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बाजार में लग रहा है डर! ‘गारंटेड रिटर्न का चक्कर’ छोड़ चुनें सही प्रोडक्ट, मिलेगा ऊंचा रिटर्न

Right Investment: हम सदी के सबसे बड़े संकट में से एक के दौर से गुजर रहे हैं. लेकिन अभी पैसा लगाने का सही समय है.

October 28, 2020 7:41 AM
Right InvestmentA total of around 2,000 employment avenues have been created in these units, having a production capacity of 2.5 million pair of shoes annually.

Right Investment: हम सदी के सबसे बड़े संकट में से एक के दौर से गुजर रहे हैं. COVID-19 महामारी की पूरी दुनिया में फैलने का सिलसिला जारी है. अगर तक करीब 38 मिलियन लोग संक्रमित हो चुके हैं और वैश्विक स्तर पर 10 लाख से अधिक लोगों की इसके चलते जान गई है. जान माल के अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी कोरोनोवायरस की महामारी का कहर जारी है. दुनिया भर के लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है. बाजार की हाई वोलैटिलिटी तबतक जारी रहने की आशंका है, जब तक कोरोना महामारी मैनेजेबल यानी प्रबंधन योग्य स्तर तक नहीं पहुंच जाती है. हालांकि, अच्छी बात यह है कि शेयर बाजार कारोबार के लिए खुला रहता है और पिछले 8 महीनों में इसमें ऐतिहासिक रूप से नाटकीय बदलाव देखने को मिले हैं.

पैसा लगाने का सही समय

उन लोगों के लिए जो संकट के समय भी किस्मत ने अपनी सैलरी पाते रहे हैं या इनकम बनाए रखा है, उनके लिए अब सावधानी से निवेश करने के लिए एक अच्छा समय हो सकता है. असल में मौजूदा दौर में निवेश को रोकना एक अच्छा कदम नहीं माना जाएगा, क्योंकि निवेश वास्तव में तब ज्यादा प्रभावी हो सकता है, जब बाजार बेहद अनिश्चित होते हैं. घबराहट की वजह से अपने निवेश की रणनीति को प्रभावित नहीं करना चाहिए. यह देखा जाता है कि पोसट कोविड एरा में दुनिया भर के बाजारों ने शानदार रिटर्न दिया है.

गारंटेड रिटर्न वाली स्कीम कितनी बेहतर

ऐसे समय में जब बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत अधिक होता है, ज्यादातर लोग निवेश के उन विकल्पों की तलाश करते हैं जो फिक्स्ड और गारंटेड रिटर्न का वादा करते हैं. गारंटेड रिटर्न के लिए लोगों के बीच सबसे पसंदीदा विकल्प बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट है. हालांकि, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में कुछ ड्रॉ बैक हैं. सबसे पहले, बैंक सावधि जमा की अधिकतम 10 साल की लॉक-इन अवधि होती है, जिसका मतलब है कि आप इसके तहत 10 साल के बाद ही अपने निवेश को रीन्यू कर सकते हैं. यानी आपको तय रिटर्न 10 साल तक मिलेगा, इससे ज्यादा नहीं. दूसरा, पिछले 6 साल में फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दर में भारी गिरावट आई है. 2014 में एफडी पर ब्याज दर 8.5 फीसदी सालाना से गिरकर 2020 में 5.4 फीसदी के आस पास आ गई है. कोई निश्चितता नहीं है कि ब्याज की दर यहां से ऊपर जाएगी या अगले कुछ साल में और गिर जाएगी.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न टैक्स छूट के लिए योग्य नहीं है. ये कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं कि इस तरह के हाई वोलैटिलिटी के माहौल में किसी को ऐसी योजनाओं में निवेश करना चाहिए जो गारंटीशुदा रिटर्न के अलावा निवेश की गई राशि पर आपको सबसे अच्छा ब्याज दे. साथ ही ब्याज से होने वाली कमाई पर भी टैक्स बेनेफिट मिले.

चुने सही प्रोडक्ट

जब कोई ग्राहक गारंटेड नॉन पार्टिसिपेंट प्रोडक्ट में निवेश करता है, तो वह जानता है कि आज वह कितना निवेश कर रहा है, उस पर कितना रिटर्न होगा. जैसे कि अगर 10 साल के लिए प्रति माह 10,000 रुपये नॉन पार्टिसिपेंट प्रोडक्ट में निवेश करते हैं, तो आपको 12वें साल से अगले 25 साल के लिए हर महीने 8950 रुपये रिटर्न मिलेगा. यह कुल मिलाकर 39 लाख रुपये होगा. आपके पास अपनी जरूरतों के अनुसार एकमुश्त निवेश यामंथली इनकम के लिए जाने का विकल्प है. ये योजनाएं अलग-अलग भुगतान शर्तों और पॉलिसी टर्म के साथ आती हैं और अधिकतम आईआरआर का वादा करती हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात, रिटर्न की गारंटी लंबी समय अवधि के लिए है जिसमें अधिकतम समय अवधि 25 साल है. इसका मतलब यह है कि नॉन पार्टिसिपेंट प्रोडक्ट उन लोगों के लिए बेसट हैं, जिनके पास 5 साल से 25 साल तक का निवेश लक्ष्य है. योजना के कुछ फायदों में निवेश की राशि पर 80 सी के तहत टैक्स लाभ और रिटर्न पर 10 (10 डी) के तहत टैक्स लाभ शामिल हैं. यहां तक ​​कि ग्राहकों को एनुअल प्रीमियम के 10 गुना के बराबर लाइफ कवर भी मिलता है.

पॉलिसीबाजार में, ग्राहक नॉन पार्टिसिपेंट पोडक्ट की लिस्ट पा सकते हें. जो कि छोटी अवधि से लेकर लंबी अवधि के लिए अलग-अलग निवेश लक्ष्य वाले ग्राहकों पर बेस्ड होते हैं. इन प्रोडक्ट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि निवेश पर रिटर्न पूरी तरह से टैक्स फ्री है.

पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट के नुकसान

दूसरी ओर, पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट में कई महत्वपूर्ण विशेषताओं का अभाव होता है. ऐसे प्रोडक्ट में आपके निवेश पर गारंटेड रिटर्न बहुत कम है. ग्राहकों को दिया गया बोनस भी कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर है जो बहुत ट्रांसपैरेंट नहीं होता है. आमतौर पर, पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट के तहत दो तरह के पेआउट होते हैं. एक गारंटी राशि जो बहुत कम है और दूसरा बोनस है जो कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. इनमें उत्पाद शुल्क बहुत अधिक है जो लगभग 2.5-3 फीसदी के आसपास आते हैं. ऐसे हाई उत्पाद शुल्क की वजह से एक्चुअल रिटर्न कम हो जाता है. इनमें लंबी अवधि के लिए गारंटी नहीं दी जाती है.

कुछ बेस्ट प्रोडक्ट के उदाहरण

उपभोक्ताओं को नॉन पार्टिसिपेंट प्रोडक्ट की पेशकश करने वाले कुछ प्रमुख बीमा कंपनियों में एचडीएफसी लाइफ के संचय है. इस योजना के तहत, अगर कोई 30 साल का शख्स 15 साल की पॉलिसी अवधि और 10 साल की पे टर्म के साथ 5,000 रुपये प्रति माह का निवेश करता है, तो मेच्योरिटी पर उपभोक्ता को 10.61 लाख रुपये एकमुश्त के रूप में 5.61 फीसदी की आईआरआर पर मिलेगा. इसी तरह, आदित्य बिड़ला कैपिटल के गारंटेड माइलस्टोन प्लान में निवेश करने का विकल्प भी चुन सकते हैं. जिसमें 30 साल के शख्स 20 साल की पॉलिसी अवधि और 10 साल की पे टर्म के साथ 5 हजार रुपसे महीना निवेश कर सकता है. उसे मेच्योरिटी पर 5.51 फीसदी आईआरआर पर 13.94 लाख रुपये मिलेगा.

ऐसे लोगों के लिए भी योजनाएं उपलब्ध हैं जो एकमुश्त लाभ नहीं लेना चाहते हैं और इसके बजाय लंबी अवधि के लिए महीने की आय चाहते हें. ऐसी ही एक योजना है बजाज आलियांज लाइफ की गारंटेड इनकम गोल इनकम. योजना के तहत, जिसमें 30 साल का शख्स 10 साल की पॉलिसी अवधि और 10 साल की पे टर्म के साथ 60 हजार रुपसे सालाना निवेश कर सकता है. उसकी अगले 10 साल तक 76,109 रुपये की एनुअल इनकम होगी. इस योजना के तहत, 10 साल के भुगतान अवधि के बाद सुनिश्चित आय में 5 फीसदी की वृद्धि होती है.

(लेखक: विवेक जैन, इन्वेस्टमेंट, बिजनेस यूनिट हेड, Policybazaar.com)

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