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NSC Vs ELSS Vs PPF Vs NPS Vs FD: रिटर्न के साथ बचाना है टैक्स; जान लें ब्याज, मैच्योरिटी, रिस्क की डिटेल

निवेश और बचत के साथ ही टैक्स प्लानिंग करना भी उतना ही जरूरी है. एनएससी, पीपीएफ, एनपीएस,FD और ईएलएसएस ऐसे ही विकल्प हैं.

Published: May 30, 2020 8:46 AM
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निवेश और बचत के साथ ही टैक्स प्लानिंग करना भी उतना ही जरूरी है. इससे ना सिर्फ आपके द्वारा दिए जाने वाले टैक्स में कमी आती है बल्कि आपको अपने निवेश से प्राप्त रिटर्न और लिक्विडिटी फंड को भी मैनेज करने में मदद मिलती है. आयकर अधिनियम के तहत टैक्सपेयर्स को अलग अलग योजनाओं मसलन NSC, PPF, NPS, FD और ELSS में निवेश करने पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है. अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम को चुनते हैं तो इन योजनाओं पर निवेश के जरिए टैक्स की बचत कर सकते हैं. हालांकि एक बात ध्यान देने वाली यह है कि हर टैक्सपेयर के लिए हर तरह की योजना सही साबित नहीं हो सकती है. इसलिए निवेया का लक्ष्य, ब्याज और मेच्योरिटी के साथ ही रिस्क प्रोफाइल जरूर देखना चाहिए.

30 जून तक बढ़ी है समय सीमा

कोरोना वायरस महामारी के चलते सरकार ने टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट के लिए समय सीमा बढ़ा दी है. इसे अब 30 जून कर दिया गया है. यानी अब आपके पास वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अपनी टैक्‍स सेविंग को पूरा करने के लिए 30 जून, 2020 तक का समय है. पहले इसकी समय सीमा 31 मार्च, 2020 थी.

निवेश             ब्याज        मेच्योरिटी           रिस्क प्रोफाइल

NSC             6.8%           5 साल                    लो रिस्क

PPF             7.1%            15 साल                  लो रिस्क

NPS            6-8%           रिटायरमेंट तक      मार्केट रिलेटेड

ELSS          6-8%           मिनिमम 3 साल      मार्केट रिलेटेड

FD              5.4-6%        5 साल                    लो रिस्क

(नोट: इन सभी योजनाओं पर इनकम टैक्स एकट के तहत धारा 80C पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है.)

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)

NSC पर मौजूदा तिमाही के लिए 6.8 फीसी सालाना ब्याज तय हुआ है. इसकी मेच्योरिटी 5 साल की है. इसमें कम से कम 1000 रुपये निवेश करना जरूरी है. अधिकतम निवेश की लिमिट नहीं है. NSC में निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है. 6.8 फीसदी सालाना ब्याज दर के हिसाब से मेच्योरिटी पर 5 लाख रुपये के 694746 रुपये हो जाएंगे. इसे सिंगल और ज्वॉइंट दोनों तरह के अकाउंट के जरिए खोला जा सकता है.

PPF

पब्लिक प्रोविडेंट फंड खासतौर से नौकरीपेशा वालों के बीच बेहद पॉपुलर टैक्स सेविंग स्कीम है, जिस पर 7.1 फीसदी सालाना की दर से गारंटेड रिटर्न मिल रहा है. यहां एफडी, केवीपी और एनएससी की तुलना में ज्यादा ब्याज मिल रहा है. पीपीएफ में अधिकतम 1.5 लाख सालाना जमा किया जा सकता है. जबकि कम से कम 500 रुपये.

पीपीएफ EEE की श्रेणी में आती है. यानी योजना में किए गए पूरे निवेश पर आपको टैक्स छूट का लाभ मिलता है. साथ ही इस योजना में निवेश से मिलने वाले ब्याज और निवेश की संपूर्ण राशि पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं देना होता. अगर योजना में अधिकतम सालाना जमा 1.5 लाख करते हैं तो 7.1 फीसदी सालाना कंपांउंडिंग के लिहाज से 15 साल बाद मेच्योरिटी पर रकम 40,68,209 रुपये होगी.

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

नेशनल पेंशन सिस्टम भी टैक्स बचाने का बेहतर विकल्प है. हालांकि इस फंड की मेच्योरिटी रिटायरमेंट तक होती है. रिटायरमेंट के समय मिलने वाली 60 फीसद राशि टैक्स फ्री होती है, वहीं 40 फीसद का निवेश एन्यूटी प्लान खरीदने के लिए करना होता है. आयकर अधिनियम की धारा 80CCD(1) के तहत आप 1.50 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, 80CCD(1b) के तहत 50 हजार रुपये तक का अतिरिक्त निवेश NPS में कर सकते हैं. लांग टर्म में देखें तो इसमें 8 फीसदी सालाना तक के आस पास रिटर्न मिल सकता है. हालांकि इसमें निवेश बाजार के जोखिम के अधीन है.

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

5 साल की FD टैक्स सेवर होती है और इसमें 1.5 लाख तक की जमा पर टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है. बता दें, एफडी करने के बाद ब्याज दरों में बदलाव होता है भी तो आपके निवेश पर कोई असर नहीं आएगा. अभी SBI की 5 साल की एफडी पर 5.40 फीसदी
सालाना ब्याज है. पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट पर 6.7 फीसदी, HDFC बैंक की 5 साल की एफडी पर 5.75 फीसदी, ICICI बैंक की 5 साल की एफडी पर 5.75 फीसदी, बैंक आफ बड़ौदा की 5 साल की एफडी पर 5.70 फीसदी और एक्सिस बैंक की 5 साल की एफडी पर 5.75 फीसदी ब्याज मिल रहा है.

ELSS

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, जिनमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है. बाजार में मौजूद ईएलएसएस पर लॉक इन पीरियड कम से कम 3 साल है. ईएलएसएस पर 3 से 5 साल में 6 से 7 फीसदी सालाना तक रिटर्न मिला है. लंअी अवधि में यह रिटर्न 8 से 10 फीसदी तक है. हालांकि इसमें निवेश बाजार के जोखिम के अधीन है.

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