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50 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस कवर मिलेगा फ्री, अपनाएं ये 5 तरीके

आम तौर पर क्रेडिट कार्ड कंपनियां भारत में 50 लाख रुपये तक कॉम्प्लिमेंट्री इंश्योरेंस देती हैं, जो कुछ मामलों में बढ़ भी सकता है.

September 17, 2019 7:03 AM
5 tips to get FREE insurance cover up to Rs 50 lakhकई क्रेडिट कार्ड पर इंश्योरेंस कवर फ्री मिलता है.

Insurance Cover: अक्सर कहीं पैसा निवेश करते वक्त या कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट खरीदते वक्त हम उसके सभी फीचर्स या एक्स्ट्रा फायदे नहीं जान पाते हैं. पार्टनर रिवार्ड्स के अलावा दूसरे बड़े फायदों से कई लोग अनजान रहते हैं. ऐसी ही एक चीज है – इन्श्योरेंस. मार्केट में कई ऐसे प्रोडक्ट्स है जिन पर इंश्योरेंस का फायदा है. एक बार आप इन्हें अच्छी तरह से जान लें फिर आप यह आपकी पूरी जिंदगी काम आएगा. सबसे अच्छी बात यह है कि आपको यह फायदा उठाने के लिए अलग से कुछ खर्च करने की जरूरत नहीं है.

यहां कुछ पॉपुलर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स हैं जो कॉम्प्लिमेंट्री इंश्योरेंस ऑफर करते हैं, लेकिन याद रखें कि इन सभी ऑफर्स पर कुछ न कुछ कंडीशन होती हैं , तो आपको उनके बारे में पता होना चाहिए.

1. क्रेडिट कार्ड पर इंश्योरेंस कवर

अलग-अलग क्रेडिट टाइप के आधार पर क्रेडिट कार्ड लिमिट और सर्विस प्रोवाइडर के ऑफर को ध्यान में रखते हुए क्रेडिट कार्ड पर इंश्योरेंस कवर ऑफर किया जाता है. हर क्रेडिट कार्ड के साथ एक वेलकम किट मिलती है. वेलकम किट के फाइन प्रिंट्स आप क्रेडिट कार्ड कंपनी के इंश्योरेंस ऑफर की डिटेल्स के बारे में जान सकते हैं. आमतौर पर भारत में क्रेडिट कार्ड कंपनियां 50 लाख तक का कॉमप्लिमेंट्री इंश्योरेंस ऑफर करती है. यह लिमिट किसी-किसी मामले में बढ़ भी सकती है. स्नैपडील HDFC बैंक और HDFC मनीबैक क्रेडिट कार्ड पर 50 लाख तक का एक्सिडेंटल डेथ इंश्योरेंस मिलता है. जबकि जेट एयरवेज इंडसइंड बैंक वोयेज क्रेजिड कार्ड पर 25 लाख तक का कॉम्प्लिमेंट्री एयर एक्सिडेंट इंश्योरेंस कवर मिलता है.

बैंक बाजार के सीईओ के आदिल शेट्टी कहते हैं कि “इस तरह के इंश्योरेंस का फायदा उठाने के लिए आपके क्रेडिट कार्ड का चालू रहना जारी है. इंश्योरेंस कवर लेने के लिए आपको कुछ क्राइटेरिया भी पूरा करना होता है. उदाहरण के तौर पर क्रेडिट कार्ड कंपनी की कुछ शर्त हो सकती है कि आपको न्यूनतम कितनी बार क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर अगर आप ट्रावल से संबंधित इंश्योरेंस कवर चाहते हैं तो आपके सामने यह शर्त रखी जा सकती है कि आपको उसी कंपनी के क्रेडिट कार्ड से टिकट बुक करें.”

2. डेबिट कार्ड पर इंश्योरेंस

क्रेडिट कार्ड की तरह ही, कई डेबिट कार्ड पर भी इंश्योरेंस कवर की सुविधा भी दी जाती है. अलग-अलग तरह के इंश्योरेंस कवर में पर्सनल एक्सिडेंट कवर, पर्चेस प्रोटेक्शन कवर और पर्मनेंट डिसएबिलिटी कवर आदि शामिल है. हालांकि इंश्योरेंस कवर ऑफर करते वक्त अलग-अलग कंपनियों की अलग-अलग शर्त हो सकती है. आपको अपने खाते में एक मिनिमम बैलेंस भी मेंटेन रखना पड़ना सकता है. या फिर किसी घटना के दौरान या क्लेम करते वक्त डेबिट कार्ड का एक्टिव रहना जरूरी. कुछ मामलों में निर्धारित समयसीमा के अंदर क्लेम न करना, लापरवाही या कानून के उल्लंघन के आधार पर आपके क्लेम को रिजेक्ट भी किया जा सकता है.

3. म्यूचुअल फंड्स

कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं जो एसआईपी स्कीम के साथ कॉमप्लिमेंट्री इंश्योरेंस कवर की सुविधा देती हैं. यदि किसी निवेशक की एसआईपी का कार्यकाल पूरा होने से पहले मृत्यु हो जाती है, तो बाकी की एसआईपी किश्तों का भुगतान बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है. इससे नॉमिनी पर SIP का बोझ नहीं पड़ता है.

आदिल शेट्टी कहते हैं हालांकि, इस बीमा से जुड़े कुछ नियम और शर्तें हैं. इंश्योरेंस की सुविधा लेने के लिए पहले आपको एक निश्चित अवधि के लिए एसआईपी का भुगतान करना पड़ सकता है. एसआईपी का कार्यकाल पूरा होने पर, इंश्योरेंस प्रोटेक्शन भी खत्म हो जाती है.

4. बैंक डिपॉजिट

जो लोग निवेश में रिस्क नहीं लेना चाहते हैं उनके लिए बैंक डिपॉजिट, खासकर कि फिक्स्ड डिपॉजिट, हमेशा पसंदीदा ऑप्शन रहेगा. हालांकि, बहुत से लोगों को पता नहीं है कि बैंक डिपॉजिट में इनबिल्ट इंश्योरेंस कवर भी होता है. वास्तव में, बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (DIGCI) द्वारा 1 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट पर फिक्स्ड डिपॉजिट पर गारंटी दी जाती है. इसलिए, अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है, तो आपका बैंक डिपॉजिट या 1 लाख रुपये तक की एफडी सुरक्षित रहेगी.

5. EPF

अगर आप एक सैलरीड पर्सन हैं और EPFO ​​(कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के सदस्य हैं यानी अगर आप ईपीएफ में योगदान करते हैं और इसके एक्टिव मेंबर हैं, तो आप 6 लाख रुपये तक के इंश्योरेंस कवर के लिए भी एलिजिबल हैं. अगर आपकी सर्विस पीरियड के दौरान मृत्यु हो जाती है तो आपके वारिस या नॉमिनी को 6 लाख तक की बीमा कवर की रकम मिलेगी. इस बीमा कवर को कर्मचारी जमा बीमा योजना (EDLI) कहा जाता है. कवर मृत्यु से पहले रोजगार के पिछले बारह महीनों के दौरान निकाले गए वेतन पर निर्भर करता है.

Story: Sanjeev Sinha

 

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