मुख्य समाचार:

EPF: कंपनी ने देरी से जमा कराई PF की रकम, क्या अदालत निदेशकों को देगी सजा?

कर्मचारी का पीएफ योगदान समय पर डिपॉजिट करने की जिम्मेदारी कंपनी और नियोक्ता की होती है.

November 13, 2019 2:25 PM
Representational Image

EPFO: कर्मचारी का पीएफ योगदान समय पर डिपॉजिट करने की जिम्मेदारी कंपनी और नियोक्ता की होती है. अगर कंपनी इसे देरी की शिकायत होने के बाद डिपॉजिट करती है, तो भी वह इसमें आरोपी है और उसे बरी नहीं किया जा सकता. कोलकाता हाई कोर्ट ने यह फैसला मालहाती टी एण्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Malhati Tea & Industries Ltd) और अन्य बनाम स्टेट ऑफ पश्चिम बंगाल और अन्य केस में दिया है.

इस केस में कोर्ट के सामने सबसे जरूरी सवालों में से एक था कि अगर बकाया राशि को डिपॉजिट कर दिया जाता है, तो फिर क्या नियोक्ताओं को समय पर प्रोविडेंट फंड का शेयर समय पर जिपॉजिट नहीं करने के आरोप से बरी कर दिया जा सकता है. कोर्ट ने कंपनी को आरोपों से मुक्त करने से इनकार दिया. मालहाती टी एण्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड जिस पर पीएफ का समय पर डिपॉजिट नहीं करने का आरोप था उसे बरी नहीं किया. कोर्ट के सामने दूसरा सवाल था कि क्या कंपनी के डायरेक्टर्स को कंपनी के नियोक्ताओं के तौर पर मानकर उन्हें इस आरोप के लिये कानूनी प्रावधानों के तहत सजा दी सकती है.

क्या था पूरा मामला ?

2011 में प्रोफिडेंट फंड एन्फोर्समेंट ऑफिसर ने मामले में कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इसमें कंपनी के एक पूर्व डायरेक्टर और तीन वर्तमान डायरेक्टर्स पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अप्रैल से अक्टूबर 2007 तक की समयावधि के लिए प्रोविडेंट फंड के शेयर को डिपॉजिट नहीं किया था जो 12,72, 266 रुपये था. पीएफ अधिकारी का आरोप था कि कंपनी और उसके डायरेक्टर्स पर आईपीसी के सेक्शन 406/409 के तहत मामला दर्ज किया था. मामले में दिसंबर 2013 में पुलिस ने जांच पूरी की और कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दायर की. डायरेक्टर्स के खिलाफ स्पेशल जज ने अरेस्ट वारंट जारी किया. स्पेशल जज ने डायरेक्टर्स की वारंट ऑर्डर को रद्द करने की मांग से इनकार दिया था.

कंपनी ने 2011 में रिट याचिका दायर की जिसमें उसने ब्याज का भुगतान करने की बात कही. कोर्ट ने 5 जुलाई 2011 को रिट याचिका को खारिज कर दिया और कंपनी को 8 हफ्तों के भीतर पीएफ में अपने योगदान भरने का आदेश दिया.

हाई कोर्ट में कंपनी ने कहा कि उन्होंने पहले ही यह भुगतान कर दिया था. हालांकि, रिजनल प्रोविडेंट फंड ऑथोरिटी ने हाई कोर्ट के सामने कहा कि पीएफ के शेयर को बाद में डिपॉजिट करना कंपनी को अपराध से बरी नहीं कर सकता. इससे याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को खत्म नहीं किया जा सकता.

ITR: अभी भी रिटर्न भरने का मौका, 2.50 लाख से कम इनकम पर नहीं लगेगी लेट फीस

डायरेक्टर्स को नियोक्ता नहीं माना जा सकता

पूर्व में दी गई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि कंपनी के डायरेक्टर्स को नियोक्ता या मालिक मानकर उनके खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 405/406/409 के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं किया जा सकती. हाई कोर्ट ने डायरेक्टर्स के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी. उसने माना कि डायरेक्टर्स मुख्य नियोक्ता नहीं हैं और कंपनी के किए गए अपराधों के लिये जिम्मेदार नहीं हैं. हालांकि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई.

(Story: Rajeev Kumar)

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. निवेश-बचत
  3. EPF: कंपनी ने देरी से जमा कराई PF की रकम, क्या अदालत निदेशकों को देगी सजा?

Go to Top