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होम लोन की किस्त कम करने का आ गया समय, महंगी ब्याज दरों से ऐसे मिलेगा छुटकारा

होम लोन पर महंगे ब्याज दरों से छुटकारा पाने का सही समय

October 30, 2019 3:27 PM
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Switch To Cheaper Home Loan: अगर आपने भी होम ​लोन लिया है तो हाल ही में बैंकिंग इंडस्ट्री में होने वाले डेवलपमेंट पर ध्यान देना जरूरी है. रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने बैंकों के लिए फ्लोटिंग-रेट लोन पर ब्याज दरों को रेपो दर जैसे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है. इसलिए बैंकों को MCLR के प्रावधानों से दूर रहना चाहिए, जहां बैंकों द्वारा आंतरिक रूप से फंड की लागत के आधार पर बेंचमार्क निर्धारित किया गया था.

RBI ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि रिटेल लोन पर ब्याज दर में किसी भी तरह का मूवमेंट रेपो रेट में कटौती के लिए अधिक उत्तरदायी हो, जो कि केंद्रीय बैंक द्वारा ग्रोथ को प्रोत्साहित करने के लिए की जा रही है. अब, ज्यादातर सरकारी बैंकों द्वारा कई रेपो रेट-लिंक्ड लोन लॉन्च किए गए हैं. ऐसे माहौल में अगर आपने पहले से लोन लिया है तो आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती का फायदा किस तरह से लिया जाना चाहिए.

चेक करें कि कितना दे रहे हैं ब्याज

सबसे पहला काम तो यह होना चाहिए कि मौजूदा समय में आप जो ब्याज दे रहे हैं, उसे चेक करें. अभी, महिलाओं के लिए 30 लाख रुपये तक के लोन पर सबसे कम एडवर्टाइज होम लोन की दर 7.95 फीसदी है. आपके लोन रेट का आकलन कई फैक्टर के आधार पर किया जाता है, मसलन लोन क्वांटम, लोन टु वेल्यू रेश्यो, जेंडर, इनकम सोर्स और क्रेडिट स्कोर. इसलिए पहले आन लोन मार्केट का स्कैन करें की आपने जो लोन लिया है, उस तरह के लोन पर कहां किता ब्याज मिल रहा है.

उदाहरण के लिए, आप एक सैलरीड हैं, जिनपर 55 लाख रुपये का लोन बकाया है. आपका क्रेडिट स्कोर 750 से अधिक है. इन पैरामीटर्स पर लोन के विकल्प क्या है, उन पर ब्याज दर कितना है. इसके बाद, एडवर्टाइज इंटरेस्ट रेट और पने लोन पर चल रहे ब्याज दरों की तुलना करें. अगर इसमें अंतर ज्यादा है तो आपको यह मान लेना चाहिए कि अन्य विकल्पों पर विचार करने का समय आ गया है.

आप कितनी कर सकते हैं बचत

मान लें कि आपने एक साल पहले 9.1 फीसदी की ब्याज दर पर 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया था. सिर्फ 2019 में रेपो दर 135 आधार अंक गिरकर 5.15 फीसदी हो चुका है. इसके बाद भी आप लोन पर 8.8 फीसदी की दर से ब्याज चुका रहे हें. हालांकि, कई बैंक अब आपकी तरह ही लोन के लिए 8.5 फीसदी कम ब्याज दरें आफर कर रहे हैं. मान लेते हैं कि 12 ईएमआई के बाद, आपका लोन बकाया 49 लाख रुपये है.

अगले 19 साल के लिए अगर आप 8.8 फीसदी की कांस्टैंट रेट से ही पेमेंट करते हैं तो आपका कुल ब्याज 52 लाख रुपये होगा. वहीं, अगर आप 8.5 फीसदी की कांस्टैंट रेट से भुगतान किया तो आपका कुल ब्याज 49 लाख रुपये होगा. यानी 3 लाख रुपये की बचत जो सीधे सीधे 7 ईएमआई के बराबर होगी. इसलिए, अगा आप वर्तमान में ज्यादा ब्याज दर के हिसाब से पेमेंट कर रहे हैं तो इसे नीचे कैसे लाया जाए, इसका उपाय खोजना जरूरी हो गया है.

लेंडर से ब्याज दरों पर करें बात

एक उपाय यह है कि आप अपने लेंडर से इस बारे में बात करें. उससे पूछें कि आपकी उच्च ब्याज दरों को क्या कम किया जा सकता है. प्रॉसेसिंग फी के भुगतान के बाद लेंडर आपकी दरों में कटौती करने की पेशकश कर सकता है. अगर आपका लोन अभी भी बेस रेट से जुड़ा हुआ है, तो आपकी दर रेपो-लिंक्ड दरों से अधिक हो सकती है. आपका बैंक लोन है तो रेपो-लिंक्ड लोन की ओर मूव करने का विचार करें जहां ब्याज दरें कम हैं और आपको RBI द्वारा मैनडेट कट का पूरा फायदा मिलता है. आपका लोन एनबीएफसी या एचएफसी से है, तो आपके लेंडर को एक्सटर्नल लेंडिंग बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य नहीं है. ऐसे मामलों में आपके पास यह विकल्प है कि अपना लोन बैंक के पास ट्रांसफर करा लें.

लोन ट्रांसफर में ध्यान दें

अगर आप बैंक होम लोन ट्रांसफर के लिए बाजार में हैं, तो कई चीजें हैं जिन पर आपको विचार करने की जरूरत है. सबसे पहले, देखें कि कौन सा बैंक कितने ब्याज दर पर लोन दे रहा है. उसके बाद देखें कि लोन ट्रांसफर करने में कितना खर्च आएगा. फिर देखें कहीं ये खर्च इतना ज्यादा तो नहीं है कि लोन ट्रांसफर का कोई फायदा न मिले. ये साी चीजें कैलकुलेट करने के बाद ही ट्रांसफर करने के लिए सही लेंडर का विकल्प चुनें.

रेगुलर प्रीपेमेंट पर विचार

अंत में, एक बार आपकी ब्याज दर कम हो जाए, रेगुलर प्रीपेमेंट पर विचार करें. कम दर की अवधि के दौरान आपके होम लोन पर प्रीपेमेंट, उच्च दरों पर प्रीपेमेंट की तुलना में अधिक प्रभावी है.

(लेखक: आदिल शेट्टी, CEO, BankBazaar.com)

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