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Friendship Day: दोस्त को पैसे उधार देते वक्त कौन सी बातें ध्यान रखनी चाहिए?

एक बार जब आप एक दोस्त को पैसे उधार दे देते हैं तो आप देख सकते हैं कि आपके बीच का तालमेल बदल रहा है.

August 5, 2018 9:40 AM
happy friendship day, happy friendship day quotes, happy friendship day cards, happy friendship day 2018, friend loan agreement, friend loan contract, business news in hindiएक बार जब आप एक दोस्त को पैसे उधार दे देते हैं तो आप देख सकते हैं कि आपके बीच का तालमेल बदल रहा है.

दोस्तों के बीच पैसों का लेनदेन एक नाजुक मामला है, इस मामले को अच्छी तरह हैंडल न करने पर, यह उनके रिश्ते को बर्बाद कर सकता है. यहाँ, हम इस बात पर गौर करेंगे कि इस तरह की परिस्थिति को कैसे संभालना चाहिए और अपने फाइनेंशियल हित के साथ-साथ अपने रिश्तों की रक्षा कैसे करनी चाहिए.

इस मामले को संभालना इतना मुश्किल क्यों है?

एक बार जब आप एक दोस्त को पैसे उधार दे देते हैं तो आप देख सकते हैं कि आपके बीच का तालमेल बदल रहा है. आपका दोस्त इस एहसास के बोझ तले दब सकता है कि वह आपका कर्जदार है इसलिए उसे आपके साथ अब अधिक सम्मान के साथ पेश आना चाहिए.

आम तौर पर दोस्तों के बीच होने वाले लेनदेन को किसी कानूनी समझौते के माध्यम से कंट्रोल नहीं किया जाता है या उस उधार के पैसे को ब्याज के साथ चुकाना नहीं पड़ता है. यह एक ऐसा लेनदेन होता है जो भरोसे पर टिका होता है. आपको विश्वास होता है कि आपका दोस्त तय समय सीमा के भीतर आपको वह पैसे लौटा देगा. वह हमेशा सही ढंग से आपकी फाइनेंशियल कंडीशन का अनुमान नहीं भी लगा सकता है, इसलिए वह कभी-कभी आपको पैसे लौटाने में उम्मीद से ज्यादा समय भी ले सकता है. जब किसी नियम और शर्त के बिना पैसे उधार दिए जाते हैं तब दोस्त उस पैसे को लौटाने के लिए प्रेरित नहीं भी हो सकता है.

यह समस्या यहीं ख़त्म नहीं होती है. आपका दोस्त आपसे दोबारा पैसे उधार मांग सकता है, जिससे आप उधार देने दलदल में काफी गहराई तक धंस सकते हैं. यदि आप उधार देने से मना कर देते हैं तो हो सकता है कि आपके पिछले कर्ज के वापस मिलने की संभावना ख़राब हो जाय. यदि आप उधार दे देते हैं तो आपके ऊपर उसे दोबारा उधार देने का बोझ बढ़ सकता है जिससे आपका अपना फाइनेंशियल कंडीशन गड़बड़ा सकता है.

अपने दोस्त पर आपको जो भरोसा है वह सबसे पहले आहत होगी जब आप अपने उस दोस्त को उस पैसे को वापस करने के लिए कहेंगे. हो सकता है कि आपका दोस्त आपका पैसा लौटा दे. ऐसा भी हो सकता है कि वह आपसे थोड़ा और समय मांगे, या मन मारकर थोड़े बहुत पैसे लौटा दे. चाहे जो भी हो यह एक तकलीफदेह परिस्थिति साबित होती है जो आपकी दोस्ती में दरार डाल सकती है.

इसलिए दोस्तों के बीच पैसों का लेनदेन निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए बड़ी सावधानी के साथ करना चाहिए:

ना कहना

जब एक दोस्त आपसे पैसे उधार मांगता है तब उसे ‘हाँ’ या ‘ना’ कहने से पहले अपने आपको तैयार कर लें. ‘ना’ कहने से आपके रिश्ते पर पड़ने वाले असर के बारे में सोच लें. इसके अलावा, उन सभी तरीकों के बारे में सोचें जिनके माध्यम से आपका दोस्त पैसे का इंतजाम कर सकता है जैसे पर्सनल लोन, प्रॉपर्टी के बदले मिलने वाला लोन, गोल्ड के बदले मिलने वाला लोन, FD पर मिलने वाला ओवरड्राफ्ट या नियमित रूप से ब्याज पर उधार देने वाले लोगों से मिलने वाला कर्ज, ये कुछ ऐसे ऑप्शन्स हैं जहाँ से पैसे उधार लेने की सलाह आप उसे दे सकते हैं. यदि इनमें से कोई भी ऑप्शन काम कर गया तो आप अपने दोस्त को उधार देने से बच जाएंगे.

हां कहना

यदि अपने दोस्त को पैसे उधार देना आपके लिए जरूरी हो जाय तो उसके परिणामों के लिए अपने आपको तैयार कर लें और पैसे उधार देने की शर्तों के बारे में सोचना शुरू कर दें.

अपने सभी EMI, कर्ज, इन्वेस्टमेंट, इंश्योरेंस प्रीमियम, मंथली खर्च और अन्य प्रकार के खर्चों का पेमेंट करने के बाद हाथ में बचने वाले पैसे का अनुमान लगाएं. यह पता लगाने की कोशिश करें कि आपके दोस्त को असल में कितने पैसों की जरूरत है और उससे पूछें कि उसे ये पैसे किस लिए चाहिए. पैसे उधार देने से पहले उससे जुड़ी सभी शर्तों के बारे में बात कर लेना बहुत जरूरी होता है. अपने दोस्त को यह जरूर बताएं कि आपको कितने समय (जैसे, छः या आठ महीने) के भीतर अपना पैसा वापस चाहिए. उसे समझाने की कोशिश करें कि एक बार में पूरा पैसा लौटाना उसके लिए मुश्किल हो सकता है, इसलिए वह हर महीने थोड़े-थोड़े पैसे लौटाकर यह कर्ज उतार सकता है.

एक समझौता करना

एक लिखित समझौता या करार करने पर जोर दें। यदि हो सके तो आप दोनों के बीच एक स्टाम्प पेपर पर एक कानूनी समझौता करने या एक प्रॉमिसरी नोट यानी प्रतिज्ञा पत्र लिखने की कोशिश करें. इस लेनदेन को एक दस्तावेज का रूप देने के लिए और अपने हितों की रक्षा करने के लिए उसमें उधार की रकम, पैसे लौटाने की समय सीमा, पैसे लौटाने की शर्तें और ब्याज (यदि कोई हो) जैसे विवरणों का उल्लेख जरूर करें. आप अपनी-अपनी पत्नी और परिवार के सदस्यों के सामने समझौते की शर्तों पर बात करने का विचार कर सकते हैं, इस तरह वे आपके द्वारा
उसे पैसे उधार दिए जाने का गवाह बन सकते हैं. अब, लेनदेन की सम्पूर्ण पारदर्शिता के बाद, उधार की शर्तों में भी कोई कन्फ्यूजन न रहने दें. इससे आपकी गैर मौजूदगी में, आपकी पत्नी या परिवार के सदस्य इस उधार के बारे में अँधेरे में नहीं रहेंगे और आपकी जगह वे उससे उधार के पैसे लौटाने के लिए सकते हैं.

अपनी हद को समझें

एक दोस्त के द्वारा पैसे मांगे जाने पर आपको उसे मना करने में बुरा लग सकता है. लेकिन यदि आपकी फाइनेंशियल कंडीशन उधार देने की इजाजत नहीं दे रही है तो उसे ‘ना’ कहने में ही भलाई है. आपको एक अच्छा दोस्त बनने की कोशिश में अपनी फाइनेंशियल कंडीशन को खतरे में नहीं डालना चाहिए. यह सुनने में थोड़ा बुरा लग सकता है लेकिन अपनी खुद की फाइनेंशियल कंडीशन को ठीक रखना ज्यादा जरूरी है.

टैक्स का असर

आपको यह पता होना चाहिए कि यदि आपको अपने दोस्त को दिए गए पैसे पर कोई ब्याज मिलता है तो आपको अपनी टैक्स सीमा के आधार पर उस पैसे पर इनकम टैक्स देना पड़ेगा.

विवाद या झगड़ा

आप दोनों के बीच कोई विवाद या झगड़ा हो जाने पर, आप सिर्फ तभी कानूनी मदद ले सकते है जब आप दोनों के बीच एक वैलिड स्टाम्प पेपर पर एक लिखित समझौता किया गया हो या एक प्रॉमिसरी नोट या प्रतिज्ञा पत्र लिखा गया हो जिस पर आप दोनों के उचित हस्ताक्षर होने चाहिए और उसे सही ढंग से नोटराइज्ड किया गया होना चाहिए. पैसे उधार देते समय बेहतर कानूनी बाध्यता की दृष्टि से उसे एक अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से पैसे उधार देने चाहिए.

आप अपने दोस्त को उधार के पैसे को किस्तों में चुकाने के लिए अपने पोस्ट-डेटेड अकाउंट पेयी चेक (आपके नाम से) देने के लिए कह सकते हैं. यदि निर्धारित तारीख को उसका चेक बाउंस हो जाता है तो आप तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं.

एक आखिरी सलाह…

दोस्ती के बीच में पैसे को लाने से आपका रिश्ता खराब हो सकता है, इसलिए या तो इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए या इसे बड़ी सावधानी के साथ हैंडल करना चाहिए. न चाहते हुए भी, कई बार हमारी जिंदगी में इस तरह की समस्याओं से सामना हो ही जाता है. इसलिए पहले से इसकी प्लानिंग करके रखने और अपने जरूरतमंद दोस्त के साथ लेनदेन करने के लिए पहले ही कुछ नियम बनाकर रखने में ही भलाई है. इस तरह की समस्या से निपटने के लिए एक इमरजेंसी फंड तैयार करके रखना कैसा रहेगा?

इसके लेखक बैंकबाज़ार के सीईओ आदिल शेट्टी हैं.

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