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आपको कौन-सा रिटर्न फॉर्म भरना है? इस बार नए ITR फॉर्म्स में देनी हैं नई जानकारियां

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) भरने के लिए नए फॉर्म जारी कर दिए गए हैं.

April 14, 2019 7:52 AM
details you have to give in new itr formsImage: Reuters

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) भरने के लिए नए फॉर्म जारी कर दिए गए हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल टैक्सपेयर्स से रिटर्न फॉर्म में ज्यादा जानकारी मांगी गई है. इन जानकारियों में टैक्सपेयर्स के भारत में निवास के दिनों की संख्या, अनलिस्टेड शेयरों की होल्डिंग और TDS होने पर किराएदार का पैन जैसी नई जानकारियां मांगी गई हैं. आइए जानते हैं कि किस रिटर्न फॉर्म के तहत कौन सी नई जानकारियों को शामिल किया गया है…

ITR-1 में मांगी गईं नई जानकारियां

आयकर विभाग के मुताबिक, यह फॉर्म सिर्फ उन्हीं नागरिकों पर लागू होगा, जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और जो वेतन, मकान या ब्याज के जरिए कमाई कर रहे हैं. ऐसे नागरिक एक पेज का ITR-1 सहज फॉर्म भरकर एसेसमेंट ईयर 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. करदाताओं को इस फॉर्म में वेतन से आय के साथ कर योग्य भत्ते, अतिरिक्त सुविधाओं का भी ब्योरा देना होगा. उन्हें मकान से आमदनी के बारे में यह बताना होगा कि उन्हें कितना किराया मिला और उन्होंने इस पर स्थानीय निगम आदि को कितना टैक्स चुकाया.

CBDT द्वारा जारी किए गए फॉर्म के मुताबिक, ITR-1 स्टैंडर्ड डिडक्शन के विकल्प के साथ आता है. आईटीआर फाइल करते समय वित्त वर्ष 2018-19 में आप सैलरी स्टैंडर्ड डिडक्शन के लिए अधिकतम 40,000 रुपये का दावा कर सकते हो. अगर आपके पास घर है तो आपको आईटीआर-1 में यह बताना होगा कि इस घर के मालिक आप स्वयं हैं या फिर आपने इसे बेच दिया है. आपको इस वित्त वर्ष में अन्य माध्यमों से होने वाली आय के बारे में भी विस्तृत जानकारी देनी होगी. बता दें कि इससे पहले आपको सिर्फ अन्य स्रोतों से होने वाली इनकम ही बतानी होती थी. आमतौर पर दूसरे स्रोतों से होने वाली आय में बैंक अकाउंट से मिलने वाला ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि शामिल होता है.

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सैलरी ब्रेकअप की डिटेल्स भी जरूरी

पिछले साल की तरह ही आपको अपने वेतन के विभिन्न हिस्सों यानी ब्रेकअप की जानकारी देनी होगी, इसमें सैलरी के अलावा भत्ते, अतिरिक्त सुविधाएं और अन्य लाभ शामिल हैं. आपको अपनी कंपनी से मिली सुविधाओं की भी अतिरिक्त जानकारी देने की जरूरत पड़ेगी. अगर आपको कोई ऐसे भत्ते जैसे मकान किराया भत्ता भी मिलते हैं और जिसमें टैक्स में थोड़ी या पूरी छूट मिलती है, उनकी जानकारी भी ITR-1 में देनी होगी.

ITR-1 कौन नहीं कर सकता है इस्तेमाल

नोटिफाई किए गए फॉर्म के मुताबिक, इस आईटीआर फॉर्म को किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो किसी कंपनी का डायरेक्टर है या जिसने अनलिस्टेड इक्विटी शेयर में निवेश किया है.

ITR-2

ITR-2 फॉर्म उन लोगों और अविभाजित हिंदू परिवारों (HUFs) के लिए है, जिन्हें किसी कारोबार या पेशे से कोई प्रॉफिट या लाभ नहीं होता अर्थात जिनको पूंजी लाभ या अन्य स्रोतों से ही आय होती है. ITR-2 में आपको अपने निवास स्थान से जुड़ी जानकारी देनी होगी कि आप वित्त वर्ष 2018-19 में वहां के निवासी थे या नहीं, या साधारण निवासी थे और अनिवासी थे. आपको बताना होगा कि इस वित्त वर्ष में सेक्शन 6(1)(a) के तहत आप भारत में 182 दिनों या फिर ज्यादा दिनों तक रह रहे थे या फिर आप देश में 60 दिन या ज्यादा या फिर 365 दिनों के लिए रह रहे हैं या फिर सेक्शन (6)(1)(c) के तहत पिछले लगातार 4 सालों से रह रहे हैं.

अगर आप के पास किसी अनलिस्टेड कंपनी के शेयर्स हैं तो आपको ITR-2 में इसकी जानकारी देनी होगी. इस जानकारी में कंपनी, पैन, शेयरों की संख्या और आपके द्वारा खरीदे या बेचे गए शेयरों की जानाकरी की जरूरत होगी.

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किसे करना होगा ITR-2 या 3 का इस्तेमाल

कंपनी के निदेशकों और जिन लोगों के पास वित्त वर्ष 2018-19 में किसी कंपनी गैर सूचीबद्ध शेयर रहे, वे ITR-1 या ITR-4 फाइल नहीं कर सकते, उन्हें ITR-2 या ITR-3 ही फाइल करना होगा. इनमें अनलिस्टेड इक्विटी शेयर्स की होल्डिंग्स के बारे में डिटेल्ड जानकारी भी मांगी गई है.

केवल ये लोग कर सकते हैं पेपर फॉर्म में फाइलिंग

आयकर की पेपर फाइलिंग की सुविधा अब सिर्फ 80 वर्ष से ऊपर के लोगों और फिर ITR-1 या ITR-4 फाइल करने वालों के लिए ही उपलब्ध है. बाकी सभी को कम्प्यूटराइज्ड फाइलिंग ही करनी होगी. इससे पहले 5 लाख रुपये तक की इनकम वाले या रिफंड पाने वाले लोग पेपर फॉर्म में रिटर्न फाइल कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा. अब अधिकतर आयकर रिटर्न ई-फाइल ही होते हैं.

कौन दाखिल कर सकता है ITR 4

ITE-4 अब सिर्फ उन्हीं लोगों द्वारा फाइल किया जा सकता है, जो भारत के निवासी हैं और साधारण निवासी हैं व उनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है. आमतौर पर लोग रिटर्न फाइल करने के लिए ITR-1 या ITR-2 इस्तेमाल नहीं करते हैं.

ITR-4 उन लोगों के लिए भी है जिनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है और उन्हें किसी कारोबार व पेशे से आय हो रही है. इनकी आयकर अधिनियम के सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE के तहत गणना होती है.

By: सीए मनीष कुमार गुप्ता

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