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Health Insurance: इंश्योर्ड व्यक्ति का निधन होने पर पॉलिसी का क्या होगा, यहां लीजिए सारी जानकारी

Health Insurance: यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर हेल्थ इंश्योरेंस कराए हुए शख्स की मौत हो जाती है तो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का क्या होगा.

Updated: May 29, 2021 8:13 PM
Health Insurance What happens to a policy after death of an insured member

Health Insurance: कोरोना महामारी के चलते न सिर्फ जीवन अस्त-व्यस्त हुआ है बल्कि इसके चलते कई लोगों को अपनी जिंदगियां गंवानी पड़ी है. इस महामारी के चलते देश भर में अब तक 3 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी और अभी भी हर दिन इसके चलते हजारों लोगों की मौत हो रही है. ऐसी किसी भी अनहोनी की स्थिति में अपने परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कराया जाता है. यह इंश्योरेंस अस्पताल में भर्ती होने के खर्च होने को कवर करता है, हालांकि यहां यह जानना भी अधिक महत्वपूर्ण है कि अगर हेल्थ इंश्योरेंस कराए हुए शख्स की मौत हो जाती है तो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का क्या होगा.

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हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में इंश्योर्ड की मृत्यु होने पर होने वाली प्रक्रिया

  • बीमित परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की स्थिति में: अस्पताल में भर्ती होने के दौरान अगर बीमित परिवार के किसी शख्स की मौत हो जाती है तो परिवार के अन्य सदस्य बीमा कंपनी से क्लेम रिक्वेस्ट को प्रॉसेस करने और क्लेम सेटलमेंट का अनुरोध कर सकते हैं.
  • बीमित सदस्य की मृत्यु होने पर: बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस के चीफ टेक्निकल ऑफिसर टीए रामलिंगम के मुताबिक किसी बीमित सदस्य की मृत्यु के बाद प्रस्तावक को बीमा कंपनी से संपर्क कर क्लेम रिक्वेस्ट को प्रॉसेस करने और क्लेम सेटलमेंट का अनुरोध करना होता है. रामलिंगम के मुताबिक कवर से मृतक को हटा दिया जाता है और पॉलिसी के टर्म्स एंड कंडीशंस के मुताबिक प्रीमियम को रिफंड किया जाएगा.
  • पॉलिसी के प्रस्तावक की मृत्यु होने पर: पॉलिसी अवधि के दौरान प्रस्तावक की मौत होने की स्थिति में परिवार को इंश्योरेंस कंपनी से प्रस्तावक में बदलाव के लिए संपर्क करना होता है. ऐसी स्थिति में एक नए प्रस्तावक को लेकर नया फॉर्म भरा जाता है. रामलिंगम के मुताबिक बीमा कंपनी प्रस्तावक को बदलती है और अन्य सदस्यों के लिए पॉलिसी जारी रहती है.
  • एक से अधिक सदस्यों की मृत्यु होने पर: ऐसी स्थिति में अगर यह रिइंबर्समेंट क्लेम है तो पॉलिसी में रजिस्टर्ड नॉमिनी को क्लेम पेड किया जाता है. रामलिंगम के मुताबिक अगर यह कैशलेस क्लेम है तो अस्पताल से जुड़े खर्चों को सीधे अस्पताल को पे किया जाता है.

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दो प्रकार के होते हैं पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी

पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी दो प्रकार के होते हैं- इंडिविजुअल पॉलिसी और फैमिली फ्लोटर पॉलिसी.

  • इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी: सम इंश्योर्ड की राशि और बेनेफिट्स किसी इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में बीमाधारक के लिए फिक्स रहते हैं. हालांकि अगर इस प्रकार की पॉलिसी में एक से अधिक लोगों को संयुक्त रूप से बीमा होता है तो स्वास्थ्य बीमा कंपनियां प्रीमियम में कुछ छूट भी देती हैं. ज्वाइंट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में अगर किसी एक शख्स ने अस्पताल के खर्चों को लेकर क्लेम कर लिया है तो यह दूसरे शख्स के बेनेफिट्स को प्रभावित नहीं करेगा यानी दूसरे शख्स को पूरा बेनेफिट्स मिलेगा.
  • फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी: इस प्रकार की पॉलिसी में अगर किसी शख्स ने हॉस्पिटलाइजेशन को लेकर क्लेम कर लिया है तो पॉलिसी अवधि के बचे समय के लिए सम इंश्योर्ड कम हो जाता है. इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं कि 5 लाख रुपये वाला कोई फैमिली फ्लोटर अप्रैल में हर साल रिन्यू होता है. अगर बीमित चार सदस्यों में किसी एक ने अगस्त में 3 लाख रुपये का क्लेम हासिल कर लिया है तो बचे हुए अगले सात महीने तक सिर्फ 2 लाख रुपये का सम इश्योर्ड ही उपलब्ध रहेगा.

(Article: Amitava Chakrabarty)

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