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हवा से भी फैल रहा है कोरोना वायरस? वैज्ञानिकों ने कहा ‘Yes’; WHO फिर सवालों में

32 देशों के 239 वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोनावायरस हवा के जरिए भी फैलता है लेकिन डब्ल्यूएचओ इसे लेकर गंभीर नहीं है.

Published: July 6, 2020 8:48 AM
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है. असल में 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोनावायरस हवा के जरिए भी फैलता है लेकिन डब्ल्यूएचओ इसे लेकर गंभीर नहीं है और संगठन ने अपनी गाइडलाइंस में भी इस पर चुप्पी साधी हुई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के साक्ष्य हैं कि हवा के साथ छोटे कणों में चिपककर कोरोनावायरस लोगों को संक्रमित कर सकता है. ये वैज्ञानिक इस मुददे पर WHO से अपनी सिफारिशों में बदलाव करने की भी मांग कर रहे हैं.

प्रूफ होने का भी दावा

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के साक्ष्य हैं कि हवा के साथ छोटे कणों में चिपककर कोरोनावायरस लोगों को संक्रमित कर सकता है. वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं और उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से इस बीमारी से जुड़े दिशा-निर्देशों को संशोधित करने की मांग की है. वैज्ञानिकों ने WHO से कहा है कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाए.

क्या कहना है WHO का

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस प्रमुख रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक छोटे ड्रॉपलेट से फैलता है, जो छींकने या बोलने के दौरान मुंह से निकलते हैं. थूक के कण इतने हल्के नहीं होते जो हवा के साथ यहां से वहां उड़ जाएं. वे बहुत जल्द ही जमीन पर गिर जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इस पर WHO ने कहा कि इस वायरस के हवा में मौजूद रहने के जो सबूत दिए गए हैं, उनसे ऐसे किसी नतीजे में फिलहाल नहीं पहुंचा जा सकता कि यह एयरबोर्न वायरस है.

साइंटिफिक जर्नल में भी होगा पब्लिश

वैज्ञानिकों ने WHO को एक ओपन लेटर भेजा है. इन सभी वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं, जिससे यह माना जाए कि इस वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में तैरते रहते हैं, जो लोगों को संक्रमित कर सकते हैं. यह लेटर साइंटिफिक जर्नल में अगले सप्ताह प्रकाशित होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, चाहे छींकने के बाद मुंह से निकले थूक के बड़े कण हों या फिर बहुते छोटे कण हों, जो पूरे कमरे में फैल सकते हैं. जब दूसरे लोग सांस खींचते हैं तो हवा में मौजूद यह वायरस शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर देता है.

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