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Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने का है प्लान? इन बातों का रखें ध्यान, वरना पड़ेगा पछताना

आज देश में ज्यादातर मॉडर्न ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं, जिसके चलते इलाज का खर्च भी बढ़ गया है. इन खर्चों से निपटने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस का होना बेहद जरूरी हो गया है.

Health Insurance
पिछले कुछ सालों में कोविड के चलते लोगों में जागरूकता काफी बढ़ गई है.

Health Insurance: हाल के दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. पिछले कुछ सालों में कोविड के चलते लोगों में जागरूकता काफी बढ़ गई है. वहीं, कई लोग लोग अक्सर यह सोचकर हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से मना कर देते हैं कि उनकी बीमार पड़ने की संभावना बहुत कम है और इसलिए प्रीमियम का भुगतान करने में पैसा बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है. इसका खामियाज़ा लोगों को बाद में भुगतना पड़ता है.

निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के डायरेक्टर (प्रोडक्ट्स और क्लेम्स) भाबातोष मिश्रा कहते हैं, “हालांकि, अच्छी खबर यह है कि भारत ने चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से विकास किया है. आज देश में ज्यादातर मॉडर्न ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं. भारतीय डॉक्टरों को दुनिया भर में सराहा जाता है और यहां सबसे एडवांस डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय तकनीक उपलब्ध हैं.” हालांकि, इनमें खर्च काफी ज्यादा आता है इसलिए आज के समय में इलाज में आने वाले खर्चों से निपटने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस का होना बेहद जरूरी हो गया है. मिश्रा कहते हैं कि बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता है कि सही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे चुनें. आइए जानते हैं कि अपने लिए सही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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सम इंश्योर्ड

पॉलिसी खरीदते समय सम इंश्योर्ड कितनी हो इसका निर्णय नीचे दी गई चीजों को ध्यान में रखते हुए लिया जाना चाहिए.

  • निवास स्थान – हेल्थकेयर में आने वाला खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कहां रहते हैं. ट्रीटमेंट की लागत में अलग-अलग शहरों में अंतर होता है. मिश्रा बताते हैं, “मेट्रो शहर में रहने वाले शख्स को अधिक बीमा राशि की जरूरत हो सकती है, क्योंकि यहां टियर 2 और 3 शहरों की तुलना में इलाज की लागत ज्यादा होती है.”
  • जीवन स्तर और आयु – अधिक उम्र के लोगों की तुलना में कम उम्र के लोगों को कम बीमा राशि की जरूरत हो सकती है.
  • फैमिली साइज – बड़े परिवारों को अधिक बीमा राशि की जरूरत होगी.
  • हॉस्पिलाइजेशन में भविष्य में होने वाला खर्च – यह मेडिकल इन्फ्लेशन और टेक्नोलॉजी व मॉडर्न ट्रीटमेंट की उपलब्धता के कारण उपचार की बढ़ती लागत पर निर्भर करेगा.

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो

पॉलिसी खरीदने से पहले इसे इंडिकेटर को जरूर चेक करना चाहिए. मिश्रा कहते हैं, “हालांकि, आपको केवल इस आंकड़े पर ही भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि एप्लिकेबल वेटिंग पीरियड के चलते नए प्रोडक्ट्स में थोड़ा लोवर सेटलमेंट रेश्यो हो सकता है.”

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नेटवर्क हॉस्पिटल्स

बीमाकर्ता के नेटवर्क में आने वाले अस्पतालों की संख्या देखने के बजाय, यह चेक करें कि आपके एरिया और शहर में कितने अस्पतालों का बीमाकर्ता के साथ टाई-अप है. मिश्रा बताते हैं, “इसका फायदा यह होगा कि इमरजेंसी के दौरान आपको एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भागना नहीं पड़ेगा.” वे आगे कहते हैं, “यह भी चेक करें कि बड़े मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क में हैं या नहीं. अगर कभी बेहतर इलाज वाले अस्पताल की जरूरत पड़ी तो यह मददगार होगा.”

नियम और शर्तें

पॉलिसी खरीदने से पहले पॉलिसी डॉक्यूमेंट में दी गई नियम और शर्तों को ठीक से समझ लेना चाहिए. अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो पॉलिसी के नियम और शर्तों के आधार पर आपके क्लेम को रिजेक्ट किया जा सकता है. मिश्रा कहते हैं, “इन शर्तों को अच्छी तरह से समझना और ऐसी पॉलिसी का चयन करना अहम है जिसमें आपको ज्यादा इंतजार न करना पड़े.”

(Priyadarshini Maji)

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