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Health Insurance: कोरोना ने छीन लिए मां-बाप तो बच्चों के हेल्थ इंश्योरेंस का क्या होगा? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Health Insurance for Orphaned: अनाथ बच्चों के लिए हेल्थ कवर जारी रहना बहुत जरूरी है क्योंकि माता-पिता के नहीं रहने पर जो रिश्तेदार उनकी देखभाल करते हैं, वे जरूरी नहीं कि अस्पताल के खर्चे भी उठा सकें.

Updated: Jun 18, 2021 2:53 PM
Health Insurance After losing parents will orphans lose medical cover as well know here in detailsअनाथ बच्चों के कानूनी अभिभावक अगर प्रीमियम भरते रहते हैं तो उनका हेल्थ इंश्योरेंस कवर जारी रहता है.

Health Insurance Cover for Orphaned Children: कोरोना महामारी के चलते देश भर में 4 लाख के करीब लोगों की जिंदगियां जा चुकी हैं और अभी भी हर दिन हजारों लोगों की कोरोना के चलते मौतें हो रही हैं. कोरोना के चलते न सिर्फ लोगों की जानें जा रही हैं बल्कि कई परिवार अपने कमाऊ शख्स को भी गंवा रहे हैं. इसका बच्चों पर भी बहुत असर पड़ा है क्योंकि उनके माता-पिता दोनों या दोनों में किसी एक की जान जा चुकी है. बीमा कंपनियां सिर्फ एक परिस्थिति में निर्भर बच्चे को हेल्थ कवर में करती है, जब माता-पिता दोनों में से किसी एक ने बच्चे के साथ मिलकर कवर के लिए आवेदन किया हो और उनके गुजरने के बाद भी बच्चे को कवर हासिल रहता है.

बच्चे को 21 साल की उम्र का होने तक या माता-पिता पर वित्तीय रूप से निर्भर होने तक बीमा कंपनियां उन्हें हेल्थ कवर उपलब्ध कराती है. हालांकि यहां सबसे बड़ा सवाल है कि जिन बच्चों के मां-बाप दोनों ही नहीं रहे, उनका हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलेगा या नहीं? अनाथ बच्चों के लिए हेल्थ कवर जारी रहना बहुत जरूरी है क्योंकि कानूनी गॉर्जियन्स और संबंधी उनकी देखभाल कर सकते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे अस्पताल के खर्चों को वहन कर सकें.

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प्रीमियम भरते रहें तो जारी रहेगा इंश्योरेंस कवर

अनाथ बच्चों के हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को लेकर बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस के चीफ टेक्निकल ऑफिसर टीए रामलिंगम ने जानकारी दी कि प्रस्तावक के रूप में कानूनी अभिभावक के साथ बच्चे के लिए पॉलिसी जारी रहेगी. रामलिंगम के मुताबिक अनाथ बच्चों के कानूनी अभिभावक अगर प्रीमियम भरते रहते हैं तो उनका हेल्थ इंश्योरेंस कवर जारी रहता है. अविवाहित बच्चे, सौतेले बच्चे या कानूनी तौर पर गोद लिए हुए बच्चों को डिपेंडेट चाइल्ड के रूप में इंश्योरेंस कवर मिलता है.

हालांकि इस मसले पर इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) द्वारा कानूनी अभिभावक की एलिजिबिलिटी व स्कोप को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने चाहिए ताकि अपने माता-पिता को खोने के बाद भी अनाथ बच्चे को हेल्थ इंश्योरेंस कवर सुनिश्चित किया जा सके. ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रैंड पैरेंट्स या अन्य संबंधी बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अनाथ बच्चों को गोद ले लेते हैं और इसके चलते इन बच्चों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीज को रिन्यू कराते समय डिस्क्वालिफाई करार दिया जाता है.

कोरोना महामारी के चलते 1742 बच्चे हो चुके हैं अनाथ

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) द्वारा 1 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए एफिडेविट के मुताबिक मार्च 2020 से मई 2021 के बीच 9346 बच्चे या तो अपने मां-बाप दोनों को या दोनों में से किसी एक को खो चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जो बच्चे अपने मां-बाप दोनों को कोरोना महामारी के चलते खो चुके हैं यानी कि अनाथ हो चुके हैं, उनकी संख्या 1742 बताई गई है. हालांकि कुछ लोगों को डर है कि वास्तविक संख्या कुछ अधिक भी हो सकती है.
(Article: Amitava Chakrabarty)

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