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GPF Vs EPF Vs PPF Vs NPS : रिटायरमेंट फंड के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन, जानिए हर स्कीम के फायदे

Retirement Planning : जीपीएफ Vs ईपीएफ Vs पीपीएफ Vs एनपीएस में जानिए कितना मिलता है ब्याज.

March 27, 2019 10:19 AM
gpf vs epf vs nps vs ppf a better investment option for retirement planningPPF, NPS, GPF और EPF में से रिटायरमेंट के हिसाब से किस में निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है.

Retirement Planning : नौकरियों (कुछ सरकारी नौकरियों को छोड़कर) में आज के समय में पेंशन का प्रावधान खत्म हो गया है. सरकारी या प्राइवेट कर्मचारियों को रिटायरमेंट फंड के लिए अब खुद निवेश करना होता है. आमतौर पर कर्मचारी पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) और इंम्पलॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) जैसी स्कीम में निवेश का विकल्प चुनते हैं. लेकिन, कभी सोचा है कि आखिर इन सभी विकल्पों में से आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प कौन सा है? आज हम आपको बताएंगे कि PPF, NPS, GPF और EPF में से रिटायरमेंट के हिसाब से किस में निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PUBLIC PROVIDENT FUND)

PPF खाते के तहत आप हर साल अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा कर सकते हैं. PPF में निवेश की रकम को सेक्शन 80C के अन्दर डिडक्शन मिल जाती है. PPF योजना 15 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आती है. हालांकि, 7 साल बाद भी इस योजना में से कुछ रकम निकाली जा सकती है.

PPF खाते को 15 साल पूरे होने के बाद 5 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है. 5 साल के बाद इस खाते को प्री-मेच्योर भी बंद किया जा सकता है. इस योजना के तहत निवेश 500 रुपये से शुरू होकर 1.5 लाख रुपये तक किया जा सकता है. मौजूदा ब्याज दर 8 फीसदी है. आप अपने या नाबालिग बच्चे के नाम पर एक PPF खाता खोल सकते हैं.

नेशनल पेंशन स्कीम (NATIONAL PENSION SCHEME)

NPS एक सरकारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है. इस स्कीम को केन्द्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को लॉन्च किया था. 1 जनवरी 2004 के बाद नौकरी पर लगने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए इस योजना में निवेश करना जरूरी है. 2009 के बाद से इस योजना को प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए भी खोल दिया गया. लेकिन प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इस योजना में निवेश करना आनिवार्य नहीं है.

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी अपनी मर्जी से इस योजना में निवेश कर सकते हैं. इस योजना में निवेश करने पर रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है. आप ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं. अपने रिस्क फैक्टर के हिसाब से आप अलग-अलग NPS योजनाओं में निवेश कर सकते हैं.

निवेशक को सेक्शन 80C के तहत टैक्स में डिडक्शन मिल जाती है. हालांकि, यदि व्यक्ति द्वारा किया गया निवेश वॉलेंटरी है, तो बजट 2016 के अनुसार, आप अलग से 50,000 रुपए का सेक्शन 80CCD(1B) के तहत टैक्स में डिडक्शन ले सकते हैं.

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इम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EMPLOYEE PROVIDENT FUND)

EMPLOYEE PROVIDENT FUND किसी भी ऐसी कंपनी पर लागू होता है 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी होते हैं. EPF में मिलने वाली ब्याज दरें EPFO द्वारा तय की जाती है. फिलहाल EPF में 8.5 फीसदी के हिसाब से ब्याज मिलता है.

कोई भी व्यक्ति आमतौर पर EPF में से पैसा नहीं निकाल सकता. लेकिन अगर आपके पास नौकरी नहीं है , तो उस दौरान आप EPF में से पैसा निकाल सकते हैं. EPF में निवेश को EPFO द्वारा मैनेज किया जाता है.

जनरल प्रोविडेंट फंड (GENERAL PROVIDENT FUND)

इस स्‍कीम में केवल सरकारी कर्मचारी ही निवेश कर सकते हैं. दूसरे निवेश विकल्पों की तरह सरकार इसमें निवेश नहीं करती हैं. इस स्कीम में सिर्फ कर्मचारी ही योगदान करता है. आज के समय में जीपीएफ में 8 फीसदी का ब्याज मिलता है.

GPF में निवेश की गई राशि रिटायरमेंट के समय कर्मचारी मिलती है. जीपीएफ खाते में किसी को नॉमिनी भी बनाया जा सकता है. आप जीपीएफ के GPF एडवांस फीचर के माध्यम से लोन ले सकते हैं. इस लोन पर ब्याज नहीं देना होता. आप कितनी बार भी जीपीएफ एडवांस से अपनी जरूरत के हिसाब से लोन ले सकते हैं.

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