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FY20: अप्रैल से ही शुरू कर दें फाइनेंशियल प्लानिंग, ये 5 टिप्स आसान करेंगे कमाने-बचाने की राह

अप्रैल से ही नए वित्त वर्ष की शुरुआत होती है और इस माह में वित्तीय मोर्चे पर लिए गए कुछ फैसले आपको पूरे वित्त वर्ष फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग और तनावमुक्त रख सकते हैं.

April 3, 2019 8:50 AM

Start April Strongly. Here Are 5 Simple Financial Steps To Take Now!

Financial Planning for FY20: साल का अप्रैल महीना वित्तीय लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है. अप्रैल से ही नए वित्त वर्ष की शुरुआत होती है और इस माह में वित्तीय मोर्चे पर लिए गए कुछ फैसले आपको पूरे वित्त वर्ष फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग और तनावमुक्त रख सकते हैं. अच्छी सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट पर अच्छा रिटर्न, आखिरी वक्त पर टैक्स सेविंग के झंझट से मुक्ति पाने के लिए जरूरी है कि पूरे ​वित्त वर्ष के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल से ही कर ली जाए. इस दिशा में ये 5 कदम मदगार साबित होंगे…

खर्चों और बजट का लगाएं हिसाब

सबसे पहले साल में होने वाली अपनी आय का एक अनुमान लगाएं. इसके बाद साल के लिए अपने वरीयता वाले खर्चों जैसे— घर का किराया, इंश्योरेंस, ईएमआई, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, हेल्थकेयर, न्यूट्रीशन, यूटिलिटीज आदि का हिसाब लगाएं. साथ ही कुछ सेकेंडरी खर्चों जैसे बाहर खाना, घूमना आदि पर भी नजर डालें. इसके बाद वरीयता वाले खर्चों के लिए पर्याप्त बजट तय करें, अन्य खर्चों में कटौती के तरीके खोजें और सेविंग्स व इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की कोशिश करें.

इसके अलावा अगर आपके इस वित्त वर्ष में कुछ लक्ष्य हैं, जैसे— कार खरीदना, ​छुट्टियों में विदेश जाना या रिटायरमेंट प्लान करना तो इनके बारे में भी पहले से ही सोचते हुए चलें. पहले से लक्ष्य निर्धारित करना सही रहता है और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्लानिंग करने का एकदम सही वक्त वित्त वर्ष की शुरुआत होता है.

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अभी से बना लें टैक्स प्लान

अक्सर लोग पूरे वित्त वर्ष टैक्स प्लानिंग नहीं करते हैं और फिर आखिर के महीनों में जल्दबाजी में कदम उठाते हैं. जबकि इसके लिए सही वक्त अप्रैल होता है. टैक्स प्लानिंग आपके फाइनेंसेज का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए इसे वित्त वर्ष के आखिर के लिए नहीं छोड़ना चाहिए. अगर अभी से अच्छे से सोच-समझकर टैक्स प्लानिंग कर ली जाए तो आप इन्वेस्टमेंट्स पर बेहतर रिटर्न पा सकते हैं, अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर हेल्थ और लाइफ कवरेज सुनिश्चित कर सकते हैं और साथ ही आखिरी वक्त की टेंशन से भी बच सकते हैं.

हर माह करें सेव व इन्वेस्ट

टैक्स प्लानिंग की तरह इन्वेस्टमेंट्स और सेविंग्स को भी साल के आखिर में करने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए. इन्हें मंथली करना चाहिए. इससे आपके द्वारा किया जाने वाला इन्वेस्टमेंट पूरे साल में बंट जाएगा और आप मार्च नजदीक आने पर इन्वेस्टमेंट के लिए एकमुश्त रकम का इंतजाम करने की टेंशन से बच जाएंगे.

उदाहरण के तौर पर टैक्स बचाने के लिए मार्च के आस-पास 1.5 लाख रुपये इन्वेस्ट करने के बजाय हर माह 12500 रुपये इन्वेस्ट किए जा सकते हैं. इसके लिए ईएलएसएस म्यूचुअल फंड या पीपीएफ या ई-एनपीएस को जरिया बना सकते हैं.

अगर आपका पहले से ही इन्वेस्टमेंट चल रहा है तो सैलरी में बढ़ोत्तरी के हिसाब से इसे बढ़ाने की कोशिश करें. मान लीजिए आपकी सैलरी साल में 10 फीसदी बढ़ी तो आपको इन्वेस्टमेंट में भी 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी करनी चाहिए. इससे संपत्ति बनाने का लक्ष्य पूरा करने में तेजी आएगी.

इस सबके अलावा अपने इमर्जेन्सी फंड पर भी नजर रखें और इसे भी एक उचित हिसाब से बढ़ाते जाएं. इमर्जेन्सी फंड में कम से कम 3-6 महीने की इनकम के बराबर अमाउंट होना चाहिए और इसे केवल इमर्जेन्सी में ही छेड़ा जाना चाहिए.

इंश्योरेंस कवरेज बढ़ाने पर भी रहे ध्यान

वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने मौजूदा इंश्योरेंस कवरेज का भी जायजा लें. अगर आपका या आपके परिवार में से किसी का हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है तो बिना वक्त गंवाए इसे लें. अगर आप किसी पर निर्भर हैं और आपका टर्म इंश्योरेंस नहीं है तो पॉलिसी लेकर लॉन्ग टर्म में आप पर निर्भर लोगों की इनकम जरूरतों को सिक्योर करें.

अगर आपने इंश्योरेंस ले रखा है तो तो अपने कवरेज को बढ़ाने की जरूरत का आकलन करें और अगर वाकई इसे बढ़ाने की जरूरत है तो ऐसा अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल और इनकम जरूरतों के हिसाब से करें. उदाहरण के तौर पर आपका बेसिक टर्म प्लान कवर 50 लाख रुपये का है और हाल ही में आप मां या पिता बने हैं तो अब आपको इस कवर को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक करने के बारे में सोचना चाहिए. ताकि आप अपने परिवार को हायर प्रोटेक्शन दे सकें. इसी तरह अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी 5 लाख रुपये की है तो आप एक अन्य 10 लाख रुपये की पॉलिसी लेने के बारे में सोच सकते हैं.

कर्ज का वरीयता के आधार पर करें पेमेंट

आखिर में जायजा लें अपने मौजूदा कर्जों का. हो सकता है आप पर एक कर्ज हो या फिर एक से ज्यादा हों, जैसे होम लोन और कार लोन, क्रेडिट कार्ड लोन. ऐसे में सबसे पहले यह तय करें कि कौन सा कर्ज पहले चुकाया जाना जरूरी है. इससे आप कर्ज के बोझ से जल्द आजाद भी होंगे और ब्याज के मोर्चे पर बचत भी कर पाएंगे.

अगर कोई मजबूरी या संकट नहीं है तो आपको वरीयता क्रम में सबसे पहले सबसे ज्यादा या यूं कहें सबसे महंगे लोन को चुकाया जाना टॉप पर रखना चाहिए. आम तौर पर यह क्रेडिट कार्ड लोन हो सकता है, जहां सालाना ब्याज दर 50-60 फीसदी तक उच्च हो सकती है.

वहीं अगर होम लोन चल रहा है तो इसकी सालाना ब्याज दर लगभग 9 फीसदी होगी, इसलिए इसे बाद में रखें. सबसे महंगे लोन को चुकाने के बाद दूसरे सबसे महंगे लोन को चुकाने पर फोकस करें.

– आदिल शेट्टी, CEO, bankbazaar.com

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