इस धनतेरस गोल्ड खरीदने का है प्लान! जानें कैसे कैलकुलेट होता है टैक्स

गोल्ड खरीदारी की एक वजह यह भी है कि संजने-सवरने के साथ-साथ यह बुरे वक्त में वित्तीय सहयोग में काम भी आता है.

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Image: Reuters

Gold Shopping and Investment: त्योहारों और शादियों के सीजन में गोल्ड ज्‍वैलरी के लिए लोगों में खासा क्रेज दिखता है. वहीं अब तो दिवाली आ गई, ऐसे में ​धनतेरस (dhanteras 2019) पर गोल्ड शॉपिंग अच्छी मानी जाती है. गोल्ड खरीदारी की एक वजह यह भी है कि संजने-सवरने के साथ-साथ यह बुरे वक्त में वित्तीय सहयोग में काम भी आता है. गोल्ड खरीदारी से पहले यह जान लेना जरूरी है कि सोने में निवेश टैक्स के दायरे में आता है. टैक्स इसकी खरीदारी के अलावा बिक्री पर भी लगता है. इस पर टैक्स की दर और देनदारी कैसे तय होती है, आइए जानते हैं…

गोल्‍ड ज्‍वैलरी खरीदने और बेचने दोनों टाइम पर टैक्‍स देना होता है. आप गोल्‍ड ज्‍वैलरी को कैश के जरिए और डेबिट, क्रेडिट या नेट बैंकिंग के जरिए भी खरीद सकते हैं. GST लागू होने से पहले गोल्‍ड ज्‍वैलरी की खरीदारी पर राज्‍यों के आधार पर टैक्‍स लगता था, जो कि 1 से लेकर 2 फीसदी तक था. GST लागू होने के बाद गोल्‍ड ज्‍वैलरी पर 3 फीसदी टैक्‍स है, जिसमें मेकिंग चार्ज भी सम्मिलित है.

ज्वैलरी बेचने पर टैक्‍स

जब कस्टमर ज्वैलरी बेचता है तो टैक्स इस बिक्री से हुई आय पर लगता है. ​इस लेन-देन का ब्यौरा उसे सालाना इनकम टैक्स रिटर्न में देना होता है और तभी टैक्स भरना होता है. गोल्‍ड ज्‍वैलरी बेचने पर आपको ज्‍वैलरी रखने की अवधि के आधार पर टैक्‍स देना होता है. यह टैक्‍स शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्‍स या लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स के आधार पर लगाया जाता है.

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन

अगर आप गोल्‍ड ज्‍वैलरी खरीदने के तीन साल पूरे होने से पहले ही इसे बेचते हैं तो इस बिक्री से आपको मिली राशि को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्‍स में रखा जाएगा. इस लाभ को आपकी ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ा जाएगा और उस पर आपके इनकम टैक्‍स स्‍लैब के मुताबिक टैक्‍स लगेगा.

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लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन

अगर आप गोल्‍ड ज्‍वैलरी खरीदने के तीन साल बाद उसे बेचते हैं तो उससे मिली राशि को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स में रखा जाएगा. ज्‍वैलर द्वारा जिस कीमत पर ज्‍वैलरी खरीदी गई है, उस पर इंडेक्‍सेशन बेनिफिट लगाने के बाद इस बिक्री पर टैक्‍स लगता है. इसमें सेस भी सम्मिलित होता है.

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