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Kabul Siege : काबुल पर किसी भी वक्त हो सकता है तालिबान का कब्जा, अफगान राष्ट्रपति ने कहा- देश के लोगों पर युद्ध नहीं थोपने देंगे

अशरफ गनी ने पद छोड़ने या इस्तीफा देने का कोई ज़क्र नहीं किया. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अफगानी नेताओं को खुद अपने देश के लिए लड़ना होगा.

August 14, 2021 6:00 PM
taliban in afghanistanAbout the Taliban's promise to respect women's rights, Zhao said the situation in Afghanistan has experienced major changes

Taliban forces March towards Kabul : अफगानिस्तान की सेना तालिबान के सामने पस्त पड़ने लगी है. तालिबान अब राजधानी काबुल (Kabul) से सिर्फ 11 किलोमीटर दूर रह गया है. किसी भी वक्त राजधानी पर उसका कब्जा हो सकता है. तालिबानी लड़ाके अब तक देश की 17 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुके हैं. अब उन्हें सिर्फ काबुल पर कब्जा करना है. तालिबान के इस तरह बढ़ने के बीच राष्ट्रपति अशरफ गनी ने राष्ट्रीय टीवी पर लोगों को संबोधित किया और कहा कि वह अफगान लोगों पर किसी को युद्ध नहीं थोपने देंगे. उन्होंने पद छोड़ने या इस्तीफा देने का कोई ज़क्र नहीं किया. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अफगानी नेताओं को खुद अपने देश के लिए लड़ना होगा.

तालिबान के सामने पस्त हो रही हैं सरकारी सेना

अमेरिकी सेना की टुकड़ियां अपने राजनयिक और कर्मचारियों को देश से बाहर ले जाने के लिए वहां पहुंच रही हैं दूसरे कई देश भी अपने दूतावास में मौजूद कर्मचारियों को लेकर चिंतित हैं और उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में हैं. हालांकि तालिबान ने कहा है कि वह राजनयिकों और दूतावासों पर हमले नहीं करेगा. तालिबान ने देश दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहरों पर शुक्रवार को कब्जा कर लिया. सरकारी सुरक्षाबल तालिबान के लड़ाकों का मुकाबला नहीं कर पाए और अब कयास लगाया जा रहा है कि तालिबान कभी भी काबुल पर कब्जा कर लेगा.

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एक हजार लोगों की मौत, ढाई लाख बेघरबार

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, बीते एक महीने में अफगानिस्तान में एक हजार से ज्यादा आम नागरिकों की की मौत हुई है. बीबीसी न्यूज के मुताबिक तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया चीफ समेत कई राजनीतिक हत्याओं को भी अंजाम दिया है. अभी तक ढाई लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं. अमेरिकी सेना 20 साल बाद देश छोड़कर जा रही है, जिसके कारण तालिबान का दबदबा बढ़ रहा है और आशंका जताई जा रही है कि साल 2001 में सेना के आने के बाद मानवाधिकारों को लेकर जो सुधार हुए थे, वो सब खत्म हो जाएंगे. इस बीच तालिबान  प्रवक्ता मुहम्मद सुहैल शाहीन ने भारत की विकास परियोजनाओं की तारीफ की है. शाहीन ने कहा कि तालिबान सोचता है कि यह कदम प्रशंसनीय है. लेकिन भारत अगर अफगानिस्तान में सैन्य मौजूदगी चाहता है तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा.

 

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