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5 लाख से ज्यादा इनकम पर भी टैक्स देनदारी हो जाएगी शून्य, Income Tax के ये नियम आएंगे काम

दो तरह की इनकम(income) होती है, एक टोटल इनकम(total income), दूसरी टैक्सेबल इनकम(taxable income). टोटल इनकम वो होती है जो आप कमाते हैं, और टैक्सेबल इनकम वो होती है जिसपर आपको टैक्स(tax) देना होता है.

February 7, 2019 10:51 AM

 

claim tax deductions to save tax after budget announcementहर महीने कमाते हैं 80 हजार तो भी नहीं देना होगा टैक्स, ये नियम आएंगे काम

बजट में वित्त मंत्री द्वारा टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाने की घोषणा के बाद अब 5 लाख तक की आय कमाने वालों को इनकम टैक्स नहीं भरना पड़ेगा. लेकिन ये नियम सिर्फ 5,00,000 लाख तक या उससे कम कमाने वालों के लिए है. अगर किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो उसे पुराने तरीके के हिसाब से अपनी पूरी टैक्सेबल इनकम पर टैक्स देना होगा. लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आपकी इनकम 5 लाख से ज्यादा है तो आप किस तरह से अपनी टैक्स देनदारी शून्य कर सकते हैं. जानते हैं ऐसे कुछ विकल्प…..

टैक्स डिडक्शन क्या है?
दो तरह की इनकम होती है, एक टोटल इनकम, दूसरी टैक्सेबल इनकम. टोटल इनकम वो होती है जो आप कमाते हैं, और टैक्सेबल इनकम वो होती है जिसपर आपको टैक्स देना होता है. टोटल इनकम में से जब अलग-अलग तरह की डिडक्शन्स घटाई जाती हैं, तब टैक्सेबल इनकम आती है, जिसपर फिर अलग-अलग स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है.

इनकम टैक्स का सेक्शन 80C
इनकम टैक्स के सैक्शन 80C में आपको 1 साल में 1.5 लाख तक की छूट मिल जाती है. यानी 80C के तहत आप अलग-अलग जगह निवेश करके 1.5 लाख तक की रकम अपनी टोटल इनकम में से घटाकर अपनी टैक्सेबल इनकम 1.5 लाख तक घटा सकते हैं. ये टोटल 1.5 लाख रुपये की रकम 80C, 80CCC, 80CCD के तहत डिडक्शन के तौर पर मिल जाएगी.

नीचे बताए गए कुछ ऐसे विकल्प हैं जिसमें निवेश करके आप 1.5 लाख तक की छूट मिल जाएगी

  • म्यूचुअल फंड में निवेश
  • फिक्स्ड डिपोजिट में निवेश
  • जीवन बीमा पॉलिसियों (खुद के लिए, जीवनसाथी या बच्चों के लिए) के लिए भुगतान
  • सुपरनेशन / प्रोविडेंट फंड की ओर किया गया भुगतान
  • अधिकतम दो बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्यूशन फीस
  • सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम्स में निवेश
  • NABARD बॉन्ड्स की खरीदारी

सेक्शन 80D

खुद के लिए, पति के लिए, बच्चों के लिए या माता पिता के लिए किसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम पर इस सेक्शन के तहत टैक्स छूट ली जा सकती है. आपको अपने आश्रित पर अधिकतम 25 हजार रुपये की छूट ले सकते हैं. यानी इस सेक्शन के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये तक की छूट मिल सकती है.

 

सेक्शन 80E:

उच्च शिक्षा के लिए गए लोन की ब्याज की रकम पर डिडक्शन मिल सकती है. ये लोन खुद की पढ़ाई या बच्चों की पढाई के लिए लिया गया हो.

सेक्शन 80 EE:

घर खरीदने के लिए लिए गए लोन के ब्याज भुगतान पर डिडक्शन मिलता है. इसमें अधिकतम 2.40 लाख रुपये तक डिडक्शन मिल सकता है.

सेक्शन 80G:

सेक्शन 80G के तहत चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन्स में दिए गए दान पर टैक्स छूट ली जा सकती है.

सेक्शन 80IA

सेक्शन 80IA में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी से होने वाली कमाई पर डिडक्शन मिलता है. ये इंडस्ट्रियल एक्टिविटी टेलीकम्युनिकेशन, पावर जनरेशन, इंडस्ट्रियल पार्क, SEZs से संबधित होती है.

सेक्शन 80TTA

सेक्शन 80TTA में बैंक के सेविंग अकाउंट मे जमा पैसों पर मिलने वाले ब्याज पर डिडक्शन मिलता है.

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