तैयार रखता हो.

यदि आप incometaxindiaefiling.gov.in पर ऑनलाइन ITR फाइल कर रहे हैं तो, आप सारांशों के साथ सात ITR फार्म देखेंगे. यदि आप वेतनभोगी हैं और किसी तरह का कैपिटल गेन नहीं हुआ हो तो ITR-फार्म 1 आपका विकल्प है. लेकिन यदि आप कैपिटल गेन/लॉस के साथ वेतनभोगी या HUF हैं तो आपक ITR-फार्म 2 का सहारा लेना होगा.

वे लोग जिन्होने म्यूचुअल फंड्स को बेचा है वे भी इसी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं और उनको अपने गेन या लॉस की घोषणा करनी होगी. आइये देखें कि म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन क्या होता है और आपके वर्तमान निवेश पर किस तरह से इसके लिए वितार किया जाएगा.

कैपिटल गेन क्या है?

ज़मीन, इमारत, घरेलू संपत्ति, वाहन, पेटेंट, ट्रेडमार्क, लीज़होल्ड अधिकार, मशीनरी, ज्वेलरी, स्टॉक्स और यहां तक कि म्यूचुअल फंड जैसी संपत्ति का कोई रूप कैपिटल एसेट्स हो सकता है. कोई भी लाभ या वृद्धि तो इन ‘कैपिटल एसेट्स’ की बिक्री से हासिल हो कैपिटल गेन कहलाती है। ये गेन्स आपके हाथों में कर योग्य हो सकते हैं, जो कि अपने घटित होने के साल के कर नियमों से विषयित होते हैं. भिन्न-भिन्न कैपिटल एसेट के कराधान के नियम भिन्न-भिन्न होते हैं. उदाहरण के लिए, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर कैपिटल गेन के नियम डेब्ट म्यूचुअल फंड्स से भिन्न होते हैं.

म्यूचुअल फंड गेन्स व लॉसेस (लाभ व हानि)

म्यूचुअल फंड में निवेश से आईटी विभाग को तत्काल कोई चिंता नहीं होती है. हालांकि, यदि आप अपने MF निवेश को रिडीम करके कोई लाभ या हानि उठाते हैं, तो आईटी विभाग उसके बारे में जानना चाहता है. निवेश की प्रकृति, वह डेब्ट फंड है या इक्विटी फंड, यह निर्धारित करता है कि निवेश पर सटीक कर प्रभाव क्या होगा.

किसी डेब्ट MF में, तीन साल से कम समय के निवेश पर कमाए गए कैपिटल गेन को लघु अवधि कैपिटल गेन्स कहते हैं. तीन साल से अधिक समय तक के निवेशों पर गेन्स को दीर्घ अवधि कैपिटल गेन्स कहते हैं. इक्विटी MF के लिए, यदि एक साल की अवधि हो तो गेन दीर्घ अवधि कहलाता है. आपके हुए लाभ (या हानि) के आधार पर, उनको आपके कर विवरण भरते उचित रूप से घोषित किया जाता है.

MF पर लघु या दीर्घ अवधि कैपिटल गेन कर
इन्ट्रूमेंटलघु अवधिदीर्घ अवधि
समयावधिटैक्ससमयावधिटैक्स
इक्विटी/बैलेन्स्ड म्यूचुअल फंड< 1 साल15%> 1 साल`1 लाख (कोई इन्डेक्सेशन लाभ रहित) से अधिक के लाभ पर 10%
डेब्ट म्यूचुअल फंड< 3 साललागू स्लैब रेट के आधार पर > 3 साल20% (इन्डेक्सेशन लाभ सहित)
*कर रेट में लागू सेस व सरचार्ज शामिल नहीं हैं
10 जुलाई 2018 के डेटा के अनुरूप

सभी फंडों पर मोचन पर किसी स्तर का कर होगा. लघु अवधि कर उच्च हैं, जैसा कि ऊपर की तालिका में दिखाया गया है, जबकि दीर्घ अवधि कर कम हैं. डेब्ट व इक्विटी म्यूचुअल फंडों के मोचन (रिडम्पशन) के दौरान हुए लघु अवधि व दीर्घ अवधि कैपिटल हानियों का भी दावा किया जा सकता है.

लाभांश

म्यूचुअल फंड योजनाओं में लाभांश योजनाएं होती है जहां पर फंड हाउस निवेशकों को आवधिक रूप से लाभांश देते हैं. निवेशक के हाथों में आए लाभांश वार्षिक रूप से `10 लाख तक कर मुक्त हैं. रिटेल MF निवेशकों में से अधिकांश की लाभांश आय इस लीमा के भीतर ही होगी। हालांकि आय को फिर भी घोषित किया जाना चाहिए.

सही ITR फार्म पर लिस्ट करना

किसी प्रोपराइटरीशिप के अंतर्गत किसी व्यापार या पेशे को ना करने वाले, लेकिन वेतन के अलावा किसी अन्य स्रोत से आय प्राप्त करने वाले व्यक्तियों व HUF के लिए ITR फार्म 2. ITR फाइल करने की तैयारी से पहले अपने सभी फंड होल्डिंग प्लेटफार्मों से वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए लेनदेन विवरण को लेना सुनिश्चित करें.

याद रखें कि रिडीम किए गए फंडों के पूरे मूल्य पर कर की गणना की जाती है ना कि किसी एक फंड पर. उदाहरण के लिए आप पर 10% के LTCG के भुगतान का दायित्व हो सकता है अगर आपके पूरे पोर्टफोलियो से लाभ की मात्रा ` 1 लाख से अधिक हो, ना कि किसी एक फंड से.  

ITR-फार्म 1 और 4 से विपरीत आप इस फार्म को ऑनलाइन नहीं भर सकते हैं. आपको ITR 2 को आयकर विभाग की वेबसाइट से आयकर XML को डाउनलोड करना होगा, भरना होगा और फिर आयकर पोर्टल में लॉगइन करके उक्त XML को अपलोड करके रिटर्न को सबमिट करना होगा.

जो लोग कटौती चाहते हैं, यदि उन्होने निवेश को सबमिट करते समय उसे अपने नियोक्ता से क्लेम नहीं किया है तो उसे वे यहां पर कर सकते हैं. याद रखें कि MF के लिए, सेक्शन 80C के अंतर्गत केवल पेंशन व ELSS श्रेणी के फंडों द्वारा `1,50,000 तक की कटौतियों का दावा किया जा सकता है.

याद रखे कि MF के अलावा यदि आपने संपत्ति, सोना या अन्य जैसी दूसरी कैपिटल ऐसेट रखी है और उनकी बिक्री से लाभ कमाया है तो आपको उनको भी उसी XML फार्म में लिस्ट करना होगा. संपत्ति को किराए पर देने से अर्जित आय को भी फार्म पर लिस्ट किया जाना है.

इसके लेखक बैंकबाज़ार के सीईओ आदिल शेट्टी हैं.

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