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1 जनवरी से लागू हो गए ये 4 बदलाव, जानें आप पर कैसे होगा असर

कुछ मामलों में ये बदलाव फायदेमंद होंगे तो कहीं थोड़ी दिक्कत पैदा करेंगे.

January 1, 2019 7:50 AM

changes that came into effect from 1st january 2019

2018 खत्म हो चुका है और नया साल शुरू हो चुका है. 2019 लागू होते ही यानी 1 जनवरी से देश में कुछ नए नियम और बदलाव लागू हो रहे हैं. कुछ मामलों में ये बदलाव फायदेमंद होंगे तो कहीं थोड़ी दिक्कत पैदा करेंगे. आइए बताते हैं नए साल से लागू होने वाले ऐसे ही 4 बड़े बदलावों के बारे में-

1. नहीं चलेंगे मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड

देश में 1 जनवरी से मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड चलना बंद हो गए. इस वक्‍त मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप और EMV चिप वाले यानी दो तरह के डेबिट और क्रेडिट कार्ड चलन में हैं. मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप कार्ड पुरानी टेक्‍नोलॉजी है, और इस तरह के कार्ड बनना बंद हो चुके हैं. इसकी वजह इनका कम सिक्‍यो‍र होना है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने 2016 में ही सभी बैंकों को आदेश दे दिया था कि ग्राहकों के साधारण मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप कार्ड्स को चिप वाले कार्ड से रिप्‍लेस किया जाए. कस्‍टमर के ATM-डेबिट व क्रेडिट कार्ड की डिटेल्‍स सिक्‍योर रहें, इसके लिए RBI ने यह कदम उठाया है. इस काम को पूरा करने के लिए RBI ने 31 दिसंबर 2018 को डेडलाइन घोषित किया था.

2. कारें महंगी

1 जनवरी 2019 से ज्यादातर ऑटो कंपनियां अपनी कारों के दाम में बढ़ोत्तरी कर रही हैं. इनमें टाटा मोटर्स, फोर्ड इंडिया, निसान इंडिया, मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, BMW, रेनो, इसुजु, फोक्सवैगन आदि कंपनियां शामिल हैं. कंपनियों का कहना है व्हीकल्स की मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ी है, जिसके चलते कंपनियां इसका बोझ कस्टमर्स पर डालने के लिए मजबूर हैं.

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3. नहीं चलेंगी नॉन CTS चेकबुक

1 जनवरी 2019 से बैंक नॉन-CTS चेक क्लियर नहीं करेंगे. ऐसा RBI के निर्देश के अनुसार हो रहा है. इसके चलते बैंक कस्टमर्स से जल्द से जल्द अपनी नॉन-CTS चेकबुक को CTS चेकबुक से रिप्लेस करने की अपील कर रहे हैं. SBI ने तो 12 दिसंबर से ही नॉन-CTS चेक को स्वीकार करना बंद कर दिया है.

क्या है CTS और नॉन-CTS?

CTS यानी चेक ट्रंकेशन सिस्टम. इस सिस्टम के तहत चेक की एक इलेक्ट्रॉनिक इमेज कैप्चर हो जाती है और ​फिजिकल चेक को एक बैंक से दूसरे बैंक में क्लियरेंस के लिए भेजने की जरूरत नहीं होती. सब कुछ आॅनलाइन हो जाता है. इससे फिजिकल चेक्स को मैनेज करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह भेजने का झंझट खत्म हो जाता है. साथ ही इस पर आने वाले खर्च और चेक क्लियरेंस में लगने वाले टाइम की भी बचत होती है.

वहीं नॉन-CTS चेक कंप्यूटर द्वारा रीड नहीं किए जा सकते. इसलिए उन्हे फिजिकली ही एक जगह से दूसरी जगह क्लियरेंस के लिए भेजना होता है. लिहाजा क्लियरेंस में वक्त भी ज्यादा लगता है. RBI बैंकों को पहले ही यह निर्देश भी दे चुका है कि वे केवल CTS-2010 स्टैंडर्ड चेक वाली चेकबुक्स ही इश्यू करेंगे.

4. व्हीकल्स ड्राइवर और राइडर्स को ज्यादा एक्सीडेंटल कवर

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने एक्सीडेंट में मरने वाले कार/कमर्शियल व्हीकल्स ड्राइवर या टू-व्हीलर राइडर के लिए कंपल्सरी पर्सनल एक्सीडेंट (CPA) कवर को 1 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया है. इस नए नियम के तहत अब सभी व्हीकल इंश्योरेंस कंपनियों को अपनी एक्सीडेंटल पॉलिसीज में इस नए 15 लाख रुपये के पर्सनल एक्सीडेंट कवर को शामिल करना होगा. नया नियम 1 जनवरी 2019 से प्रभावी हो गया है. इसमें ओनर या ड्राइवर-राइडर के अलावा उनके साथ सहयोगी ड्राइवर के तौर पर सफर कर रहा इंसान भी शामिल होगा.

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