मुख्य समाचार:
  1. दूसरा घर खरीद रहे हैं? इससे जुड़े टैक्स नियमों को जान लें

दूसरा घर खरीद रहे हैं? इससे जुड़े टैक्स नियमों को जान लें

दूसरा घर खरीदने से पहले उससे जुड़े टैक्स संबंधी प्रभावों के बारे में जानने के बाद ही उसे खरीदने का फैसला करना चाहिए.

August 3, 2018 3:30 PM
buying second home tax implications, buying second house tax implications, second home tax benefits 2018, second home tax deduction 2018, second home tax exemption, business news in hindiदूसरा घर खरीदने से पहले उससे जुड़े टैक्स संबंधी प्रभावों के बारे में जानने के बाद ही उसे खरीदने का फैसला करना चाहिए.

एक दूसरा घर खरीदने से पहले उससे जुड़े टैक्स संबंधी प्रभावों के बारे में जानने के बाद ही उसे खरीदने का फैसला करना चाहिए. एक घर खरीदना एक ऐसा सपना है जिसे सिर्फ कुछ लोग ही पूरा कर पाते हैं. लेकिन कुछ निवेशक ऐसे भी हैं जिन्होंने एक दूसरा खरीदने में भी कामयाबी हासिल कर ली है. एक व्यक्ति कई कारणों से एक दूसरा घर खरीदने का फैसला कर सकता है. कुछ लोग अपने निवास स्थल से दूर एक दूसरा घर खरीदना चाहते हैं ताकि वे वहां थोड़ा आराम और मौज-मस्ती कर सके जबकि कुछ लोग अपने रिटायरमेंट के बाद मनोरंजन
के लिए या एक फ़ार्महाउस की तरह इस्तेमाल करने के लिए एक दूसरा घर खरीदना चाहते हैं. यह कुछ लोगों के लिए एक निवेश विकल्प भी हो सकता है जो उससे होने वाले किराए की आमदनी और उसकी कीमत बढ़ने से होने वाले लाभ का आनंद उठाना चाहते हैं.

आपका इरादा चाहे जो भी हो, एक दूसरा घर खरीदते समय आपको उससे जुड़े कुछ टैक्स संबंधी प्रभावों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए. इसलिए मूल्यांकन वर्ष 2019-2020 के लिए दूसरी प्रॉपर्टी में निवेश करने पर अपने टैक्स पर पड़ने वाले प्रभावों पर एक नजर डाल लेना चाहिए.

जब आप एक दूसरा घर खरीदते हैं

  • पहली प्रॉपर्टी को अपने कब्जे वाली प्रॉपर्टी माना जाता है जबकि दूसरे घर को ‘किराए पर दिया गया’ माना जाता है, यदि इसे किराए पर न दिया गया हो तब भी.
  • अपने कब्जे वाली प्रॉपर्टी से होने वाले इनकम को शून्य माना जाता है. किराए पर दी गई या ‘किराए पर दी गई मानी गई’ प्रॉपर्टी के लिए, इनकम टैक्स के उद्देश्य से वास्तविक किराए की रकम या मार्केट रेट के आधार पर अनुमानित किराए की रकम का कैलकुलेशन किया जाता है.
  • दोनों घरों को किराए पर देने पर, इनकम टैक्स के उद्देश्य से दोनों घरों के किराए के रूप में होने वाले इनकम को ध्यान में रखा जाएगा.
  • जब प्रॉपर्टी और लोन, संयुक्त नाम पर होते हैं तब किराए से होने वाले इनकम को प्रत्येक सह-मालिक की हिस्सेदारी के आधार पर उनके बीच बाँट दिया जाता है.

प्रॉपर्टी से होने वाले इनकम या नुकसान का कैलकुलेशन करने का तरीका

यदि आपने दोनों में से किसी एक प्रॉपर्टी को या दोनों प्रॉपर्टी को किराए पर दे दिया है तो आपको अपने टैक्सेबल इनकम का कैलकुलेशन करने के लिए प्रॉपर्टी से होने वाले इनकम या नुकसान का भी कैलकुलेशन करना पड़ेगा. प्रॉपर्टी से होने वाले इनकम या नुकसान का कैलकुलेशन, किराए की रकम में से म्यूनिसिपलिटी का टैक्स, 30 प्रतिशत की मानक कटौती और दिए गए इंटरेस्ट की रकम को घटाकर किया जाता है.

उदाहरण के लिए, यदि आपको किराए से होने वाले इनकम (‘किराए पर दी गई मानी गई’ प्रॉपर्टी पर अनुमानित किराए की रकम) के रूप में 1,20,000 रु. मिलते हैं, 2000 रु. का म्यूनिसिपलिटी टैक्स देना पड़ता है, और 80,000 रु. का इंटरेस्ट देना पड़ता है तो प्रॉपर्टी से होने वाले इनकम या लोस का कैलकुलेशन निम्नानुसार होगा — 1,20,000 – 2000 – 36,000 – 80,000 = 2000 रु.

होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट से जुड़े टैक्स संबंधी प्रभाव

पहला घर (अपने कब्जे वाला): यदि आपने लोन लेकर घर ख़रीदा है तो आप धारा 80 (C) के अंतर्गत होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट के रीपेमेंट पर अधिक से अधिक 1.5 लाख रु. तक की टैक्स कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं.

पहला घर जिसे किराए पर दे दिया गया है या किराए पर दिया गया मान लिया गया है: यदि मालिक, काम के लिए किसी दूसरे शहर में रह रहा है, सिर्फ तभी वह धारा 80 (C) के अंतर्गत किराए पर दिए गए या किराए पर दिए गए मान लिए गए पहले घर के प्रिंसिपल अमाउंट के पेमेंट पर अधिक से अधिक 1.5 लाख रु. तक की टैक्स कटौती के लिए क्लेम कर सकता है.

दूसरा घर या अतिरिक्त प्रॉपर्टी: इस पर कोई टैक्स लाभ नहीं मिलता है.

दिए जाने वाले इंटरेस्ट से जुड़े टैक्स संबंधी प्रभाव?

पहला घर: आप अधिक से अधिक 2 लाख रु. तक टैक्स छूट लाभ के लिए क्लेम कर सकते हैं लेकिन सिर्फ तभी यदि घर बनने का काम उस फाइनेंशियल वर्ष के समाप्त होने से पांच साल के भीतर पूरा हुआ हो जिस फाइनेंशियल वर्ष में लोन लिया गया है वर्ना छूट की सीमा 30,000 रु. होती है. इसके अलावा आप 35 लाख रु. तक के लोन के लिए दिए गए इंटरेस्ट पर 50,000 रु. की छूट के लिए भी क्लेम कर सकते हैं बशर्ते घर की कुल कीमत 50 लाख रु. से अधिक न हो.

दूसरा घर या अतिरिक्त प्रॉपर्टी: आप एक ऐसी रकम पर दूसरे घर या अतिरिक्त प्रॉपर्टी पर इंटरेस्ट पर छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं जो आपके स्वामित्व वाली सभी प्रॉपर्टी के लिए दिए गए वास्तविक इंटरेस्ट या 2 लाख रु. से कम हो. एक दूसरा घर इस दृष्टि से एक टैक्स बोझ बन सकता है कि दिए जाने वाले इंटरेस्ट पर 2 लाख रु. का लिमिट है और उस पर मिलने वाले किराए की रकम को टैक्स के उद्देश्य से ध्यान में रखा जाएगा, यदि उसे किराए पर नहीं दिया गया है तब भी. इसलिए, एक दूसरा घर खरीदने से पहले उससे जुड़े टैक्स संबंधी प्रभावों का मूल्यांकन करने के बाद ही दूसरा घर खरीदने का फैसला करना चाहिए.

इसके लेखक बैंकबाज़ार के सीईओ आदिल शेट्टी हैं.

Go to Top