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20 जनवरी के बाद से फ्री नहीं रहेंगी ये बैंकिंग सर्विसेज !

अगर आप एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज, मिनिमम बैलैंस चार्ज, लेट फी चार्ज, डिमांड ड्राफ्ट चार्ज औऱ अन्य चार्ज देकर थक चुके हैं, तो अभी परेशान मत होइए, क्योंकि इन सब में जल्दी ही कई और चार्ज जुड़ सकते हैं, जो आपकी परेशानी बढ़ाने वाले हैें।

January 8, 2018 12:07 PM
भारतीय रिजर्व बैंक, देना बैंक, bank, free banking services, rbi, reserve bank of india 20 जनवरी से आने वाले नए चार्ज ग्राहकों का बोझ और बढ़ाएंगे।

अगर आप एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज, मिनिमम बैलैंस चार्ज, लेट फी चार्ज, डिमांड ड्राफ्ट चार्ज औऱ अन्य चार्ज देकर थक चुके हैं, तो अभी परेशान मत होइए, क्योंकि इन सब में जल्दी ही कई और चार्ज जुड़ सकते हैं, जो आपकी परेशानी बढ़ाने वाले हैें। खबरों की माने तो 20 जनवरी से बैंकिंग सर्विसेज औऱ महंगी हो सकती हैं। मंहगी होने का मतलब है, कि अभी तक जो बैंक सर्विसेज फ्री थीं, बैंक उन्हें भी अब मुफ्त ना रखते हुए चार्जेबल बना देगा। खबरों की मानें तो फीस बढ़ाने के इंस्ट्रक्शन बैंकों को मिल चुक हैं। यही नहीं सभी बैंकों के बोर्ड इन सभी इनस्ट्रक्शन के मुताबिक अलग अलग सेवाओं पर चार्ज तय करेंगे।

बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
नए चार्जे लागूं होने के बाद से, पैसा जमा कराते वक्त या फिर अन्य सर्विसेज का इस्तेमाल करते वक्त अलग से पैसा देने की जरुरत नहीं हैष मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक बैंकिंग सर्विसेज यूज करने पर आपके खाते से पैसा कट जाएगा। लिहाजा नए चार्ज लगने से देश भर के बैंक होल्डर इससे प्रभावित होंगे। बैंक ग्राहक पहले ही एटीएम ट्रांजेक्शन, मनी ट्रांस्फर, मिनिमम बैलैंस जैसी चीजों पर पहले से ही कई तकह के चार्जेस दे रहे हैं। लिहाजा 20 जनवरी से आने वाले नए चार्ज ग्राहकों का बोझ और बढ़ाएंगे।

इन सर्विसेज पर लग सकती है फीस
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पैसा निकालने, पैसा जमा कराने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी पता बदलवाने, नेट बैंकिग और चेक बुक आवेदन करने के लिए फीस लग सकती है। इसके अलावा अपने बैंक की किसी और ब्रांच से सर्विसेज इस्तेमाल करने पर भई आपको पैसा देना पड़ सकता है। इस सुविधा को उठाने पर आपको इसके लिए अलग से जीएसटी भी देना होगा।

नेट बैंकिंग में होगा इजाफा
इस तरह के चार्जेस बढ़ने के चलते, ग्राहक इन सबसे बचाव के लिए नेट बैंकिंग का इस्तेमाल ज्यादा कर सकते हैं। खबरों की माने तो चार्जेस को इग्नोर करने के लिए ग्राहक नेट बैंकिग का इस्तेमाल ज्यादा करेंगे। इससे उनपर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम हो सकता है।

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