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आपको भी करनी है बैंक FD; इन 4 बातों का जरूर रखें ध्यान, नहीं होगा नुकसान

फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रख लेना ही बेहतर उपाय है.

August 28, 2020 7:50 AM
fixed deposit things to keep in mind before investing in FDफिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रख लेना ही बेहतर उपाय है.

जमा और बचत की बात करें तो बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम बेहद पॉपुलर है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि लोग इसे सुरक्षित मानते हैं और उन्हें तय रिटर्न मिलता है. सबसे अच्छी बात है कि मार्केट लिंक्ड स्कीम नहीं होती है, इसलिए बाजार के उतार चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं होता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि इन्हीं वजहों से एफडी में बिना सोचे समझे निवेश करना बेहतर तरीका है. एफडी के साथ भी कुछ रिस्क फैक्टर जुड़े होते हैं. वहीं कुछ जरूरी बातों को अनदेखा करने पर भी नुकसान हो सकता है. इसलिए फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रख लेना ही बेहतर उपाय है.

एफडी का टेन्योर

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से पहले उसके टेन्योर को तय करना बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर निवेशक मेच्योरिटी से पहले राशि को विद्ड्रॉ करते हैं, तो उन्हें जुर्माने का भुगतान करना होगा. इससे डिपॉजिट पर कमाए जाने वाला कुल ब्याज कम हो सकता है.

ब्याज दर

एफडी में पैसा लगाते समय उस पर मिलने वाली ब्याज दर को भी देखना बहुत जरूरी है. आरबीआई ने इसे लेकर गाइडलाइंस जारी करता है. बैंक इनके द्वारा तय सीमा के अंदर ही ब्याज दर ऑफर कर सकते हैं. इस सीमा के अंगर बैंक अपने मुताबिक अलग-अलग ब्याज दरें पेश कर सकते हैं. इसलिए अलग-अलग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दर में अंतर होता है. एफडी में निवेश करने से पहले इनकी तुलना कर लेनी चाहिए.

बैंक सीनियर सिटीजन को एफडी पर ज्यादा ब्याज दर भी देते हैं. इसलिए अगर आप या आपके परिवार में कोई सीनियर सिटीजन है, तो उसे एफडी में निवेश करने पर अतिरिक्त फायदा मिलेगा.

टैक्स

आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट पर होने वाली ब्याज आय पर इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है. अगर एफडी पर कमाया गया ब्याज एक वित्तीय वर्ष में 10 हजार रुपये से ऊपर होता है, तो उस ब्याज पर TDS डिडक्शन होता है. यह कुल कमाई गई ब्याज का 10 फीसदी होगा. हालांकि, अगर आपकी आय टैक्सेबल रेंज से कम है, तो आप एफडी पर टीडीएस डिडक्शन नहीं होने देने के लिए बैंक को फॉर्म 15G और फॉर्म 15H सब्मिट कर सकते हैं.

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ब्याज का विद्ड्रॉल

बैंक में पहले तिमाही और सालाना आधार पर ब्याज का विद्ड्रॉल करने का ऑप्शन था, अब कुछ बैंक में मासिक विद्ड्रॉल भी कर सकते हैं.

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