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International Mutual Fund में पैसे लगाने का है इरादा? निवेश से पहले इन 4 बातों पर कर लें विचार

International Mutual Fund: इंटरनेशनल फंड में निवेश से पहले उनसे जुड़े जोखिमों और रिटर्न को प्रभावित करने वाली बातों को अच्छी तरह समझना जरूरी है.

Updated: Sep 10, 2021 2:19 PM
factors to consider before investing in International Mutual Fund know here in details feature and typeअब निवेशकों के पास देश से बाहर भी निवेश के विकल्प मौजूद हैं और इसका आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है. (Image- Pixabay)

International Mutual Fund: निवेश का एक बेसिक फंडा ये है कि अपनी पूंजी को एक से अधिक विकल्पों में निवेश किया जाए. अब निवेशकों के पास देश से बाहर भी निवेश के विकल्प मौजूद हैं और इसका आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है. इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड के जरिए विदेशी कंपनियों में निवेश किया जा सकता है. इसमें निवेश का सबसे बड़ी फायदा डाइवर्सिफिकेशन को लेकर है. अगर आप सिर्फ भारतीय स्टॉक में निवेश कर रहे हैं तो भारतीय मार्केट के प्रदर्शन का रिटर्न पर असर पड़ सकता है लेकिन अगर इंटरनेशनल फंड में निवेश के जरिए आप दूसरे देश की बढ़ती हुई इकोनॉमी की फायदा उठा सकते हैं. हालांकि इसमें निवेश से पहले कुछ बातों पर विचार करना बहुत जरूरी है जैसे कि निवेश को लेकर क्या रिस्क है और इससे मिलने वाले रिटर्न पर किन बातों का प्रभाव पड़ता है.

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निवेश से पहले इन बातों पर कर लें विचार

  • रिस्क: विदेशों में निवेश पर बहुत रिस्क जुड़े हैं जिसमें करेंसी रिस्क बहुत अहम है. जैसे कि आप इस फंड के जरिए अमेरिकी कंपनियों में निवेश करते हैं और अगर डॉलर की तुलना में रुपया गिरता है तो एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) बढ़ेगी और इसके विपरती रुपया मजबूत हुआ तो एनएवी में फिसलन होगी.
  • मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स: आपने जिस फंड में निवेश किया है, उसका प्रदर्शन उस देश की राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक स्थिति पर निर्भर करता है. ऐसे में निवेश से पहले फंड का पैसा जिस देश की कंपनियों में निवेश किया जाएगा, वहां की स्थिति पर पूरी नजर बनाए रखें.
  • कई इकोनॉमी का फायदा: इंटरनेशनल फंड के जरिए कई बढ़ती हुई इकोनॉमी में निवेश का फायदा मिलता है. इसके जरिए अपने पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से डाइवर्सिफाई करने में मदद मिलता है.
  • टैक्स: आमतौर पर इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड का पैसा मुख्य रूप से विदेशी कंपनियों की इक्विटी या इक्विटी से जुड़े इंस्ट्र्मेंट्स में निवेश किया जाता है. हालांकि घरेलू इक्विटी में निवेश न होने के चलते इन्हें इक्विटी फंड नहीं माना जाता है. ऐसे में टैक्स के लिहाज से इसे डेट फंड के तौर पर माना जाता है और डेट फंड पर जिस तरह से एलटीसीजी और एसटीसीजी पर टैक्स लगता है, वैसे ही यहां भी लगेगा. डेट फंड पर 36 महीनों से कम होल्डिंग पर एसटीसीजी होता है और इस पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है जबकि 36 महीनों से अधिक की होल्डिंग पर एलटीसीजी होता है और इस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी की दर से टैक्स लगता है.

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International Funds के प्रकार

  • वैश्विक फंड्स: इंटरनेशनल फंड और ग्लोबल फंड नाम से भले ही एक जैसे लग रहे हैं लेकिन दोनों में बहुत अंतर है.ग्लोबल फंड में निवेश की कई पूंजी को दुनिया भर की कंपनियों में निवेश किया जाता है, यहां तक कि जिस देश में निवेशक है, उस देश की कंपनियों में भी. इसके विपरीत इंटरनेशनल फंड का पैसा निवेशक के देश को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों में निवेश किया जाता है.
  • क्षेत्रीय फंड: इस फंड का पैसा दुनिया के किसी खास हिस्से में स्थित देशों की कंपनियों में निवेश किया जाता है.
  • राष्ट्रीय फंड: इस फंड का पैसा सिर्फ एक देश की कंपनी में निवेश किया जाता है. इससे निवेशकों को एक ही देश में मौजूद कंपनियों में निवेश कर वहां की बढ़ती इकोनॉमी का फायदा मिलता है.
  • ग्लोबल सेक्टर फंड्स: इस फंड का पैसा किसी एक खास सेक्टर में मौजूद दुनिया भर की कंपनियों में निवेश किया जाता है.
    (इनपुट: ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म ग्रो और टैक्स प्लेटफॉर्मं क्लियरटैक्स)

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