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निवेशक नए हों या पुराने, फाइनेंशियल पोर्टफोलियो बनाते समय जरूर ध्यान रखें ये 5 बातें

Investment Tips: वित्तीय सलाहकार प्रत्येक एसेट क्लास के रिस्क रिटर्न प्रोफाइल और निवेशक के लक्ष्य व रिस्क लेने की क्षमता को ध्यान में रखते हैं.

March 18, 2021 1:02 PM
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जब भी कोई निवेशक अपना फाइनेंशियल पोर्टफोलियो बनाने की बात करता है, तब फाइनेंशियल एक्सपर्ट और मार्केट एक्सपर्ट हमेशा रिस्क को कम रखने की सलाह देते हैं. निवेशक पुराने हों या नए, लोग निवेश करने के लिए सबसे बेहतर विकल्प को लेकर असमंजस में रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हर निवेश विकल्प का एक अलग रिस्क रिटर्न प्रोफाइल है. ऐसे में निवेश को लेकर पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन एक अनिवार्य पहलू है. आमतौर पर वित्तीय सलाहकार हरेक एसेट क्लास के रिस्क रिटर्न प्रोफाइल और निवेशक के लक्ष्य और रिस्क लेने की क्षमता को ध्यान में रखते हैं. निवेशक के रिस्क प्रोफाइल के आधार पर वित्तीय सलाहकार कम जोखिम में अधिक रिटर्न के उद्देश्य से एक असेट अलोकेशन स्ट्रैटेजी की सलाह देते हैं. ऐसे में जरूरी है कि निवेश अपना फाइनेंशियल पोर्टफोलियो बनाते समय कुछ अहम बातों को ध्यान में रखे, जिससे कि निवेश के लक्ष्य को हासिल किया जा सकते है. आइए जानते हैं 5 अहम बातें….

घरेलू इक्विटी में निवेश करना

घरेलू इक्विटी एक फाइनेंशियल असेट है, जिससे अमूमन हम सभी वाकिफ रहते हैं. क्योंकि शेयर बाजार सूचकांक और उन पर लिस्टेड कंपनियों की कारोबारी और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी न्यूज पब्लिकेशंस के जरिए मिलती रहती हैं. आमतौर पर निवेशक ट्रेडिंग आवर्स में शेयरों को खरीद-बिक्री के लिए डायरेक्ट इक्विटी को चुनते हैं. इसी तरह, म्यूचुअल फंड के माध्यम से भी निवेश किया जा सकता है, जो लंबी अवधि में रिटर्न प्रदान करता है. म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना आमतौर पर एक सुरक्षित दांव माना जाता है क्योंकि दिए गए सीधे इक्विटी की तुलना में यह माना जाता है कि फंड आमतौर पर 25-50 शेयरों की एक टोकरी में निवेश करते हैं जो जोखिम को कम करते हैं. साथ ही फंड का प्रबंधन एक पेशेवर फंड मैनेजर करता है.

फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज

ऐसे निवेशक जो ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों में निवेश नहीं करना चाहते हैं, उनके लिए निश्चित आय का विकल्प बेहतर साबित हो सकता है. फिक्स्ड ब्याज दरें इक्विटी की तुलना में अधिक अनुमानित रिटर्न सुनिश्चित करती हैं. निश्चित आय वाले निवेशकों के पास सरकार और कॉरपोरेट बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट, फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड आदि चुनने के लिए कई विकल्प हैं. कॉरपोरेट बॉन्ड के मामले में, सुरक्षित बॉन्डहोल्डर्स को अन्य शेयरधारकों के मुकाबले कंपनी के बैंकरप्ट होने पर पहले भुगतान करना होता है. सरकारी बॉन्ड के माध्यम से निवेश में विविधता लाना फायदेमंद और विश्वसनीय हो सकता है, क्योंकि उनकी सॉवरेट गारंटी होती हैं और डिफॉल्ट रूप से जोखिम लगभग नकारात्मक होता है.

अनिश्चितता में सोने का निवेश

सुरक्षित एसेट क्लास के रूप में सोना हमेशा भारतीय निवेशकों को आकर्षित करता रहा है. सोना खरीदने की पुरानी परंपरा आज भी जारी है. कई परिवार पीढ़ियों से सोने की संपत्ति को बनाए रखते हैं. दिलचस्प है कि समय के साथ कीमती धातुओं में निवेश के विकल्प बढ़ गए हैं. अब हमारे पास गोल्ड बांड के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ, सोने के सिक्के, बार, आदि में निवेश का विकल्प है. गोल्ड ईटीएफ का अब डिजिटल पेमेंट गेटवे पर भी कारोबार किया जा रहा है और वे शुद्धता का वही मूल्य रखते हैं जो सोने का शुद्ध रूप है. इसके अलावा, शुरुआत के लिए सोने के एक ग्राम से भी कम का व्यापार कर सकते हैं. सोना महंगाई के खिलाफ एक सेफ्टी के रूप में कार्य करता है और वैश्विक आर्थिक संकट या वर्तमान कोविड-19 महामारी जैसी आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में एक विकल्प माना जाता है.

अंतरराष्ट्रीय इक्विटी में निवेश

यह सामान्य ज्ञान है कि अमेरिका में नैस्डैक 100, एनवायएसई, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज आदि जैसे सूचकांकों डायवर्सिफिकेशन का अवसर रहता है. साथ ही साथ भारतीय सूचकांकों की तुलना में समान या बेहतर रिटर्न प्रदान करते हैं. उदाहरण के लिए, यदि हम डाउ जोन्स और बीएसई सेंसेक्स की तुलना 2010 से 2020 तक की अवधि में करते हैं, तो डाउ जोन्स ने 196% का रिटर्न दिया, जबकि बीएसई सेंसेक्स ने इस अवधि में 150% का रिटर्न दिया. हालांकि, आम तौर पर औसत भारतीय निवेशक के लिए पहुंच से बाहर टॉप शेयरों के बारे में सवाल उठते रहे हैं. ऐसी स्थिति में रिटेल निवेशकों के लिए भी फ्रेक्शनल ट्रेडिंग एक विकल्प है, जिसमें, एक निवेशक एक शेयर के कुछ हिस्से का मालिक हो सकता है. आरबीआई की ओर से निर्धारित $250,000 की ऊपरी सीमा के साथ 1 डॉलर और उससे अधिक निवेश करके वह यह कर सकता है.

सुरक्षित भविष्य के लिए बीमा जरूरी

वित्तीय पोर्टफोलियो के प्रबंधन की जब भी बात होती है उसमें बीमा में निवेश करना सबसे सुरक्षित दांव में से एक है. किसी भी अप्रिय घटना या जान के लिए खतरा होने वाले स्वास्थ्य रोगों से सुरक्षित रूप से निपटा जा सकता है, क्योंकि बीमा लोगों को उच्च चिकित्सा खर्चों से बचाता है. टैक्स के संदर्भ में भी बीमा में निवेश एक वरदान हो सकता है, क्योंकि उनसे होने वाले लाभ पर टैक्स नहीं लगता है. बीमा या स्वास्थ्य बीमा, दीर्घकाल में व्यक्ति और उसके परिवार दोनों के लिए मददगार होता है, क्योंकि आजीविका के लिए इसे पूरा किया जाता है. इसके अलावा, विभिन्न इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर की ओर से कई योजनाएं पेश की जाती हैं, और समय के साथ काम करने वाले पेशेवरों के लिए मासिक प्रीमियम अक्सर सस्ता होता है.

(लेख: ज्योति रॉय- डीवीपी- इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट, एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड)

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