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लाइफ इंश्योरेंस के बदले में लोन लेने से पहले जान ले यें जरूरी बातें, वरना हो सकता है नुकसान

जब आप कुछ समय के लिए आर्थिक संकट में होते हैं तब आप उस संकट से बाहर निकलने के लिए पर्सनल लोन का सहारा लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसके लिए आपको पर्सनल लोन पर बहुत ज्यादा ब्याज देना पड़ता है और उसे चुकाने की अवधि भी बहुत कम होती है।

February 26, 2018 2:53 PM
लाइफ इंश्योरेंश, एलआईसी, प्रीमियम, लोन, बैंक लोनआपको यह पता होना चाहिए कि सिर्फ एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेने से आप उसके बदले में लोन पाने के योग्य नहीं बन जाते हैं।

जब आप कुछ समय के लिए आर्थिक संकट में होते हैं तब आप उस संकट से बाहर निकलने के लिए पर्सनल लोन का सहारा लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसके लिए आपको पर्सनल लोन पर बहुत ज्यादा ब्याज देना पड़ता है और उसे चुकाने की अवधि भी बहुत कम होती है। ऐसी परिस्थिति में, इस संकट से छुटकारा पाने के लिए आप अन्य विकल्प ढूंढते हैं। इनमें से एक विकल्प है – लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले में लोन लेना जिसे आपने अपने आपको और अपने परिवार को सुरक्षित करने के लिए लिया है।

यह एक आसान विकल्प लगता है क्योंकि आपको एक पॉलिसी के बदले में एक लोन मिल जाता है जिस पर आप नियमित रूप से प्रीमियम दे रहे होते हैं। इसके अलावा, एक पर्सनल लोन लेने की तुलना में इस तरह लोन लेने पर लोन प्रोसेसिंग चार्ज, लोन पर लगने वाले ब्याज की दरें, लाइफ इंश्योरेंस के बदले में लोन लेने के लिए जरूरी दस्तावेज इन सबकी जरूरत बहुत कम पड़ती है और इसमें कोई परेशानी भी नहीं होती है। लेकिन, आपको इसके फायदे-नुकसान के बारे में अच्छी तरह जाने बिना या इनकी जाँच किए बिना लाइफ इंश्योरेंस के बदले में लोन नहीं लेना चाहिए। लाइफ इंश्योरेंस के बदले में लोन लेने से पहले कुछ ख़ास बातें ध्यान में रखनी चाहिए जिनके बारे में यहाँ नीचे बताया गया है।

सरेंडर वैल्यू

यदि आपने 10 लाख रुपये का एक लाइफ इंश्योरेंस लिया है तो आपको 10 लाख रुपये का लोन नहीं मिल पाएगा। असल में, लोन की रकम, पॉलिसी के सरेंडर वैल्यू पर निर्भर करती है। सरेंडर वैल्यू, उस पॉलिसी का उस समय का मौजूदा मूल्य होता है जिस समय आप अपनी इच्छा से उस पॉलिसी को समाप्त करते हैं। अधिकांश मामलों में, आपको सरेंडर वैल्यू का लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक ही लोन मिल पाएगा। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये की एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, और आप उस पॉलिसी के बदले में लोन लेना चाहते हैं। यदि उस समय सरेंडर वैल्यू 5 लाख रुपये है तो आपको सिर्फ 4 से 4.5 लाख रुपये तक का ही लोन मिल पाएगा।

सभी पॉलिसियों पर लोन नहीं मिलता है

हम सोचते हैं कि सभी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लोन मिल जाएगा। लेकिन ये सच नहीं है। आईआरडीए के दिशानिर्देशों के अनुसार, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसियों और टर्म इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लोन नहीं दिया जा सकता है। लेकिन एंडोमेंट और मनी-बैक जैसी ट्रेडिशनल इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लोन मिल सकता है। इसलिए, यह देखना जरूरी है कि आपने किस तरह की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है और उसके बदले में आपको लोन मिल सकता है या नहीं।

तीन साल की प्रतीक्षा अवधि

आपको यह पता होना चाहिए कि सिर्फ एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेने से आप उसके बदले में लोन पाने के योग्य नहीं बन जाते हैं। अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले में लोन लेने योग्य बनने से पहले आपको तीन साल इंतजार करना पड़ता है। इस तीन साल की प्रतीक्षा अवधि के दौरान आपका प्रीमियम छूटना नहीं चाहिए। इसके अलावा, आपको लोन की अवधि के दौरान प्रीमियम देना चालू रखना चाहिए।

इसे चुकाने का तरीका क्या है

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले में लोन लेने का एक फायदा यह है कि आपको उस लोन को चुकाने के लिए पूरा समय मिलता है यानी आप उस पॉलिसी की अवधि तक लोन चुका सकते हैं। आप उस लोन को कैसे चुकाना चाहते हैं इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। आप या तो नियमित रूप से ब्याज चुकाते रह सकते हैं या मूलधन की रकम वापस कर सकते हैं। जब पॉलिसी की अवधि समाप्त हो जाती है तब लोन की बकाया रकम को, क्लेम सेटलमेंट की पूरी रकम के साथ एडजस्ट कर दिया जाएगा। इसलिए, यह इंश्योरेंस कंपनी और पॉलिसी धारक, दोनों के लिए सुविधाजनक है।

प्रीमियम न भरने और लोन न चुकाने पर क्या होगा

ऐसी परिस्थिति में, आपकी पॉलिसी, लैप्स यानी कालातीत हो जाएगी और इंश्योरेंस कंपनी को आपकी पॉलिसी के सरेंडर वैल्यू से बकाया रकम वसूलने का अधिकार मिल जाता है। यदि ऐसा होता है तो आपकी अल्पकालिक आर्थिक जरूरतें पूरी होने के बावजूद, अपने आपको और अपने परिवार को सुरक्षित करने के लिए एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का उद्देश्य नष्ट हो जाता है। इसलिए, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले में लोन लेने से पहले अपने सभी विकल्पों पर अच्छी तरह ध्यान देना जरूरी है।

हमेशा याद रखें कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले में लोन लेना, एक दोधारी तलवार की तरह है। हालाँकि इसमें आपको आसानी से लोन मिल जाता है, लेकिन आपको अपनी पॉलिसी को एक्टिव रखने के लिए उसका प्रीमियम भरने या लोन की रकम या उसका ब्याज चुकाने से चूकना नहीं चाहिए। इसलिए, सोच-समझकर फैसला लें।

(इस लेख के लेखक आदिल शेट्टी , बैंक बाज़ार के सीईओ हैं।)

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