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ले रहे हैं लाइफ इंश्योरेंस तो समझ लें तीन साल वाला गणित, क्लेम नहीं होगा रिजेक्ट

लाइफ इंश्योरेंस आपके बाद आपकी फैमिली के फ्यूचर के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है. लेकिन इसे लेने से पहले इससे जुड़े तीन साल वाले नियम को जान लेना जरूरी है.

November 25, 2018 12:00 PM
3 year clause of life insurance policyImage: Reuters

लाइफ इंश्योरेंस आपके बाद आपकी फैमिली के फ्यूचर के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है. लेकिन इसे लेने से पहले इससे जुड़े तीन साल वाले नियम को जान लेना जरूरी है.

दरअसल लाइफ इंश्योरेंस नियमों के तहत पॉलिसी के तीन सालों को लेकर एक क्लॉज बनाया गया है. इसके तहत शुरुआती तीन सालों में पॉलिसी क्लेम किए जाने पर पॉलिसी इंश्योरर आपके क्लेम पर न केवल सवाल उठा सकता है बल्कि उसे रिजेक्ट भी कर सकता है.

ये 3 साल ऐसे काउंट किए जाते हैं—

— पॉलिसी जारी किए जाने वाले दिन से
— रिस्कश्य शुरू होने के दिन से
— पॉलिसी रिवाइवल वाले दिन से
— पॉलिसी के लिए राइडर वाले दिन से

यह इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के सेक्शन 45 के तहत उल्लिखित है. भारती एक्सा लाइफ की वेबसाइट पर इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के बारे में मौजूद जानकारी के मुताबिक सेक्शन 45 के नियम इस तरह हैं.

जानकारी छिपाना पड़ेगा महंगा

अगर कोई पॉलिसी लेते वक्त इंश्योरर से कुछ चीजें छिपा लेता है यानी उसे अपनी जान से जुड़े जोखिमों या अन्य बारे में पूरी जानकारी नहीं देता है तो इसे फ्रॉड माना जाएगा. ऐसे में तीन साल के अंदर पॉलिसी क्लेम किए जाने पर क्लेम अटक सकता है. सेक्शन 45 इंश्योरर को यह अधिकार देता है कि पॉलिसी के शुरुआती तीन सालों के अंदर क्लेम किए जाने पर वह उस पर सवाल खड़े कर सके. क्लेम किन कारणों से रोका जा रहा है, इस बारे में इंश्योरर पॉलिसीधारक या उसके लीगल रिप्रेजेंटेटिव या नॉमिनी को लिखित में जानकारी देगा.

साबित करना होगा क्लेम है सही

इंश्योरर की ओर से फ्रॉड या जानकारी छिपाए जाने का दावा किए जाने को अगर पॉलिसी धारक गलत साबित कर दे तो उसका क्लेम नहीं रुकेगा.

ऐसे में नहीं डूबेगा प्रीमियम

अगर क्लेम रोकने का कारण फ्रॉड नहीं बल्कि मिसस्टेटमेंट है तो क्लेम रोके जाने की तारीख तक पॉलिसी पर भरे गए प्रीमियम को पॉलिसीधारक या उसके लीगल रिप्रेजेंटेटिव या नॉमिनी को लौटाना होगा. इसके लिए 90 दिनों का वक्त तय है.

तीन साल पूरे होने पर नहीं रुकेगा क्लेम

सेक्शन 45 में हुए संशोधन के बाद अब यह नियम है कि लाइफ इंश्योरेंस की किसी भी पॉलिसी के 3 साल पूरे होने के बाद उसके दावे को लेकर किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जा सकता. यानी किसी भी आधार पर दावा रद्द नहीं किया जा सकता.

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