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मंदी के दौर में भी 10-10% सालाना रिटर्न देने का वादा, कॉरपारेट FD में पैसा लगाना कितना सेफ

मार्केट में कुछ ऐसे भी विकल्प मौजूद हैं जो सालाना 9 से 10 फीसदी या इससे भी ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रहे हैं.

September 19, 2019 12:52 PM
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एक ओर जहां बैंक आपके जमा पर ब्याज दरें घटाने में लगे हैं. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा डूब रहा है. कैपिटल मार्केट में कुछ ऐसे भी विकल्प मौजूद हैं जो सालाना 9 से 10 फीसदी या इससे भी ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रहे हैं. हम यहां बात कर रहे हैं कॉरपोरेट एफडी स्कीम की, जहां कंपनियां मार्केट में अपनी एफडी स्कीम लाती हैं और उन पर बैंकों के मुकाबले 3 से 3.5 फीसदी ज्यादा रिटर्न देने का वादा करती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निवेशकों को ज्यादा रिटर्न के लालच में कॉरपोरेट एफडी पर दांव खेलना चाहिए. इनमें पैसा लगाना कितना सेफ रहता है.

बता दें कि बुधवार यानी 18 सितंबर को किचन अप्लायंस फर्म हॉकिंस कुकर की कॉरपोरेट डिपॉजिट स्कीम (एफडी) खुली है. कंपनी का एफडी प्लान 12 महीने से 36 महीने की अवधि के लिए है, जिसमें सालाना ब्याज 10.50 फीसदी तक मिलेगा. यानी बैंक के मुकाबले करीब 3 फीसदी ज्यादा ब्याज. कंपनी की एफडी स्कीम को रेटिंग एजेंसी इकरा से एमएए (स्टेबल) रेटिंग मिली है. यह रेटिंग ‘हाई क्वालिटी और लो क्रेडिट रिस्क’ को दर्शाती है.

इन कंपनियों की भी है एफडी स्कीम

हॉकिंस कुकर ही नहीं कई अन्य छोटी बड़ी कंपनियां भी समय समय पर एफडी स्कीम लाती रहती है. मसलन बजाज फाइनेंस, HDFC लिमिटेड, L&T फाइनेंस लिमिअेड, इंडियाबुल्स हाउसिंग, LIC हाउसिंग फाइनेंस, PNB हाउसिंग फाइनेंस, M&M फाइनेंशियल सर्विसेज, श्रीराम ट्रांसपोट्र फाइनेंस और टाटा मोटर फाइनेंस. इनमें से ज्यादातर अलग अलग समयावधि के लिए 8 से 11 फीसदी तक सालाना ब्याज आफर कर रही हैं.

क्या कॉरपोरेट एफडी में लगाना चाहिए दांव

एक्सपर्ट का कहना है कि यहां देखने वाली बात है कि ज्यादा रिटर्न का मतलब ज्यादा लालच. फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि कई बार निवेशक ज्यादा रिटर्न के लालच में फंस सकते हैं. लेकिन कॉरपोरेट एफडी का चुनाव कर रहे हैं तो सबसे पहले उस कंपनी का बिजनेस, ट्रैक रिकॉर्ड और एफडी पर रेटिंग क्या मिली है, यह जरूर देख लें. जरूरी नहीं है कि ज्यादा बेहतर बिजनेस और उंची रेटिंग वाली स्कीम पर ब्याज ज्यादा मिल रहा हो. लेकिन यह कम रेटिंग वाली स्कीम की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होता है. ऐसा हो सकता है कि कम रेटिंग वाली कंपनियां ज्यादा लालच दे रही हों. AAA या इससे उंची रेटिंग वाली स्कीमों के साथ कम से कम जोखिम होता है.

लंबी अवधि वाली स्कीम या छोटी अवधि के लिए

एक्सपर्ट कॉरपोरेट एफडी के मामले में लंबी अवधि की बजाए छोटी अवधि की स्कीम को चुनने की बात कहते हैं. फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि बैंक हो या पोस्ट ऑफिस, यहां आपकी जमा पर आरबीआई या सरकार की जिम्मेदारी होती है. जहां पैसा डूबने का खतरा नहीं होता है. लेकिन कंपनियों के डूबने पर जरूरी नहीं है कि आपका पैसा वापस मिल जाए. ऐसे में लंबी अवधि का स्कीम चुनकर रिस्क नहीं बढ़ाना चाहिए.

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