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टैक्स बचाने के लिए कर रहे हैं निवेश, जल्दबाजी में आपसे हो सकती हैं ये 10 गलतियां

वित्त वर्ष 2018-19 खत्म होने में कुछ ही दिन बचे हैं. अपने निवेश पर अधिक से अधिक रिटर्न के साथ टैक्स बचाने के लिए विकल्प खोजने के लिए यह अंतिम समय है.

March 22, 2019 8:46 AM
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Investment Mistake: वित्त वर्ष 2018-19 समाप्त होने ही वाला है और इसमें अब बस कुछ ही दिन बचे हैं. इस समय लोग अधिकतम रिटर्न के साथ टैक्स बचाने के लिए निवेश विकल्पों की तलाश में रहते हैं और जल्दबाजी में कुछ निवेशक ऐसे प्रॉडक्ट ले लेते हैं जिसमें निवेश करने से उन्हें फायदे की बजाय नुकसान हो जाता है. टैक्स बचाने के लिए सबसे बेहतर निवेश विकल्प का चयन करना आसान काम नहीं है क्योंकि यह ऐसा होना चाहिए जिससे न सिर्फ आपके लांग टर्म इंवेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव पूरे हों बल्कि शॉर्ट टर्म ऑब्जेक्टिव भी पूरे हो जाएं.

टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, एनएससी, टैक्स सेविंग एफडी, यूलिप, ईएलएसएस आदि में निवेश का विकल्प होता है. इतने सारे टैक्स सेविंग प्रॉडक्ट्स होने के कारण यह जरूरी हो जाता है कि आप फाइनेंसियल प्लानिंग पहले से बना लें. आइए जानते हैं कि जल्दबाजी में आपसे कौन-कौन सी Investment Mistakes हो सकती हैं जिससे आपका आर्थिक हित प्रभावित हो सकता है.

ये रहे 10 सामान्य Investment Mistakes

1. निवेश के लिए कोई प्लानिंग नहीं

हर शख्स के वित्तीय लक्ष्य और प्राथमिकताएं अलग होती हैं और उन्हें इसी के आधार पर निवेश विकल्पों को खोजना चाहिए. लंबे समय के लिए निवेश पर टैक्स बेनेफिट्स से लोगों को इसमें निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता है लेकिन इसमें निवेश से पहले अपनी प्राथमिकताएं और वित्तीय लक्ष्य को लेकर सोच लें.

2. निवेश में देरी

टैक्स बचत निवेश के लिए वर्ष के अंत तक का इंतजार करना सही नहीं है क्योंकि अंतिम समय में की गई जल्दबाजी से आप गलत निर्णय ले सकते हैं. एलआईसी म्युचूअल फंड में प्रॉडक्ट एंड बिजनस डेवलपमेंट हेड एल कुमार के मुताबिक वित्त वर्ष के अंतिम समय में लोग सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश कर देते हैं और कभी-कभी यह उनके रिस्क प्रोफाइल और गोल्स के मुताबिक सही निवेश नहीं साबित होता है.

3. सही निवेश विकल्प न चुनना

अगर किसी निवेश के जरिए आपका वित्तीय लक्ष्य नहीं पूरा हो रहा है तो यह आपको भविष्य में वित्तीय तौर पर गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है. अगर आपने ऐसा कोई विकल्प चुना है जिसमें आपको इस समय सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिल जा रही है लेकिन मेच्योरिटी के समय उस पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी तो यह आपकी टैक्स देनदारी बढ़ाएगा. यह टैक्स देनदारी उससे भी अधिक हो सकती है जितनी आज आप टैक्स बचाने के लिए निवेश कर रहे हैं.

4. इमरजेंसी के समय के लिए रखे पैसे से निवेश

अगर आपने किसी आपात स्थिति के लिए रिजर्व में रखे गए पैसे को सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश कर रहे हैं तो यह बड़ी गलती साबित हो सकती है. अगर किसी वजह से आपको पैसे की जरूरत पड़ गई तो आपके सामने नकदी संकट आ सकता है क्योंकि टैक्स सेविंग के लिए किए गए निवेश में कुछ समय का लॉक इन पीरियड होता है जिसके पहले आप उसे नहीं निकाल सकते हो. ऐसी परिस्थिति में नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए आपको कर्ज लेना पड़ सकता है जिससे आप पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा.

5. क्षमता से अधिक रिस्क लेना

अगर आपने टैक्स बचाने के लिए जल्दबाजी में ऐसे किसी प्रॉडक्ट में निवेश कर दिया है जिसमें रिस्क बहुत है तो आपको लॉस हो सकता है. बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर आप हो सकता है कि लॉस में ही रि़डीम करा लें.

6. एकमुश्त निवेश करना

अगर आप किसी रिस्की प्रॉडक्ट में एकमुश्त राशि निवेश करते हैं तो यह नियमित अंतराल पर किए गए निवेश की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकता है. बाजार से जुड़े विकल्पों में निवेश करने के लिए एकमुश्त की बजाय सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) हमेशा बेहतर होता है.

7. रिसर्च न करना

जहां भी आप निवेश कर रहे हैं उसके पिछले प्रदर्शन पर आपको रिसर्च करना चाहिए. हालांकि एल कुमार का कहना है कि निवेश विकल्प के चयन में सिर्फ पास्ट रिटर्न्स पर ही भरोसा नहीं करना चाहिए. कुमार के मुताबिक किसी म्यूचुअल फंड को खरीदते समय यह देखें कि बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान मैनेजर का परफॉरमेंस कैसा रहा.

8. सिर्फ एक ही जगह निवेश करना

अगर आप अपने पैसे को सिर्फ एक ही जगह निवेश कर रहे हैं तो आप अपने रिटर्न्स को सिर्फ एक विकल्प के प्रदर्शन तक सीमित कर रहे हैं. आपको अपनी पूरे पैसे को कई हिस्सों में बांटकर कई विकल्पों में निवेश करना चाहिए.

9. फाइनेंसियल प्लान का रिव्यू न करना

परिवार में सदस्यों के बढ़ने और आय बढ़ने पर आपको अपने फाइनेंसियल प्लान को बदलना चाहिए. अगर आप पुराने फाइनेंसियल प्लान से ही जुड़े रहते हैं तो आप कई फाइनेंसियल गोल नहीं पा सकेंगे.

10 निवेश की मॉनिटरिंग न करना

आपको अपने निवेश को समय-समय पर मॉनिटर करते रहना चाहिए कि क्या वे आपके लक्ष्य के मुताबिक प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके परफॉर्मेंस के आधार पर आप अपने पोर्टफोलियो से आप किसी प्रॉडक्ट्स को को ऐड या डिलीट कर सकते हैं.
(स्टोरीः अमिताव चक्रवर्ती)

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