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ITR: रिटर्न फाइल करने का आज के बाद भी है मौका, लेकिन 10 हजार रुपये तक देनी पड़ेगी पेनल्टी

यदि आप रिटर्न भरने की 31 अगस्त की तारीख चूक जाते हैं तो ऐसा नहीं है कि आपको मौका नहीं मिलेगा. टैक्सपेयर्स पेनल्टी के साथ 31 मार्च 2019 तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं.

August 31, 2018 1:25 PM
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बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का आज यानी 31 अगस्त 2018 आखिरी मौका है. सरकार पहले ही रिटर्न भरने की समय सीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर चुकी है. इसके बावजूद यदि आप रिटर्न भरने की 31 अगस्त की तारीख चूक जाते हैं तो ऐसा नहीं है कि आपको मौका नहीं मिलेगा. टैक्सपेयर्स पेनल्टी के साथ 31 मार्च 2019 तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं. हालांकि, 31 अगस्त के बाद जीरो रिटर्न भरने पर कोई लेट फीस नहीं देनी पड़ेगी.

आयकर अधिनियम की धारा 139 (1) के तहत आकलन वर्ष (AY) 2018-19 के लिए रिटर्न दाखिल करने के लिए निर्धारित समय के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर धारा 234F के तहत लेट फीस देनी होगी. 31 अगस्त के बाद रिटर्न फाइल करने के लिए आपको 10 हजार रुपये तक की पेनल्टी देनी पड़ सकती है.

टैक्स एक्सपर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट संगीत कुमार गुप्ता ने FE Hindi online को बताया कि 1 अप्रैल 2018 से 31 अगस्त 2018 तक रिटर्न फाइल करने पर कोई लेट फीस नहीं देनी होती है. यदि रिटर्न 1 सितंबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक फाइल किया जाता है तो 5,000 रुपये लेट फीस देनी पड़ेगी. लेकिन यदि टैक्सपेयर की कुल आमदनी 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है तो उसे रिटर्न फाइल करने पर 1000 रुपये की ही पेनल्टी देनी पड़ेगी.

CA संगीत कुमार ने बताया कि यदि कोई 31 दिसंबर तक भी रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसके लिए एक और मौका है. वह 31 मार्च 2019 तक अपना रिटर्न फाइल कर सकता है लेकिन उसे 10,000 रुपये लेट फीस देनी पड़ेगी. लेकिन, यदि उसकी कुल आमदनी 5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है तो उस पर 1000 रुपये की ही पेनल्टी लगेगी. उन्होंने बताया कि हालांक जीरो रिटर्न फाइल करने की स्थिति में कोई भी लेट फीस नहीं देनी पड़ेगी.

31 अगस्त के बाद चुनना होगा अलग विकल्प

यदि टैक्सपेयर 31 अगस्त के बाद रिटर्न भरता है तो उसे ‘Return File under 139(4)’ का विकल्प चुनना होगा. देरी से फाइल किया गया रिटर्न रिवाइज नहीं किया जा सकता है. किसी भी केस में रिटर्न फाइल करने के बाद 120 दिन में उसे वेरिफाई करना होता है, अगर आपने डिजिटली साइन नहीं किया है या आधार लिंक्ड ओटीपी के जरिए वेरिफाई नहीं किया है. इसका मतलब यह है देरी से रिटर्न फाइल किया है या नॉर्मल रिटर्न फाइल किया है अगर डिजिटली साइन नहीं किया है तो उसे 120 दिन के भीतर वेरिफाई करना होता है. प्रॉपर्टी पर होने वाली आमदनी को देर से रिटर्न फाइल करने पर कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं.

रिटर्न फाइल करने के लिए चाहिए ये डॉक्यूमेंट- 

सामान्य दस्तावेज

आप सैलरीड हों या सेल्फ इम्प्लॉइड, सभी को आम तौर पर एक जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है.

PAN: आपका पैन नंबर, आपके टैक्स से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए आवश्यक फाइनेंशियल डिटेल है.

आधार: आईटीआर फाइल करने और आधार-आधारित ओटीपी का इस्तेमाल करके उसे ई-वेरिफाई करने के लिए आपको अपने आधार नंबर की जरूरत पड़ती है. ई-वेरिफिकेशन सिर्फ तभी हो पाएगा जब आपका आधार आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और पैन नंबर से जुड़ा होगा.

बैंक अकाउंट स्टेटमेंट: आपको अपनी कुल टैक्स देनदारी का हिसाब निकालने से पहले संबंधित फाइनेंशियल वर्ष के लिए अपने सभी बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट भी निकालकर रख लेना चाहिए.

रिवाइज्ड ITR फाइलिंग के लिए ओरिजिनल ITR: अपने आईटीआर में कोई जानकारी छूट जाने पर या कोई गलती हो जाने पर एक रिवाइज्ड आईटीआर फ़ाइल करके उसे ठीक करना पड़ता है और ऐसा करने के लिए आपको पिछली बार फ़ाइल किए गए आईटीआर की कॉपी की जरूरत पड़ती है.

फॉर्म 16

फॉर्म 16 को सैलरी सर्टिफिकेट के नाम से भी जाना जाता है जिसे सैलरी पर काम करने वाले लोगों को उनके एम्प्लॉयर द्वारा जारी किया जाता है। इसमें, दी गई सैलरी, स्रोत पर काटे गए टीडीएस, छूट, कटौती, इत्यादि का विवरण रहता है. एक फाइनेंशियल वर्ष में अपनी नौकरी बदलने वाले लोगों को अपने सभी पिछले एम्प्लॉयरों से फॉर्म 16 प्राप्त कर लेना चाहिए.

फॉर्म 16A

फॉर्म 16A में, सैलरी से होने वाली आमदनी के अलावा आपकी अन्य दूसरी आमदनी पर काटे गए सभी टीडीएस का भी विवरण रहता है.

फॉर्म 12B

एक फाइनेंशियल वर्ष के बीच में एक नई कंपनी ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों को इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 26A के अनुसार नए एम्प्लॉयर के पास फॉर्म 12B सबमिट करना चाहिए. फॉर्म 12B सबमिट करना जरूरी नहीं है, फिर भी इससे नए एम्प्लॉयर को उस कर्मचारी के पिछले फाइनेंशियल लेनदेनों की जानकारी हासिल करने में काफी मदद मिलती है. उसके बाद नया एम्प्लॉयर, फाइनेंशियल वर्ष के अंत में उसे एक कंसोलिडेटेड फॉर्म 16 जारी कर सकता है.

फॉर्म 26AS

फॉर्म 26AS, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी किया जाने वाला एक टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट या एक वार्षिक स्टेटमेंट है. फॉर्म 26AS में आपके द्वारा या आपकी तरफ से दिए गए किसी एडवांस टैक्स या सेल्फ-एसेसमेंट टैक्स सहित सभी टैक्स का विवरण रहता है. फॉर्म 26AS को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ट्रेसेस पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है.

निवेश संबंधी दस्तावेज

निवेश से जुड़े दस्तावेज, ख़ास तौर पर टैक्स बचाने वाले साधनों जैसे हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, तरह-तरह की चैरिटी को दिए गए दान, लोन की अदायगी, टैक्स सेविंग एफडी इत्यादि में किए गए निवेश से जुड़े सभी दस्तावेजों को एक साथ एक जगह रखना चाहिए ताकि टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते समय टैक्स कटौती के लिए उन सभी का इस्तेमाल किया जा सके.

इंटरेस्ट सर्टिफिकेट

इंटरेस्ट सर्टिफिकेट या ब्याज प्रमाणपत्र एक ऐसा फॉर्म है जिसमें आपके सभी फिक्स्ड डिपोजिट पर काटे गए टीडीएस का विवरण रहता है. इंटरेस्ट सर्टिफिकेट खास तौर पर फाइनेंशियल वर्ष के दौरान नॉन-टैक्सेबल इनकम के लिए या कटौती की सुविधा प्राप्त करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस के रिवर्सल के लिए फॉर्म 15G या 15H का इस्तेमाल करते समय काफी उपयोगी साबित हो सकता है.

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