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  1. 9 साल में चीन से दोगुनी रफ्तार से बढ़ी भारत की जनसंख्या, 136 करोड़ हुई आबादी: रिपोर्ट

9 साल में चीन से दोगुनी रफ्तार से बढ़ी भारत की जनसंख्या, 136 करोड़ हुई आबादी: रिपोर्ट

Population: भारत की आबादी चीन से दोगुनी रफ्तार से बढ़ी

April 11, 2019 10:46 AM
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UN Report On Population: 2010 से 2019 के बीच भारत की जनसंख्या चीन की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है. इस दौरान भारत की जनसंख्या 1.2 फीसदी औसत वार्षिक दर से बढ़कर 1.36 अरब यानी 136 करोड़ हो गई है. यह चीन की वार्षिक वृद्धि दर के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है. इस बात का खुलासा संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट में हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ एजेंसी ने स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2019 के नाम से रिपोर्ट जारी की है.

Population: इंडिया Vs चीन

2019 में भारत की जनसंख्या 1.36 अरब पहुंच गयी है, जो 1994 में 94.22 करोड़ और 1969 में 54.15 करोड़ थी. इसकी तुलना में, 2019 में चीन की आबादी 1.42 अरब पहुंच गई है, जो 1994 में 1.23 अरब और 1969 में 80.36 करोड़ थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 और 2019 के बीच चीन की आबादी 0.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढ़ी है. विश्व की जनसंख्या 2019 में बढ़कर 771.5 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल 763.3 करोड़ थी.

भारतीयों की औसत उम्र

भारत ने जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में सुधार दर्ज किया है. 1969 में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 47 साल थी, जो 1994 में 60 साल और 2019 में 69 साल हो गई है. विश्व की औसत जीवन प्रत्याशा दर 72 साल है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1969 में प्रति महिला कुल प्रजनन दर 5.6 थी, जो 1994 में 3.7 रह गई.

किस आयु वर्ग के कितने लोग

रिपोर्ट में 2019 में भारत की जनसंख्या के विवरण का एक ग्राफ दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि देश की 27-27 फीसदी आबादी 0-14 साल और 10-24 साल की आयु वर्ग में है, जबकि देश की 67 फीसदी जनसंख्या 15-64 आयु वर्ग की है. देश की 6 फीसदी आबादी 65 साल और उससे अधिक आयु की है.

मातृ मृत्यु दर घटा

भारत की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के संकेत देते हुये रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 1994 में प्रति 1,00,000 जन्मों में 488 मौतों से घटकर 2015 में प्रति 1,00,000 जन्मों में 174 मृत्यु तक आ गई. यूएनएफपीए की निदेशक जेनेवा मोनिका फेरो ने कहा कि आंकड़े ‘चिंताजनक’ है और दुनिया भर में करोड़ों महिलाओं के लिए सहमति और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के स्तर को बढ़ाना बेहद आवश्यक है.

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