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चेक Vs डिमांड ड्राफ्ट: कौन है ज्यादा सिक्योर, दोनों के इस्तेमाल में क्या है अंतर

कैशलेस ट्रांजेक्शन के जरियों में एक नाम डिमांड ड्राफ्ट (DD) भी है. चेक का इस्‍तेमाल तो बड़े पैमाने पर लोग करते हैं लेकिन DD आज भी कम इस्‍तेमाल किया जाता है.

August 13, 2019 7:27 AM
cheque vs demand draft: which is more secure and what are the key differencesRepresentational Image

आज के दौर में कैशलेस ट्रान्‍जैक्‍शन आम बात हो चली है. इसके लिए मोबाइल वॉलेट, पेमेंट ऐप्स, चेक, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड आदि का इस्तेमाल किया जाता है. कैशलेस ट्रांजेक्शन के जरियों में एक नाम डिमांड ड्राफ्ट (DD) भी है. चेक का इस्‍तेमाल तो बड़े पैमाने पर लोग करते हैं लेकिन DD आज भी कम इस्‍तेमाल किया जाता है. कई लोग चेक और DD के इस्तेमाल में अंतर से भी वाकिफ नहीं होते हैं और दोनों को एक जैसा ही समझते हैं, जबकि ऐसा नहीं है.

पहले समझें क्या है DD

DD का इस्‍तेमाल भी किसी बैंक अकाउंट में पैसे भेजने के लिए होता है. किसी भी बैंक से इसे बनवाया जा सकता है. लेकिन खास बात यह कि DD बनवाने के लिए आपका बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं है. जिस इन्‍सान या कंपनी के नाम पर DD बनवाया जाता है, इसका पैसा सीधा उसी के अकाउंट में ट्रान्‍सफर होता है. DD बनवाने वाला या तो कैश देकर इसे बनवा सकता है या फिर अपने अकाउंट की मौजूदगी वाले बैंक से बनवाने पर अपने अकाउंट से पैसा कटवा सकता है.

DD का अमाउंट बैंक अकाउंट से इनकैश कराने के लिए जिसके नाम पर DD पेएबल है, उसे DD बनवाए जाने का कारण यानी किस काम के लिए अमाउंट DD से ट्रांसफर किया जा रहा है उससे संबंधित डॉक्‍युमेंट्स बैंक में दिखाने होते हैं. तभी DD इनकैश करा सकता है.

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चेक और DD में प्रमुख अंतर

  • चेक और DD में सबसे बड़ा अंतर यह है कि DD केवल अकाउंट में ही पे होता है. जिसके नाम पर यह ऑर्डर है, वह इसे अपने अकाउंट से इनकैश करा सकता है. वहीं चेक अकाउंट में जमा भी कराया जा सकता है ओर बिना जमा कराए बीयरर द्वारा इनकैश भी कराया जा सकता है.
  • अकाउंट में पर्याप्‍त अमाउंट न होने की स्थिति में चेक बाउंस हो जाता है. लेकिन DD कभी बाउंस नहीं होता क्‍योंकि इसके लिए DD बनवाने वाला व्‍यक्ति पहले ही पेमेंट कर चुका होता है.
  • चेक की सुविधा केवल संबंधित बैंक में अकाउंट रखने वाले को ही होती है लेकिन DD बनवाने के लिए बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं है.
  • अगर कभी चेक खो जाता है और यह अकाउंट पेई नहीं है तो उसका गलत इस्‍तेमाल होने के चांस होते हैं. कोई भी व्‍यक्ति बीयरर बनकर उसे इनकैश करा सकता है. लेकिन DD के साथ ऐसा नहीं है. चूंकि इसके द्वारा केवल बैंक अकाउंट में ही पेमेंट होता है, इसलिए इसके खो जाने पर इसे इनकैश नहीं कराया जा सकता. खो जाने की स्थिति में इसे कैंसिल कराया जा सकता है. इसके चलते यह चेक से ज्यादा सिक्योर है.
  • कई बार स्‍टैंडर्ड चेक से फंड ट्रांसफर में कई दिन का वक्‍त लग जाता है. लेकिन DD के अमाउंट को टार्गेटेड अकाउंट में पहुंचने में एक कामकाजी दिन का ही वक्‍त लगता है.

​DD पर बायर का नाम होना अनिवार्य

रिजर्व बैंक ने एक नया नियम निकाला है, जिसके तहत ​DD पर बायर का नाम प्रिंट करना अनिवार्य कर दिया गया है. यह नियम 15 सितंबर 2018 से प्रभावी हुआ है. इसका मकसद मनी लॉन्ड्रिंग की कोशिशों को असंभव बनाना है.

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DD इन कामों में है बड़े काम का

  • बैंक DD बड़े और इंटरनेशनल ट्रांजेक्‍शन के लिए एक अच्‍छा जरिया हैं.
  • ज्‍यादातर एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूट्स और कई जॉब्‍स के लिए फीस ट्रांसफर के जरिए के तौर पर DD का ही इस्‍तेमाल होता है.
  • DD को रुपये के अलावा जरूरत पड़ने पर दुनिया की किसी भी करेंसी में बनवाया जा सकता है.

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