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Women’s Day 2020: ‘गृहलक्ष्मी’ नहीं अब फुल टाइम ट्रेडर, शेयर बाजार ने ऐसे दिखाई महिलाओं को राह

ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने आप को गृहणी से फुल टाइम ट्रेडर में बदला है.

March 8, 2020 3:39 PM
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महिलाओं की उपलब्धियां अब न्यूजरूम में होने वाली परंपरागत चर्चाओं से काफी आगे निकल चुकी हैं. मौजूदा दौर में वे स्पेस वॉक(क्रिस्टीना कोच और जेसिका मेयर) और लूनर मिशन(मुत्थ्या वनीथा) पर जा रही हैं. आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट (गीता गोपीनाथ) और विश्व बैंक में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (अंशुला कांत) बन रही हैं. यहां तक कि पुरुषों के पूरे दस्ते को लीड (भावना कस्तूरी) कर रही हैं. और तो और युद्ध सेवा मेडल (मिंटी अग्रवाल) हासिल कर रही हैं, जो जीवन के प्रत्येक पहलू में उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें से ज्यादातर को प्रोत्साहन भारत से मिला है.

लेकिन इसके बावजूद महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हमारे देश को अभी एक लंबी यात्रा तय करनी है. यह हास्यादपद है कि आमतौर पर भारतीय महिलाओं को गृहलक्ष्मी कहा जाता है और शायद ही उन्हें घर में कमाई के लिए कभी प्रोत्साहित भी किया गया हो. इसके बावजूद इसमें काफी बदलाव देखा गया है और महिलाएं भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं.

आर्थिक सशक्तिकरण

पहले हमें यह समझना होगा कि हम एक पूंजीवादी समाज में रहते हैं. इसीलिए पूंजीवादी कारकों द्वारा चीजों को खरीदने की हमारी क्षमता से समाज में हमारी जगह तय होती है. इसमें हमारा बैंक बैलेंस, स्थिर और अस्थिर पूंजी और हमारी कमाई शामिल है. गृहणियों को हाशिए पर रखा जाता है, क्योंकि वे अपने घर के लिए कुछ कमाई नहीं करती हैं. इससे उनके रोजाना जीवन में काफी प्रभाव पड़ता है.

इसीलिए सामाजिक स्थिति में बदलाव का मार्ग आर्थिक सशक्तिकरण से ही प्रशस्त होगा. यह महिलाओं के सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता रखता है. मूल मुद्दों से अछूते ऐसे सतही बदलावों की तुलना में आर्थिक सशक्तिकरण ज्यादा प्रभावी है. इस परिदृश्य में स्टॉक ट्रेडिंग गेम चेंजर साबित हो सकता है. इसके साथ ही यह एंटरप्रेन्योरशिप जैसे करियर के विकल्पों का मार्ग भी प्रशस्त करता है.

लगातार कमाई का माध्यम

प्राचीन काल से ही महिलाओं को एक साथ कई काम करने और पूरी निष्ठा के साथ करने के लिए जाना जाता रहा है. आज उनके लिए अतिरिक्त कमाई करना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है. रहन-सहन का खर्च लगातार बढ़ने के कारण अपनी कमाई में कुछ तेजी लाने में ही समझदारी है. ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने आप को गृहणी से फुल टाइम ट्रेडर में बदला है और कमाई कर रही हैं, जिसे एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है.

बदलेगी पहचान

टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टॉक मार्केट की पहुंच बढ़ने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा महिलाएं ट्रेडिंग कर रही हैं. ऐसे में ये महिलाएं अपनी गृहणी की अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे निकल गई हैं. अब वे भी घर में कमाई करने वाले सदस्यों के रूप में गिनी जाती हैं. इसके अलावा देश के सभी क्षेत्रों में महिलाएं सब ब्रोकर के रूप में काम करने के विकल्प को भी अपना रही हैं और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इक्विटी मार्केट से जोड़ रही हैं. इससे वे न सिर्फ घर में आर्थिक भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि देश में आर्थिक सहयोग दे रही हैं.

टेक्नोलॉजी का सहयोग

कई महिलाओं को लगता है कि स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के लिए गणित में महारत हासिल होनी चाहिए. हालांकि यह सच्चाई नहीं है. आज के दौर में स्टॉक ब्रोकर के पास ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसकी मदद से वे अपने ग्राहकों के लिए मार्केट एनालिसिस करते हैं. इसमें आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से निवेशकों को मार्केट के बारे में सलाह दी जाती है. इसके माध्यम से कोई भी सलाह देने से पहले अरबो डेटा प्वॉइंट का अध्ययन किया जाता है. ये पर्सनलाइज्ड रिसर्च के आधार पर रोजना सलाह भी देते हैं. इस तरह की टेक्नोलॉजी का उपयोग महिलाओं को निवेशक बनने के लिए प्रोत्साहित करता है और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती हैं.

मैक्रो-इकोनॉमिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव

एक व्यापक बदलाव के तौर पर एक अनुमान है कि भारत 2025 तक 770 अरब डॉलर की जीडीपी जनरेट करेगा. यह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना कर ही किया जा सकता है. वैश्विक स्तर पर यही आंकड़ा करीब 120 खरब डॉलर का होगा. इसलिए यह बदलाव बेहतर है और पूरे आर्थिक मोर्चे के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा.

आर्थिक सशक्तिकरण एक बड़ा सामाजिक बदलाव लेकर आता है और आज के दौर में महिलाओं के लिए स्टॉक मार्केट का चयन सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है. अच्छी बात यह है कि वे खुद आगे बढ़कर इस बदलाव को अपना रही हैं और भारत व विश्वभर में बदलाव के अग्रदूत बनकर उभरी हैं.

(लेखक: केतन शाह, चीफ रेवेन्यू ऑफिसर, एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड)

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