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FD तुड़वाए बिना भी निकाल सकते हैं पैसे, जरूरत भी पूरी हो जाएगी और पेनल्टी भी नहीं लगेगी

एफडी के ऐसे विकल्प की तलाश करनी चाहिए जिसमें आपको लिक्विडिटी भी मिले.

April 8, 2019 8:05 AM
एफडी में निवेश का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें निवेश की गई पूंजी सुरक्षित रहती है.

कुछ निवेशक अपनी कमाई को निवेश के लिए सुरक्षित विकल्पों की तलाश में रहते हैं. हालांकि ऐसे विकल्पों में निवेश पर रिटर्न कम मिलता है लेकिन पूंजी डूबने का खतरा न के बराबर होता है. इस प्रकार के कंजर्वेटिव निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना बेहतर समझते हैं. एफडी में निवेश का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें निवेश की गई पूंजी सुरक्षित रहती है. एफडी निवेश 7 दिन से लेकर 10 साल तक की मेच्योरिटी पीरियड के साथ आता है और इसमें निवेश पर एक फिक्स्ड दर पर ब्याज मिलता है.

इस निवेश के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें मेच्योरिटी के पहले निवेश की मंजूरी नहीं होती है या प्री-मेच्योरिटी से पहले निकासी पर जुर्माना लगाया जाता है. हालांकि पैसे की जरूरत कभी भी पड़ सकती है, इसलिए एफडी के ऐसे विकल्प की तलाश करनी चाहिए जिसमें आपको लिक्विडिटी भी मिले. आइए जानते हैं कि ऐसे कौन-कौन से तरीके हैं जिससे आपको एफडी पर लिक्विडिटी मिलेगी और आप जरूरत पड़ने पर निकासी कर सकें.

FD में लिक्विड निवेश के तरीके

1. स्वीप-इन एकाउंट

लंबे समय के लिए एफडी में निवेश करने पर आप एकाएक जरूरत पड़ने पर नकदी की समस्या से जूझ सकते हैं. जिन्हें कभी भी कैश की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें स्वीप-इन फिक्स्ड डिपॉजिट की सुविधा का लाभ उठाना चाहिए. इस प्रकार के एफडी में निवेशकों को एफडी के इंटेरेस्ट रेट के अलावा सेविंग एकाउंट जैसी लिक्विडिटी का फायदा एक साथ मिलता है. इस प्रकार के खाते में निवेश को मेच्योरिटी से पहले निकासी करने पर कोई पेनाल्टी नहीं देनी पड़ती है और ब्याज दर भी रेगुलर एफडी के समान मिलता है.

इस विकल्प का चयन करने पर आपको एक लिमिट तय करनी होती है, उससे अधिक की राशि आपके सेविंग एकाउंट पर होने पर अधिक राशि की ऑटोमैटिक एफडी हो जाती है. हालांकि जो लिमिट आपने तय की हुई है, अगर उससे कम राशि आपके बचत खाते में है तो उस सीमा तक पैसे बनाने के लिए एफडी से पैसे वापस बचत खाते में आ जाएंगे. इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने सेविंग खाते में तय सीमा से अधिक पैसे रखें.

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2. लैडरिंग

अपनी पूंजी के लैडरिंग तरीके से निवेश का अर्थ है कि आप अपनी पूंजी को सिर्फ एक ही पीरियड के एफडी में निवेश न करिए. इसकी बजाय पूरी पूंजी को हिस्सों में बांटकर कई मेच्योरिटी पीरियड में निवेश करें.

3. FD गिरवी रख लोन लेना

जरूरत पड़ने पर आप अपनी एफडी पर लोन भी ले सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी नकदी जरूरत पूरी हो जाएगी और इस पर आपको सामान्यतः पर्सनल लोन की तुलना में ब्याज भी कम देना होगा. इस प्रकार के लोन पर ब्याज दर बैंक पर निर्भर करती है लेकिन यह एफडी के इंटेरेस्ट रेट से करीब 1-2 फीसदी अधिक होती है. इस तरीके के जरिए आप अपनी एफडी के 90 फीसदी के बराबर राशि लोन के तौर पर ले सकते हैं.

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