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म्यूचुअल फंड्स पर कैसे लगता है टैक्स? मैनेज करने के क्या हैं तरीके

आज के दौर में म्यूचुअल फंड्स काफी तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं.

October 18, 2018 8:15 AM

how tax is charged on mutual funds and how to manage it

आज के दौर में म्यूचुअल फंड्स काफी तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. लोग इनमें निवेश करने मे रुचि दिखा रहे हैं और ज्यादातर इसके लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी का सहारा ले रहे हैं. एक ओर जहां म्यूचुअल फंड टैक्स कटौती में मदद करते हैं तो दूसरी ओर इनसे होने वाला लाभ या प्रॉफिट टैक्स के दायरे में आता है. म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स कैसे लगता है और इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है, आइए बताते हैं पूरी डिटेल-

म्यूचुअल फंड टैक्सेशन क्या है?

आम तौर पर, म्यूचुअल फंड निवेशकों को निवेश की गई पूंजी पर कैपिटल एप्रीसिएशन और लाभांश या ब्याज, रसीदों के माध्यम से लाभ मिलता है. इक्विटी फंड के मामले में, फंड हाउस लाभ कमाने पर लाभांश घोषित करता है. इसी प्रकार, डेट फंड्स में अंतर्निहित संपत्ति निवेशकों को निश्चित दर पर नियमित ब्याज प्रदान करती है. इस तरह, आपके म्यूचुअल फंड का मूल्य बढ़ता रहता है क्योंकि आप अपने निवेश कालखंड में आगे बढ़ते जाते हैं. यह निवेशक को पूंजीगत लाभ देता है जो कर योग्य होता है. पूंजीगत लाभ आपके निवेश के वर्तमान मूल्य और प्रारंभिक खरीद मूल्य के बीच का अंतर है.

म्यूचुअल फंड के मामले में सभी फंड श्रेणियों में टैक्सेशन का एक डिफरेंशियल रेट लागू होता है. यह टैक्स रेट म्युचुअल फंड और होल्डिंग अवधि के प्रकार पर निर्भर करता है. होल्डिंग अवधि से आशय उस समयावधि से है, जिसके लिए एक निवेशक किसी भी म्युचुअल फंड स्कीम में निवेश करता है और वह अपने निवेश को रिडीम करने का इच्छुक नहीं है. होल्डिंग अवधि अल्पकालिक और दीर्घकालिक हो सकती है. इक्विटी फंड के मामले में, 1 वर्ष तक की होल्डिंग अवधि को अल्पकालिक माना जाता है. 1 साल से अधिक की होल्डिंग अवधि को दीर्घकालिक कहा जाता है. डेट फंड्स के मामले में 36 महीने (3 साल) तक की होल्डिंग अवधि को अल्पकालिक के तौर पर लिया जाता है; और 36 महीने से अधिक की होल्डिंग अवधि को दीर्घकालिक माना जाता है.

कैसे होती है कैपिटल गेन्स टैक्स की गणना?

कम अवधि के निवेश पर अर्जित पूंजीगत लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) कहलाता है. वहीं, लंबी अवधि में अर्जित पूंजीगत लाभ दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) के रूप में जाना जाता है. होल्डिंग पीरियड्स के आधार पर इक्विटी फंड्स और डेट फंड्स पर टैक्स वसूला जाता है. इक्विटी फंड यूनिट्स को भुनाने की स्थिति में अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) पर 15 प्रतिशत की दर से टैक्स वसूला जाता है. एक लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) टैक्स फ्री है. हालांकि, इक्विटी फंड रिडेम्प्शन पर एलटीसीजी एक लाख रुपये से ज्यादा है तो उस पर इंडेक्सेशन के लाभ के बिना 10 प्रतिशत की दर से टैक्स चुकाना होगा.

डेट फंड्स की रिडीमिंग यूनिट्स पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ निवेशक की कुल आय का हिस्सा बनता है और उसकी आय स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है. हालांकि, डेट फंड रिडेम्प्शन पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20% की दर से कर योग्य है. इंडेक्सेशन के मामले में, आप बिक्री के वर्ष और खरीद के वर्ष के कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) के अनुसार इकाइयों की खरीद की लागत को समायोजित कर सकते हैं. अधिग्रहण की सूचकांक लागत (आईसीओए) की गणना इस प्रकार की जाती है:

आईसीओए = (खरीद मूल्य * बिक्री के वर्ष का सीआईआई)/(खरीद के वर्ष का सीआईआई)

इंडेक्सेशन का मुख्य उद्देश्य संपत्ति के अधिग्रहण की लागत को बढ़ाना है, जिससे परिणामी पूंजीगत लाभ कम हो सके. इस तरह, निवेशक अपनी कुल कर देयता को कम कर सकते हैं.

म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स को कैसे मैनेज करें?

म्यूचुअल फंड पर पूंजीगत लाभ पर टैक्सेशन को लेकर आपको उसकी रिटर्न क्षमता की तलाश बंद नहीं करनी चाहिए. आप वास्तव में बहुत धन कमा सकते हैं और म्यूचुअल फंड निवेश के माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं. तनाव में रहने के बजाय, म्यूचुअल फंड पर अपने कर को मैनेज करने के लिए इन सरल युक्तियों का पालन करें:

— किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आप पूरी तरह से उस प्रोडक्ट को समझते हैं. इस तरह, आप कर देयता को आकर्षित करने वाले अनियोजित विड्रॉल के बिना निवेश कालखंड में प्रोडक्ट में निवेश के साथ बने रह सकते हैं. गुणात्मक और मात्रात्मक आधार पर फंड का विश्लेषण करने से अनुपयुक्त फंड के चुनाव से बचने में मदद मिलती है. किसी भी तरह की कठिनाई आने पर एक पेशेवर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.

— म्यूचुअल फंड यूनिट्स की लगातार खरीद और रिडेम्प्शन से बचें. यदि आप डेट से इक्विटी फंड या इसके विपरीत एक सिस्टेमेटिक ट्रांसफर करते हैं तो उस पर लगने वाले टैक्स पर विचार करें. प्रत्येक रिडेम्प्शन को विड्रॉल माना जाता है और होल्डिंग अवधि के अनुसार यह कर योग्य होता है. इक्विटी फंड में निवेश के समय, पूर्ण क्षमता का एहसास करने के लिए 5 साल से अधिक का दीर्घकालिक कालखंड होता है.

— याद रखें कि इक्विटी फंड के मामले में एलटीसीजी में छूट की अधिकतम सीमा प्रति वर्ष 1 लाख रुपये है. आप इस सीमा को सर्वोत्तम संभव तरीके से उपयोग करने के लिए अपने पोर्टफोलियो निवेश को व्यवस्थित करने पर विचार कर सकते हैं.

— आपका पूरा म्यूचुअल फंड निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों के आसपास घूमना चाहिए. वे फंड जो आपके लक्ष्यों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं उन्हें तुरंत रिडीम किया जा सकता है. उस पैसे को फंड्स में डाल दें, जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

— इतिहास देखें तो, इक्विटी ने लंबे समय तक लगभग 12% का औसत रिटर्न दिया है. इसका प्रदर्शन डेट फंड्स के मुकाबले टैक्स कटने के बाद मिलने वाले रिटर्न में बेहतर रहा है.

(नोट: लेखक क्लीयरटैक्स के फाउंडर व सीईओ हैं.)

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